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अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणइनोवेशन एण्ड यूदिल्लीदेशश्री कामधेनु गोअभ्यारण्यस्पेशल रिपोर्ट

दिल्ली में 29 मार्च को गो सम्मान आह्वान अभियान की केंद्रीय बैठक, संत समाज करेगा गोवंश संरक्षण के लिए सशक्त कानून की मांग

✍️सनातन चेतना
जब-जब धरती पर धर्म और करुणा की पुकार उठी है, तब-तब भगवान श्रीराम ने मर्यादा का मार्ग दिखाया और भगवान श्रीकृष्ण ने गोसेवा के माध्यम से जीवन का संतुलन समझाया। आज वही सनातन चेतना एक बार फिर जागृत हो रही है—जब संत समाज गोवंश संरक्षण के लिए सशक्त कानून की मांग को लेकर एकजुट हो रहा है। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और मानव स्वास्थ्य से जुड़ा एक व्यापक सरोकार है, जिसे अब राष्ट्रव्यापी जनचेतना में परिवर्तित करने का संकल्प लिया जा रहा है।


गो सम्मान आह्वान अभियान की केंद्रीय बैठक 29 मार्च को दिल्ली के मंगोलपुरी में

जनमत जागरण @ दिल्ली / 27 मार्च। भगवती गोमाता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान के लिए सम्पूर्ण भारत में संचालित गो सम्मान आह्वान अभियान के अंतर्गत आगामी 27 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित “गो सम्मान दिवस” की तैयारियों को अंतिम रूप देने हेतु 29 मार्च को राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित मां जगदम्बे टेंट परिसर में एक महत्वपूर्ण केंद्रीय बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में देश के प्रमुख पूज्य संतों के सानिध्य में सभी 36 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य देशव्यापी रणनीति तैयार कर गोवंश की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए एकरूप कानून की मांग को मजबूत करना है।

गौरतलब है कि संत समाज के मार्गदर्शन में संचालित यह अभियान अपने प्रथम चरण में 27 अप्रैल को गो सम्मान दिवस के रूप में मनाने जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय देशी नस्ल के गौवंश के संरक्षण, संवर्धन एवं सम्मान के प्रति जनजागरण करना है, जो भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का मूल आधार रहा है।

संतों के अनुसार, कुछ दशकों पूर्व तक ग्रामीण भारत में गंभीर बीमारियों का प्रचलन अत्यंत कम था, जबकि आज कैंसर, हृदय रोग एवं मधुमेह जैसी बीमारियां व्यापक रूप से फैल चुकी हैं। इसके पीछे गोवंश आधारित जीवनशैली से दूर होना एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। गो आधारित कृषि और जीवन पद्धति को पुनः स्थापित करना वर्तमान समय की आवश्यकता बताया गया है।

धार्मिक संदर्भों में भी भगवान श्रीकृष्ण सहित अनेक लोकदेवताओं—गोगाजी, पाबूजी, तेजाजी, देवनारायण जी एवं करणी माता—के जीवन में गोसेवा का विशेष महत्व रहा है। बावजूद इसके, वर्तमान में गोवंश की स्थिति चिंताजनक है। बड़ी संख्या में गौवंश निराश्रित होकर सड़कों पर भटक रहा है और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहा है।

अभियान से जुड़े संतों का मानना है कि देश के विभिन्न राज्यों में गोसंरक्षण के लिए अलग-अलग कानून होने के कारण एकरूपता का अभाव है, जबकि कई राज्यों में गोवध की खुली छूट भी दी गई है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में समान रूप से लागू होने वाला सशक्त कानून बनाने की आवश्यकता है।

इसी उद्देश्य को लेकर गो सम्मान दिवस पर देशभर में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्रियों के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। यह अभियान पूर्णतः अहिंसक और शांतिपूर्ण रहेगा तथा इसका उद्देश्य केवल गोमाता के संरक्षण के लिए सरकार से विनम्र प्रार्थना करना है।

बैठक में देशभर के संत, विद्वान, कानून विशेषज्ञ एवं विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेकर आगामी रणनीति तय करेंगे, जिससे गोसेवा, गो सुरक्षा एवं गो सम्मान के लिए एक मजबूत जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।

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