मानवता की जीत: आगर मालवा में सीपीआर से बची जान, सामूहिक विवाह में होमगार्ड जवान की तत्परता

जब धड़कनें थमने लगीं और इंसानियत जाग उठी—मौत के मुहाने से लौट आई एक ज़िंदगी
सामूहिक विवाह मंच बना जीवन रक्षा का साक्षी, होमगार्ड जवान ने सीपीआर देकर रच दिया मानवता का उदाहरण
जनमत जागरण @ आगर- मालवा: जीवन कई बार एक क्षण के निर्णय पर टिक जाता है।
एक सही हाथ, एक सही तकनीक और एक सजग मन—और मौत पीछे हट जाती है।
आगर मालवा जिले में आयोजित 551 जोड़ों के भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान ऐसा ही एक पल आया, जिसने यह साबित कर दिया कि प्रशिक्षण जब संवेदनशीलता से जुड़ जाए, तो वह केवल कर्तव्य नहीं, जीवन का वरदान बन जाता है।
उत्सव, मंगल गीतों और खुशियों के बीच अचानक मंच के समीप खड़े अक्षय शर्मा, निवासी नरवल, को तीव्र घबराहट हुई और वे अचेत होकर भूमि पर गिर पड़े। कुछ ही पलों में उल्लास का वातावरण सन्नाटे में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक में हार्ट अटैक के स्पष्ट लक्षण दिखाई दे रहे थे। सांसें लड़खड़ा रही थीं, चेहरे पर पीड़ा थी और समय तेज़ी से हाथ से फिसलता जा रहा था।
इसी निर्णायक क्षण में थाना सोयतकला में पदस्थ होमगार्ड जवान महेश प्रजापति—जो कार्यक्रम में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे—ने न केवल स्थिति को समझा, बल्कि वह किया जो हर प्रशिक्षित व्यक्ति से अपेक्षित होता है, पर कर पाते हैं बहुत कम। बिना किसी घबराहट के, बिना भीड़ की परवाह किए, उन्होंने युवक को तत्काल सीपीआर (CPR) देना प्रारंभ किया।

कुछ ही क्षणों बाद वह चमत्कार हुआ, जिसे चिकित्सा विज्ञान समय पर हस्तक्षेप कहता है—युवक की रुकी हुई सांसें लौट आईं, धड़कनें फिर से जीवन का संकेत देने लगीं। तत्पश्चात युवक को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
घटना के संबंध में होमगार्ड जवान महेश प्रजापति ने बताया कि उन्हें पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में समय-समय पर आपात चिकित्सा, सीपीआर एवं जीवन रक्षक प्रशिक्षण दिया जाता रहा है। प्रशिक्षण में यही सिखाया गया था कि ऐसी परिस्थिति में सबसे पहले स्वयं को संयमित रखें और तुरंत सही प्रक्रिया अपनाएं। आज वही प्रशिक्षण किसी अनजान युवक के लिए जीवनदायिनी शक्ति बन गया।
चिकित्सकों का भी स्पष्ट मत है कि यदि सीपीआर देने में कुछ मिनटों की भी देरी हो जाती, तो परिणाम अपूरणीय हो सकते थे। समय पर की गई यह कार्रवाई युवक के जीवन और उसके परिवार की खुशियों के लिए निर्णायक सिद्ध हुई।
इस संवेदनशील, साहसिक और मानवीय कार्य के बाद आयोजन स्थल पर उपस्थित नागरिकों, परिजनों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने होमगार्ड जवान महेश प्रजापति की भावुक होकर सराहना की। यह घटना केवल एक जीवन बचने की खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए एक जागृत संदेश है—
👉 सीपीआर केवल डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं, हर जागरूक नागरिक का दायित्व है।
👉 आपात स्थितियों का प्रशिक्षण जीवन और मृत्यु के बीच सेतु बन सकता है।
👉 पुलिस और होमगार्ड बल केवल सुरक्षा के नहीं, बल्कि जीवन के प्रहरी हैं।
आगर मालवा पुलिस द्वारा दिया गया यह उदाहरण समाज में मानवीय संवेदना, जिम्मेदारी और प्रशिक्षण की महत्ता को और अधिक दृढ़ करता है—ताकि जब अगली बार किसी की धड़कनें लड़खड़ाएं, कोई हाथ आगे बढ़कर जीवन को थाम सके।



