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“अयोध्या में धर्मध्वजा आरोहण: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा—🚩 धर्म ध्वजा केवल ध्वजा नहीं है भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है ।राममंदिर भारत की नई राष्ट्रीय चेतना का स्रोत”

🚩 धर्म ध्वजा से मिटेगी मुगल और मैकाले की सोच…आज सदियों के घाव भर रहे हैं


धर्म ध्वजा के साथ अयोध्या—भारत की सांस्कृतिक चेतना हुई उदय

अभिजीत मुहूर्त में पीएम मोदी ने श्रीराम मंदिर पर लहराया ऐतिहासिक ध्वज

ध्वज पताक तोरन पुर छावा।
कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा॥
सुमनबृष्टि अकास तें होई।
ब्रह्मानंद मगन सब लोई॥

“सियावर रामचन्द्र की जय” के घोष से गूँजती अयोध्या आज एक बार पुनः इतिहास लिखते हुए दिखाई दी। अभिजीत मुहूर्त में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर धर्म ध्वजा की स्थापना की—यह क्षण केवल पूजा नहीं, बल्कि सनातन चेतना के पुनरुत्थान का राष्ट्रीय संकल्प बन गया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, आरएसएस के परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपालदास जी, संत समाज व देश–दुनिया से आए भक्त उपस्थित रहे।


“सदियों की वेदना को आज विराम मिला”—प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा—
“आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष की साक्षी है।
500 वर्षों तक आस्था डिगी नहीं, विश्वास टूटा नहीं। आज वह संकल्प सिद्धि को प्राप्त हुआ है।”

मोदी जी ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक धार्मिक ध्वज नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक स्वाभिमान का ध्वज है।
भगवा रंग सूर्यवंशी तेज का प्रतीक है और कोबेदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति, करुणा, न्याय और समन्वय का द्योतक।


त्याग, तपस्या और समाज की सहभागिता को प्रधानमंत्री का प्रणाम

पीएम मोदी ने उन संतों, सुपुत्रों, कारसेवकों, कारीगरों और असंख्य दानवीरों को नमन किया जिन्होंने चुपचाप, निस्वार्थ भाव से इस अभियान में योगदान दिया।
उन्होंने कहा—
“राम मंदिर समाज की आस्था, संतों की साधना और जनता की सहभागिता का जीवंत प्रमाण है।”


राम मंदिर—भारतीय मूल्य व्यवस्था का विश्वविद्यालय

मोदी जी ने आग्रह किया कि जब भी भक्त अयोध्या आएं, सप्त मंदिरों—शबरी, निषादराज, अहिल्या, जटायु, वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र—के दर्शन अवश्य करें।
ये मंदिर बताते हैं कि राम केवल ईश्वर नहीं, बल्कि मित्रता, करुणा, समानता, कर्तव्य और सामाजिक सद्भाव के मार्गदर्शक हैं।


मैकाले की मानसिक गुलामी से मुक्ति—10 वर्षों का राष्ट्रीय संकल्प

प्रधानमंत्री ने तीखे शब्दों में कहा—
“1835 में मैकाले ने भारत की आत्मा को तोड़ने का प्रयास किया।
कानून, भाषा, इतिहास, शिक्षण—सबमें गुलामी का बीज बोया गया।
अब भारत आने वाले 10 वर्षों में मानसिक दासता को पूरी तरह समाप्त करेगा।”

उन्होंने स्पष्ट घोषणा की—
अब भारत अपनी शिक्षा नीति, अपनी परंपरा, अपने ज्ञान-शास्त्र, अपने आत्मविश्वास से चलेगा।


राम—राष्ट्र का आधार, मर्यादा और प्रेरणा

मोदी जी ने कहा—
“राम यानी सत्य, राम यानी पराक्रम, राम यानी सामाजिक न्याय,
राम यानी वह नेतृत्व—जो स्वयं से पहले समाज को रखता है।”

उन्होंने राम के रथ के छः स्तंभ बताए—
सत्य, सर्वोच्च आचरण, धैर्य, शौर्य, विवेक और परोपकार।
और कहा—यदि भारत भी इन मूल्यों को आत्मसात कर ले,
तो 2047 तक विश्व नेतृत्व भारत का होगा।


अयोध्या—परंपरा से आधुनिकता तक

प्रधानमंत्री ने बताया—
🔹 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अब तक दर्शन कर चुके
🔹 एयरपोर्ट, वंदे भारत, अमृत भारत स्टेशन से तीर्थ सुविधा
🔹 पर्यटन, व्यापर, रोज़गार से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत
🔹 अयोध्या—21वीं सदी की “धार्मिक–सांस्कृतिक व विकास मॉडल नगरी”


भारत—उदित होती विश्व शक्ति

मोदी जी ने कहा—
“70 वर्षों में भारत 11वीं अर्थव्यवस्था था,
पिछले 11 वर्षों में भारत पाँचवीं बन गया।
अब भारत तीसरी वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है।”


धर्म ध्वजा—राष्ट्र के आत्मविश्वास का उद्घोष

प्रधानमंत्री ने भावपूर्ण आह्वान किया—
“कंधे से कंधा मिलाकर चलिए।
राम राज्य से प्रेरित राष्ट्र का निर्माण करिए।
और देश को 1000 वर्षों तक अडिग शक्ति बनाइए।”


अंत में —आज अयोध्या ने भारत को पुनः स्वयं से मिलाया

आज की ध्वज स्थापना ने यह संदेश दिया—
जब भारत अपनी जड़ों से जुड़ता है,
तो विश्व को दिशा देता है।


संपादकीय सार्थक चिंतन

यह केवल ध्वजा नहीं—
✔ संस्कृति का स्वाभिमान
✔ इतिहास का सम्मान
✔ शिक्षा का पुनर्लेखन
✔ समाज का एकीकरण
✔ भविष्य का संकल्प है

भारत अब स्वयं को परिभाषित करेगा—
अपनी भाषा में, अपनी चेतना में, अपनी विरासत में।


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