गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा—पुष्कर से उठी राष्ट्रीय पहल -दिल्ली तक चलेगा संकीर्तन आधारित संवाद अभियान

🌼 ब्रह्मा की नगरी पुष्कर से उठा “गौ सम्मान आह्वान अभियान” का महाशंख
दिसंबर से पूरे भारत को झकझोरने वाला अहिंसक संवाद आंदोलन तय
पुष्कर (अजमेर), 29 नवंबर।
तीर्थराज पुष्कर की पवित्र वसुंधरा पर आज एक ऐसा राष्ट्रीय संकल्प जागा, जो आने वाले महीनों में देश के शासन–प्रशासन को नई सोच, नए कानून और नई नीति की ओर प्रेरित करेगा। शीतल आश्रम में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन भारत के 250 से अधिक संतों, गोभक्तों और गोसेवकों ने गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे ऐतिहासिक संकल्प लेते हुए “गौ सम्मान आह्वान अभियान” की राष्ट्रव्यापी रूपरेखा पर सर्वसम्मति मुहर लगाई।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णय — यह अभियान किसी संस्था, संगठन या राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं चलेगा, बल्कि केवल गौमाता और नंदी महाराज के पवित्र प्रतीक के साथ, पूर्णतः अहिंसक और आध्यात्मिक पद्धति से आगे बढ़ेगा।
इस अवसर पर ब्रजमंडल क्षेत्र के प्रमुख संत मालूक पीठाधीश्वर राजेन्द्र दास जी महाराज, उनके कृपा पात्र पूज्य गोपेश कृष्ण दास महाराज “गोपेश बाबा”, प्रसिद्ध भजन सम्राट प्रकाश नाथ महाराज (टोंक), ओंकार दास महाराज (काशी), प्रकाश नारायण जी महाराज (गुजरात), चन्द्रमा दास जी महाराज (सीकर), सुदर्शन दास जी महाराज (कुचामन), परमानंद जी महाराज (दौसा) सहित अनेक संतों ने उपस्थित जनों को दिशा और आशीष प्रदान किया।
✦ गौ रक्षा के लिए संतों के तीखे, ठोस और निर्णायक प्रस्ताव

कार्यशाला में संतों व गोसेवकों ने केंद्र और राज्य सरकारों से निम्न प्रमुख मांगें रखीं—
- गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु केन्द्रीय कानून बने।
- गोतस्करी में लिप्त अपराधियों को आजीवन कारावास का प्रावधान हो।
- जब्त वाहन गोशालाओं के उपयोग में दिए जाएं।
- गोबर–गोमूत्र आधारित अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित हों।
- पंचगव्य आधारित औषधियाँ सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में नि:शुल्क वितरित हों।
- सभी सरकारी भवनों में गोबर पेंट और गौनाइल अनिवार्य किया जाए।
- गौशालाओं को मनरेगा से जोड़ा जाए।
- बिजली बिल और चारे की व्यवस्था में विशेष छूट मिले।
**✦ अभियान की चरणबद्ध राष्ट्रीय कार्ययोजना
देश में पहली बार इतना सुव्यवस्थित व दीर्घकालिक ‘गौ सम्मान संवाद अभियान’**
➤ 1 दिसंबर 2025 — मार्च 2026 : राष्ट्रव्यापी जनजागरण, प्रचार–प्रसार
➤ 27 अप्रैल 2026 : ऐतिहासिक दिन
देश के 5000 तहसील केंद्रों पर एक ही समय–एक ही दिन
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम सामूहिक प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे।
सरकार को इस पर तीन माह का समय दिया जाएगा।
➤ जुलाई–अक्टूबर 2026
यदि कोई निर्णय नहीं हुआ, तो
देश के 790 जिलों और राज्यों के मुख्यालयों पर पुनः चरणबद्ध कार्यक्रम।
➤ 27 फरवरी 2027 – 15 अगस्त 2027
संतों व गोभक्तों का दिल्ली में अहिंसक, शांतिपूर्ण संकीर्तन–आधारित राष्ट्रीय संवाद।
पत्र-लेखन, प्रार्थना और सतत संकीर्तन के माध्यम से नीति–निर्माताओं तक संदेश।
✦ अभियान का स्वरूप पूर्णतः अहिंसक, गैर-राजनीतिक और अनुशासित
- कोई भाषण नहीं
- कोई राजनीतिक झंडा–बैनर नहीं
- कोई नारा नहीं
- कोई संपत्ति को नुकसान नहीं
- केवल संकीर्तन, प्रार्थना और जनजागरण के माध्यम से संदेश
- प्रतीक सिर्फ नंदी महाराज और गौमाता
✦ दो दिवसीय कार्यशाला का निष्कर्ष
देशभर से आए संतों और गोसेवकों ने
“गौ सेवा, गौ सुरक्षा और गौ सम्मान” की पवित्र प्रतिज्ञा के साथ
कार्यशाला का समापन किया।
🌿 ‘सार्थक चिंतन’ — संपादकीय दृष्टिकोण
गौ रक्षा पर भारत में बहुत बार आवाजें उठीं, पर पहली बार इतनी सुव्यवस्थित, समयबद्ध और अहिंसक कार्य-योजना सामने आई है, जो शासन तंत्र को बिना संघर्ष, बिना टकराव और बिना राजनीति के संवाद–आधारित दबाव के लिए प्रेरित करती है।
यह आन्दोलन किसी संगठन का नहीं, बल्कि समाज का है। यह किसी विचारधारा का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा का आह्वान है।
यदि यह अभियान अपनी मर्यादा, अनुशासन और सात्त्विकता को बनाए रखता है, तो यह आने वाले समय में भारत की गौ नीति और पर्यावरण–आर्थिक मॉडल को नए आयाम दे सकता है —
क्योंकि गौमाता सिर्फ आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि–अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्राम विकास का भी मूल है।
सरकार के लिए यह एक संकेत है कि
जनता की भावनाएं अब केवल आंदोलन नहीं, बल्कि नीति–निर्माण का आग्रह बन चुकी हैं। – राजेश कुमरावत ‘सार्थक’



