“धर्मध्वजा आरोहण पर योगी बोले—राममंदिर 140 करोड़ भारतीयों के आत्मगौरव का प्रतीक”

“अयोध्या से उभरी राष्ट्रीय पहचान”-योगी
जय श्री राम!
अयोध्या आज केवल कोई नगर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आस्था, संस्कृति और सनातन जीवनदृष्टि का प्रकाशपुंज बनकर समूचे विश्व के सामने खड़ी है। यहां वह अवध है, जहां किसी का वध नहीं होता, और वह अयोध्या है, जहां युद्ध नहीं होता—जहां करुणा, समरसता और धर्म का व्यावहारिक स्वरूप जीवन बनकर बहता है।
भगवान श्री राम का यह भव्य, दिव्य और अद्वितीय मंदिर—सवा सौ करोड़ भारतीयों की श्रद्धा, सम्मान, स्वाभिमान और सांस्कृतिक उत्कर्ष का जीवंत प्रतीक है। राम हमारी संस्कृति का सार, हमारे कर्तव्य का आधार, हमारी भक्ति की शक्ति और हमारी राष्ट्रचेतना के शाश्वत प्रेरणास्रोत हैं। राम सबके हैं—और सबमें राम हैं।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम त्याग, तप, पराक्रम, नीति और लोककल्याण के आदर्श हैं। उनका शासन—रामराज्य—जहां धर्म का पालन हो, न्याय सबके लिए हो, भय किसी का न हो, और परस्पर प्रेम, संवाद तथा समरसता जीवन का आधार हो। यही रामराज्य भारतीय आत्मा का अनादि स्वप्न है।
आज वह ऐतिहासिक क्षण है, जब मंदिर के उत्तुंग शिखर पर केसरिया ध्वज लहराने जा रहा है—धर्म की विजय, राष्ट्र के स्वाभिमान, तप की तेजस्विता और सनातन संस्कृति की अक्षय ऊर्जा का प्रतीक। यह ध्वज ऋषियों का रंग है, वीरों का रंग है, संतों का रंग है—बलिदान, तपस्या, त्याग और विश्वकल्याण का रंग है।
इस मंदिर के निर्माण में भारत की संपूर्ण भू-संस्कृति एकाकार होकर दिखाई देती है—
उत्तर के गुलाबी पत्थर, दक्षिण का शिल्प, गुजरात की तकनीकी सहभागिता, पूर्वांचल के श्रमिकों की तप और ऋषिभूमि की प्रार्थनाएँ—यह केवल मंदिर नहीं, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की जीवंत अभिव्यक्ति है।
अयोध्या आज सांस्कृतिक पुनर्जागरण, सतत विकास, वैश्विक पर्यटन, अध्यात्म, अर्थनीति और सामाजिक समरसता का नया केन्द्र बन रही है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, सोलर सिटी, परिक्रमा मार्ग, सांस्कृतिक कॉरिडोर—सब मिलकर रामनगरी को वैश्विक धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित कर रहे हैं।
मैं उन सभी संतों, महापुरुषों, रामभक्तों, आंदोलनकर्ताओं, करसेवकों, श्रमिकों, दानदाताओं और उन अनगिनत आत्माओं को विनम्र नमन करता हूं, जिन्होंने इस युगांतकारी क्षण के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया।
और सबसे बड़ा सम्मान—उन करोड़ों भारतीयों का, जिनकी अटल श्रद्धा, अनंत धैर्य और तपस्वी प्रतीक्षा ने यह स्वप्न साकार किया।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने विरासत और विकास को साथ लेकर विश्व मंच पर एक नए आत्मविश्वास के साथ खड़ा होना प्रारंभ किया है। आज का दिवस केवल ध्वजारोहण का नहीं—एक नए राष्ट्रीय युगोदय का शुभारंभ है।
यह कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं—यह सांस्कृतिक संकल्प है कि भारत अपनी आत्मा, अपनी परंपरा, अपने धर्म और अपने मानवीय मूल्य कभी नहीं भूलेगा।
आइए, रामराज्य के आदर्शों को जीवन में उतारें—
धर्म हमारा आचरण बने,
सेवा हमारी पहचान बने,
समरसता हमारी संस्कृति बने।
रामलला के चरणों में यही प्रार्थना—
भारत सुखी हो, समृद्ध हो, विजयी हो।
जय जय श्री राम!



