IMG-20260815-WA0013
previous arrow
next arrow
अयोध्याआस्थादेशविश्लेषणात्मक ग्राउंड रिपोर्ट

“अयोध्या धर्मध्वजा समारोह में माननीय मोहन भागवत बोले—राममंदिर से शुरू हुई भारत की नई राष्ट्रयात्रा”


धर्मध्वजा आरोहण ने दिया राष्ट्रनिर्माण का संदेश: मोहन भागवत

अयोध्या, संवाददाता।
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में मंगलवार को आयोजित ऐतिहासिक धर्मध्वजा आरोहण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने कहा कि राममंदिर का पूर्ण होना केवल धार्मिक संतोष का अवसर नहीं, बल्कि भारत की सार्थक, उत्तरदायी और मूल्याधारित यात्रा की नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह ध्वज शौर्य, समरसता और सतत लोककल्याण का प्रतीक है, जिसे अब समाज के आचरण में उतारना होगा।

भागवत ने स्मरण कराया कि पाँच सौ वर्षों के संघर्ष, बलिदान, सामाजिक तपस्या और असंख्य रामभक्तों के अथक प्रयासों ने इस क्षण को संभव बनाया। “जिन्होंने यह सपना देखा, जिन्होंने प्रयास किया, और जिन्होंने अपने प्राण अर्पित किए — आज उन्हें भी शांति और संतोष प्राप्त हुआ होगा,” उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा।

उन्होंने रामधर्म को सत्ता या वर्चस्व नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और करुणा का पथ बताते हुए कहा कि रामराज्य का स्वरूप तभी मूर्त होगा, जब समाज स्वयं चरित्र, अनुशासन और पारस्परिक सम्मान से आगे बढ़े। उन्होंने आह्वान किया कि मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद अब राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी और अधिक समर्पण से निभाई जानी चाहिए।

भागवत ने कहा कि भारत का उदय किसी के विरोध में नहीं, बल्कि विश्व के सुख, शांति और मानवकल्याण के लिए है। “हमारा ध्येय छाया देने वाले वटवृक्ष जैसा होना है — स्वयं धूप में खड़े रहकर भी दूसरों को संरक्षण देने वाला,” उन्होंने भावार्थ में कहा।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल, संत-धर्माचार्य और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मध्वजा आरोहण के साथ पूरे परिसर में ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष गूँज उठे।


Related Articles

error: Content is protected !!