
तारीख में बदलाव, लेकिन उद्देश्य अटल — जानिए ‘गो सम्मान अभियान’ की पूरी कहानी
अहमदाबाद/सूरत/राजकोट, 08 अप्रैल।
राष्ट्रव्यापी गो सम्मान आह्वान अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले ‘गो सम्मान दिवस’ को लेकर गुजरात में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले यह आयोजन 27 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित था, लेकिन राज्य में स्थानीय चुनावों को ध्यान में रखते हुए अब इसे 7 मई 2026 को मनाने का निर्णय लिया गया है। संतों के इस निर्णय को अभियान की निष्पक्षता और व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
नन्दी5बाबा की अध्यक्षता एवं पूज्य संतों के सानिध्य में संचालित इस अभियान का उद्देश्य भगवती गोमाता की सेवा, सुरक्षा और सम्मान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है। गुजरात में यह आयोजन राज्य के सभी 34 जिलों और 267 तालुकाओं में एक साथ किया जाएगा, जहां गोपूजन, भजन-कीर्तन और जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक संदेश दिया जाएगा।
अभियान से जुड़े संतों ने जानकारी दी कि इस राष्ट्रव्यापी पहल में देशभर की प्रमुख गोसेवा संस्थाएं, गौशालाओं के प्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठन सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। लगभग 5 हजार से अधिक तहसीलों में गांव-गांव और शहर-शहर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि ‘गोमाता भारत भाग्य विधाता अभियान’ पूरी तरह गैरराजनीतिक, अहिंसक और निष्काम भाव से संचालित होगा। यह किसी राजनीतिक दल या संगठन के बैनर तले नहीं, बल्कि गौमाता और नंदी महाराज की भावना से प्रेरित एक जनआंदोलन है। इसका मुख्य उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करना तथा गोवर्धन आधारित संस्कृति के संरक्षण के लिए ठोस सरकारी नीतियां बनवाना है।
अभियान के अंतर्गत संतों एवं गोसेवकों ने केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- गौ रक्षा के लिए सशक्त केंद्रीय कानून
- गौहत्या एवं गोतस्करी पर कठोर दंड
- जब्त वाहनों को गौशालाओं के उपयोग में देना
- गोबर व गोमूत्र आधारित अनुसंधान विश्वविद्यालयों की स्थापना
- पंचगव्य औषधियों का निःशुल्क वितरण
- सरकारी भवनों में गोबर पेंट और गौनाइल का उपयोग
- गौशालाओं को मनरेगा से जोड़ना और बिजली बिल में रियायत
- निराश्रित गोवंश के लिए चारे की समुचित व्यवस्था
अहमदाबाद, सूरत और राजकोट सहित पूरे गुजरात में इस अभियान को लेकर व्यापक जनसहभागिता देखने को मिल रही है। सभी जिलों एवं तालुकाओं में समन्वय समितियों का गठन कर अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
7 मई 2026 को विशेष आयोजन:
इस दिन पूरे गुजरात में गोपूजन एवं भजन-कीर्तन के बाद तहसील/तालुका कार्यालयों पर पहुंचकर तहसीलदार या एसडीएम के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे।
सार्थक चिंतन:
तिथि परिवर्तन परिस्थितियों का संकेत है, लेकिन संकल्प की दृढ़ता का नहीं। जब विषय आस्था, संस्कृति और राष्ट्रधर्म से जुड़ा हो, तो समय नहीं, उद्देश्य महत्वपूर्ण होता है।



