अंधेरिया बाग की 400 वर्ष पुरानी छतरियों में महाअभिषेक संपन्न, प्रशासनिक निगरानी में शांतिपूर्ण रहा महाशिवरात्रि पर्व

अंधेरिया बाग की प्राचीन छतरियों में सर्व हिंदू समाज ने किया महाअभिषेक, प्रशासनिक निगरानी में शांतिपूर्वक संपन्न हुआ पर्व
जनमत जागरण @ सोयतकलां / निकुंज कुमरावत। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अंधेरिया बाग स्थित लगभग 400 वर्ष प्राचीन मानी जाने वाली तीन छतरियों में स्थापित शिवलिंगों पर सर्व हिंदू समाज द्वारा विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं महाअभिषेक किया गया। पूर्व में संवेदनशील रहे इस विषय को देखते हुए प्रशासन पूर्णतः सतर्क रहा और आपसी सहमति से पर्व शांतिपूर्वक संपन्न कराया गया।

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भी जलाभिषेक को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी थी, जिसके बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों की बैठक आयोजित कर सीमित संख्या में पूजन की अनुमति प्रदान की थी। इस वर्ष भी महाशिवरात्रि से पूर्व प्रशासन ने दोनों पक्षों को बुलाकर शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से बैठक की। आपसी संवाद और प्रशासनिक समन्वय के परिणामस्वरूप आज प्रातः से ही निर्धारित मर्यादा एवं व्यवस्था के अंतर्गत सर्व हिंदू समाज ने शिवलिंग का पूजन, जलाभिषेक एवं महाअभिषेक संपन्न किया।
बुजुर्गों के अनुसार अंधेरिया बाग की ये छतरियां लगभग चार शताब्दी पुरानी हैं और यहां त्योहारों पर पूजा-अर्चना की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसी परंपरा के निर्वहन हेतु आज समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि कुंवर पुष्करराज सिंह जादौन, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष चिंतामन राठौर, स्वदेशी जागरण मंच जिला संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमरावत, सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र शर्मा, विश्व हिंदू परिषद जिला मंत्री जितेंद्र सिंह राठौड़ सहित विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के कार्यकर्ता एवं सर्व हिंदू समाज के नागरिक उपस्थित रहे।

प्रशासनिक दृष्टि से भी व्यवस्था सुदृढ़ रही। एसडीओपी सुसनेर श्री देवनारायण यादव, तहसीलदार श्री राजेश श्रीमाल, थाना प्रभारी श्री रामगोपाल वर्मा सहित पुलिस बल पूरे समय उपस्थित रहा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रशासन की तत्परता एवं दोनों पक्षों की समझदारी से पर्व शांति, संयम और सामाजिक सौहार्द के साथ संपन्न हुआ।

महाशिवरात्रि के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि संवाद, प्रशासनिक संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ संवेदनशील विषयों का समाधान संभव है। आने वाले समय में भी ऐसी परंपराओं के निर्वहन में कानून-व्यवस्था एवं आपसी सद्भाव को सर्वोपरि रखा जाएगा।
सोयतकलां से विशेष रिपोर्ट।
“महाशिवरात्रि का यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि संवाद, संयम और प्रशासनिक संतुलन से संवेदनशील मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।”
🔹 संपादकीय चिंतन :
आस्था, समय और मौन का रहस्य
कभी-कभी इतिहास अपने अस्तित्व की रक्षा स्वयं करता है। अंधेरिया बाग की प्राचीन छतरियां और उनमें स्थापित शिवलिंग मानो उसी मौन इतिहास की जीवित अभिव्यक्ति हैं। चारों ओर समय का विस्तार हुआ, भूमि के स्वामित्व बदले, बस्तियां बसती गईं—पर यह स्थल जैसे समय की रेखा से बाहर खड़ा रहा।
स्थानीय लोगों के बीच वर्षों से यह जनविश्वास प्रचलित है कि जब भी इन छतरियों को हटाने या स्वरूप बदलने का प्रयास हुआ, परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। कोई इसे संयोग कहे, कोई दैवी संरक्षण; किंतु जनमानस इसे ईश्वरीय संकेत के रूप में देखता है। यही विश्वास इस स्थल को केवल पत्थरों का समूह नहीं रहने देता, बल्कि उसे चेतना का केंद्र बना देता है।
यहां प्रतिदिन आरती की ध्वनि भले न गूंजती हो, दीपक प्रतिदिन न जलते हों; पर मन की निष्ठा का प्रकाश निरंतर विद्यमान है। त्योहारों के अवसर पर जब समाज एकत्र होता है, तो वह केवल पूजा नहीं करता—वह अपनी स्मृतियों, अपनी परंपरा और अपने विश्वास का पुनर्स्मरण करता है।
रहस्य शायद संरचना में नहीं, बल्कि उस अदृश्य शक्ति में है जिसे समाज आस्था कहता है। इतिहास तर्क खोजेगा, कानून अधिकार तय करेगा, प्रशासन संतुलन बनाएगा—पर अंततः किसी भी पवित्र स्थल की रक्षा वही भाव करता है, जो पीढ़ियों से मन में संजोया गया हो।
अब देखना यह है कि यह स्थल भविष्य में केवल विवाद की चर्चा बनेगा या संवाद और सहअस्तित्व की मिसाल। क्योंकि आस्था तब तक दिव्य रहती है, जब तक वह मर्यादा और संयम के साथ चलती है।
अंधेरिया बाग की ये छतरियां आज भी मौन खड़ी हैं—मानो समय, समाज और संवेदनशीलता की अग्निपरीक्षा को निहारती हुईं।
“आस्था, मर्यादा और सद्भाव के इसी संदेश के साथ महाशिवरात्रि के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं — भोलेनाथ सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।”
-✍️ राजेश कुमरावत 'सार्थक'



