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वैचारिक मंथन से ही संभव सामाजिक परिवर्तन: सुरेश सोनी, इंदौर में ‘मंथन कुटीर’ ग्रंथालय का शुभारंभ

हजारों पुस्तकों से समृद्ध ‘मंथन कुटीर’ बनेगा अध्ययन, संवाद और वैचारिक स्पष्टता का केंद्र; सभी वर्गों के लिए रहेगा खुला


जनमत जागरण @ इंदौर ।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल क्रियात्मक प्रयासों से नहीं, बल्कि गहन वैचारिक मंथन से ही संभव है। इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में इंदौर में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आधुनिक ग्रंथालय ‘मंथन कुटीर’ का शुभारंभ किया गया।

सुदर्शन भवन, पंत वैद्य कॉलोनी में आयोजित इस गरिमामय समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री सुरेश सोनी ने ग्रंथालय का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रांत संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता ईश्वरदास हिंदूजा ने की।

अपने प्रेरक उद्बोधन में श्री सुरेश सोनी ने कहा कि “सामाजिक परिवर्तन के लिए केवल क्रियात्मकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैचारिक स्पष्टता और सतत मंथन भी उतना ही आवश्यक है। पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं होता, बल्कि यह विचार-विमर्श और चिंतन का केन्द्र होता है।” उन्होंने आगे कहा कि साहित्य के प्रति रुचि रखने वाले जागरूक नागरिक ही किसी भी पुस्तकालय की सार्थकता को सिद्ध करते हैं।

समिति के उपाध्यक्ष रूपेश पाल एवं सचिव राकेश कुमार यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘मंथन कुटीर’ ग्रंथालय में देश-विदेश के प्रख्यात लेखकों की हजारों पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध रहेगा। इसमें देश, धर्म, राजनीति, विज्ञान, इतिहास, समाजशास्त्र और साहित्य सहित विविध विषयों पर आधारित महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल किए गए हैं।

ग्रंथालय के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए मनीष नीम ने कहा कि यह केवल पुस्तकों का केंद्र नहीं, बल्कि एक जीवंत वैचारिक मंच होगा, जहाँ विद्यार्थी, शोधकर्ता, प्रबुद्धजन एवं आम नागरिक अध्ययन के साथ-साथ संवाद और चिंतन के माध्यम से ज्ञान के नए आयाम खोज सकेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि यह ग्रंथालय सभी वर्गों के लिए पूर्णतः खुला रहेगा और भविष्य में यहाँ व्याख्यान, संगोष्ठी, पुस्तक चर्चा एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाएगा, जिससे समाज में बौद्धिक जागरूकता और सकारात्मक संवाद को नई दिशा मिल सके।

कार्यक्रम का संचालन रत्नेश दुबे ने किया।


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