ब्रेकिंग न्यूज़ : दिल्ली में संतों की प्रेस वार्ता: राष्ट्रव्यापी गौ सेवा अभियान की रूपरेखा तय, 27 अप्रैल को ‘गो सम्मान दिवस’

मंगोलपुरी की केंद्रीय बैठक में देशभर के संतों ने बनाई रणनीति, गौ संरक्षण के लिए केंद्रीय कानून सहित कई बड़ी मांगें उठीं, चरणबद्ध आंदोलन और छह माह के संकीर्तन का ऐलान
✍️ देशभर में गौ संरक्षण को लेकर एक बार फिर संत समाज एकजुट नजर आ रहा है। राजधानी दिल्ली से राष्ट्रव्यापी “गौ सम्मान आह्वान अभियान” की ऐसी रूपरेखा तय की गई है, जो आने वाले समय में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकती है। 27 अप्रैल 2026 को “गो सम्मान दिवस” मनाने की घोषणा के साथ संतों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह अभियान चरणबद्ध रूप से देशव्यापी संकीर्तन और आंदोलन में परिवर्तित होगा।
📍 जनमत जागरण @ दिल्ली :
राजधानी दिल्ली में सोमवार को गौ सम्मान आह्वान अभियान को लेकर पूज्य संतों के सान्निध्य में एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता आयोजित हुई। इस दौरान संत समाज, गोसेवकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रव्यापी अभियान की विस्तृत कार्ययोजना सार्वजनिक की।
पत्रकार वार्ता में पूज्य गोपेश कृष्ण दास जी महाराज (मलूक पीठ), पूज्य अच्युतानंद जी महाराज (कृष्णायन गोशाला, हरिद्वार), पूज्य रविन्द्रानंद जी सरस्वती (संरक्षक, श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा), भजन सम्राट प्रकाश जी महाराज, प्रकाशनारायण जी महाराज (मालवास), पूज्य चंद्रमादास जी महाराज (महंत, हनुमान गढ़ी अयोध्या), रामतीर्थ जी महाराज (मलूक पीठ वृंदावन), विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगन्नाथ शाही जी, परमानंद जी द्विवेदी (शांतिकुंज हरिद्वार), डॉ. वीरेन्द्र जी गर्ग (अध्यक्ष, दिल्ली NCR, श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा) एवं सुरेंद्र जी बिष्ट (राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन) सहित अनेक प्रमुख संत एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संतों ने बताया कि 29 मार्च 2026 को दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित मां जगदम्बे टेंट परिसर में आयोजित केंद्रीय बैठक में देश के 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए संतों, गोभक्तों और राज्य प्रभारियों ने अभियान की रणनीति पर विस्तृत मंथन किया। इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यह अभियान किसी संस्था, संगठन या राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि गौमाता और नंदी बाबा के सानिध्य में संचालित होगा।

संत समाज ने स्पष्ट किया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में गो संरक्षण एवं संवर्धन हेतु केंद्रीय कानून बनवाना, गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना, गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करवाना और गोवर्धन संस्कृति के संरक्षण के लिए ठोस सरकारी नीतियां सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही सरकार से मांग की गई कि गोहत्या और गोतस्करी में लिप्त अपराधियों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान हो तथा जब्त वाहनों का उपयोग गोशालाओं के हित में किया जाए।
इसके अलावा गोबर और गोमूत्र आधारित अनुसंधान विश्वविद्यालयों की स्थापना, पंचगव्य औषधियों का आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में नि:शुल्क वितरण, सरकारी भवनों में गोबर पेंट और गौनाइल का अनिवार्य उपयोग, गौशालाओं को मनरेगा से जोड़ना, बिजली बिल में राहत और निराश्रित गौवंश के लिए चारे की समुचित व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण मांगें भी रखी गईं।
🟡 छह माह तक चलेगा गौ संकीर्तन अभियान
अभियान की कार्ययोजना के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 तक देशभर में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। आगामी 27 अप्रैल 2026 को “गो सम्मान दिवस” के रूप में देश के सभी तहसील एवं तालुका मुख्यालयों पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। यदि इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो जुलाई और अक्टूबर 2026 में पुनः चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
इसके बाद 27 फरवरी 2027 को देशभर के लगभग 800 जिलों और 5000 तहसीलों से संत एवं गोभक्त दिल्ली में एकत्र होकर शांतिपूर्ण संकीर्तन करेंगे। यह संकीर्तन छह माह तक, यानी 15 अगस्त 2027 तक निरंतर चलेगा। इसके बावजूद भी यदि समाधान नहीं निकलता है, तो संत समाज गंगाजल पान कर उपवास और अंतिम चरण में आमरण अनशन का मार्ग अपनाने की चेतावनी दे चुका है।
🟢 अहिंसक और गैर-राजनीतिक रहेगा अभियान
संतों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान पूरी तरह अहिंसक और गैर-राजनीतिक होगा। इसमें किसी प्रकार का मंचीय भाषण या राजनीतिक गतिविधि नहीं होगी और न ही किसी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाएगा। अभियान के माध्यम से केवल संकीर्तन, प्रार्थना और जनजागरण द्वारा संदेश दिया जाएगा। इसका प्रतीक केवल गौमाता और नंदी महाराज का चित्र रहेगा।
📝
दिल्ली से उठी यह आवाज अब देशव्यापी स्वर लेने जा रही है। संत समाज की यह पहल आने वाले समय में न केवल गौ संरक्षण के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला सकती है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को भी एक नई दिशा देने का संकेत दे रही है।



