कक्षा 8वीं रिजल्ट में बड़ी गड़बड़ी: परीक्षा देने वाली छात्रा को ‘अनुपस्थित’ दिखाया, जांच के निर्देश

✍️ डिजिटल युग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज रफ्तार और तकनीक पर बढ़ते भरोसे के बीच यदि एक मासूम छात्रा की मेहनत को सिस्टम ‘अनुपस्थित’ बता दे, तो यह केवल एक त्रुटि नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करता है। सुसनेर क्षेत्र की एक छात्रा के साथ हुई यह घटना न सिर्फ तकनीकी खामी की ओर इशारा करती है, बल्कि उस मानसिक पीड़ा को भी उजागर करती है, जो एक निर्दोष छात्र को बिना गलती के झेलनी पड़ती है।
जनमत जागरण @सोयतकलां/सुसनेर।
शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां कक्षा 8वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुई एक छात्रा को ऑनलाइन रिजल्ट में ‘अनुपस्थित’ दर्शा दिया गया। यह मामला सुसनेर क्षेत्र के सोयत खुर्द परीक्षा केंद्र से जुड़ा है, जिसने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि एक छात्रा के मानसिक तनाव का कारण भी बन गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संध्या दांगी नाम की छात्रा ने निर्धारित परीक्षा केंद्र सोयत खुर्द में हिंदी विषय की परीक्षा दी थी। केंद्राध्यक्ष द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई है कि छात्रा परीक्षा में उपस्थित रही। इतना ही नहीं, केंद्र की उपस्थिति सूची में जिन 9 छात्रों को अनुपस्थित बताया गया है, उसमें भी संध्या का नाम शामिल नहीं है।
इसके बावजूद जब राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी ऑनलाइन परिणाम देखा गया, तो उसमें छात्रा को हिंदी विषय में ‘अनुपस्थित’ दर्शा दिया गया, जिसके कारण उसका परिणाम प्रभावित हुआ।

⚠️ जिला शिक्षा अधिकारी का बयान:
इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश जाट ने कहा कि—
“तकनीकी त्रुटि या मिस प्रिंट की संभावना हो सकती है। यदि छात्रा वास्तव में उपस्थित थी, तो प्रकरण की जांच करवाई जाएगी। सुसनेर के BRC के माध्यम से मामला फॉरवर्ड किया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।”
😟 परिवार की पीड़ा:
छात्रा के पिता ने बताया कि—
“रिजल्ट आने के बाद से ही बेटी तनाव में है। उसने परीक्षा दी है, फिर भी उसे अनुपस्थित दिखाना बहुत दुखद है। हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द न्याय मिले।”
🔍 बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—
- क्या परीक्षा केंद्र से उपस्थिति डेटा भेजने में चूक हुई?
- या फिर ऑनलाइन रिजल्ट प्रोसेसिंग में तकनीकी गड़बड़ी हुई?
- आखिर किस स्तर पर यह लापरवाही हुई, जिसने एक छात्रा का भविष्य दांव पर लगा दिया?
अब आवश्यकता है कि संबंधित अधिकारी इस मामले को प्राथमिकता से लें, जल्द जांच पूरी कर सही परिणाम जारी करें, ताकि छात्रा को मानसिक तनाव से राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।



