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काशी में चमत्कार! “जब दुनिया मोबाइल में खोई थी, तब एक 19 वर्षीय युवक ने बिना ग्रंथ 50 दिन वेद-पारायण कर दिखाया : क्या शुरू हो चुका है वेद-संस्कृति का स्वर्णयुग?”

“समझिए… आधुनिक भटकाव के बीच यह युवा कैसे सनातन की ज्योति बनकर खड़ा हुआ — कहानी जो हर युवा को पढ़नी चाहिए”


काशी में उदित हुआ वेद–तेज : युवा पीढ़ी के लिए युग-परिवर्तक संदेश

काशी… जहाँ स्वयं महादेव की कृपा संकल्प बनकर उतरती है, जहाँ ज्ञान नदियों की तरह शाश्वत बहता है, उसी पावन धरा ने हाल ही में एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण देखा—जिसे सनातन समाज आने वाले शताब्दियों तक स्मरण रखेगा। यह केवल एक विद्यार्थी का गौरव नहीं, बल्कि वेद परंपरा के पुनर्जागरण का युग-संकेत है।

अहिल्यानगर (महाराष्ट्र) के तेजस्वी नवयुवक
देवव्रत महेश रेखे
ने मात्र 19 वर्ष की आयु में वह कर दिखाया जिसे सुनकर ही हृदय विस्मित और आत्मा गर्व से पुलकित हो उठती है।

🔱 दण्डक्रम वेद-पारायण — 50 दिवसीय अलौकिक साधना

  • 25 लाख से अधिक वेद-पद
  • लगातार 50 दिन
  • बिना किसी ग्रंथ-सहाय के
  • एक भी त्रुटि के बिना

यह केवल उच्चारण नहीं, बल्कि ऋषि-स्मृति की पुनर्बहाली और वेदध्वनि का पुनरुत्थान है, जिसने सनातन संस्कृति का मस्तक विश्वभर में ऊँचा कर दिया है।


गुरु-परंपरा की छत्रछाया में दिव्य सम्मान

इस विराट तप-साधना के समापन पर काशी में आयोजित भव्य अभिनंदन समारोह में
पूज्य डॉ. दिव्यचेतन ब्रह्मचारी गुरुजी
की पावन उपस्थिति ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।

युवा तपस्वी को—

  • 🌺 चांदी की हनुमान चालीसा
  • 🌺 प्रभु श्रीराम का दिव्य विग्रह
  • 🌺 माँ भगवती के चंदन–इत्र प्रसाद
    समर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्रदान किए गए।

इसके साथ ही, श्रृंगेरी शारदा पीठ के
जगद्गुरु श्री शंकराचार्य जी की ओर से—

  • 🌟 स्वर्ण कड़ा
  • 🌟 ₹1,00,000 की आशीर्वाद राशि
    प्रदान की गई — जो इस युवा वेद–रत्न की तपस्या और निष्ठा को सर्वोच्च प्रमाणित करती है।

राष्ट्रीय और आध्यात्मिक आशीर्वाद का संगम

  • परमहंस परिव्राजकाचार्य श्री श्री नृसिंह आश्रम स्वामी महाराज का आशीर्वाद
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ सदस्य श्री सुरेश जी सोनी द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा

इसके पश्चात देवव्रत रेखे ने माता अन्नपूर्णेश्वरी मंदिर में दर्शन कर अपनी साधना को पूर्णता का सौभाग्य प्राप्त किया।


✍️ यह सम्मान किसी एक का नहीं — यह सनातन का वैभव है

आज जब आधुनिकता के चकाचौंध में युवा पीढ़ी दिशाहीनता के साथ भटक रही है,
उसी समय देवव्रत जैसे युग-निर्माता युवा संपूर्ण विश्व को यह संदेश दे रहे हैं कि—

“जो संस्कृति हमें वेद का प्रकाश देती है, वही जीवन का भविष्य बदल सकती है।”

एक ओर कुछ युवा समय और जीवन का मूल्य भूल रहे हैं,
तो दूसरी ओर यह तेजस्वी पीढ़ी
वेद-संस्कृति की ध्वजा को विश्व-शिखर पर स्थापित कर रही है।

यह घटना केवल प्रेरणा नहीं—
सनातन संस्कृति के वैश्विक पुनरुत्थान का उद्घोष है।


सार्थक चिंतन

“युवा शक्ति जब सनातन शक्ति से जुड़ती है,
तो युग बदलते हैं, समाज उठ खड़ा होता है
और संस्कृति अमर हो जाती है।”

देवव्रत रेखे केवल एक युवक नहीं—
वे आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, अनुशासन, साधना और संस्कार का जीवंत प्रतिमान है। – राजेश कुमरावत ‘सार्थक’


🚩🚩 हर हर महादेव 🚩🚩

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