IIT-AIIMS से आगे भी है भविष्य : 12वीं पास विद्यार्थियों के लिए प्रेरक संदेश ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’

“दिल की सुनो” : 34 वर्षों के अनुभवी शिक्षक की विद्यार्थियों को सलाह
“कॉलेज नहीं, क्षमता चुनो”
12वीं पास विद्यार्थियों के लिए प्रेरक करियर मार्गदर्शन
✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’
प्रिय विद्यार्थियों,
12वीं उत्तीर्ण करने पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ।
बारह वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद आज आप जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। इस समय हर ओर से एक ही सलाह सुनाई देती है — “बड़े नाम वाले कॉलेज में एडमिशन लो।”
लेकिन 34 वर्षों के शिक्षक और प्राचार्य जीवन के अनुभव से मैं कहना चाहता हूँ — केवल कॉलेज का नाम मत देखिए, पहले अपनी क्षमता और रुचि पहचानिए।
सफलता हमेशा बड़े संस्थानों की दीवारों से नहीं निकलती, बल्कि उस विषय से निकलती है जिसमें विद्यार्थी का मन पूरी लगन से जुड़ जाता है। असली प्रश्न यह नहीं कि “कौन-सा कॉलेज?” बल्कि यह है कि “कौन-सा विषय आपको भीतर से उत्साहित करता है?”
जिस विषय को पढ़ते समय थकान महसूस न हो, वही आपके भविष्य का सही मार्ग है। महँगा कॉलेज बाद में भी मिल सकता है, लेकिन अरुचिकर विषय जीवनभर असंतोष दे सकता है।
अभिभावकों से विनम्र आग्रह
अपने बच्चों पर डॉक्टर, इंजीनियर या किसी विशेष पेशे का दबाव मत डालिए। IIT, AIIMS या बड़े संस्थानों का सपना तभी सार्थक है जब बच्चे की रुचि भी उसी दिशा में हो।
एक बार अपने बेटे या बेटी से पूछिए —
“तुम्हारा मन किस विषय में लगता है?”
याद रखिए —
कॉलेज डिग्री देता है, लेकिन रुचिकर विषय जीवन देता है।
अपने शिक्षक जीवन में मैंने बड़े संस्थानों के विद्यार्थियों को तनाव में टूटते देखा है और छोटे कस्बों के साधारण कॉलेजों से पढ़े विद्यार्थियों को ISRO जैसे संस्थानों तक पहुँचते देखा है। अंतर केवल कॉलेज का नहीं, बल्कि जिज्ञासा, परिश्रम और स्पष्ट लक्ष्य का होता है।
आज का समय केवल नौकरी खोजने वालों का नहीं, बल्कि अवसर बनाने वालों का है। सही मार्गदर्शन मिले तो 12वीं का विद्यार्थी नौकरी भी कर सकता है, शोध भी, उद्यम भी और समाज सेवा भी।
महँगी कोचिंग से अधिक जरूरी है सीखने की भूख।
यदि आपके भीतर यह विश्वास है कि —
“मैं अपने दिल और रुचि के अनुसार करियर चुनूँगा,”
तो सफलता का रास्ता स्वतः खुलता जाएगा।
अंतिम संदेश
बारह वर्षों तक आपने अभिभावकों और शिक्षकों की बात सुनी। अब वह समय है जब आपको अपने भीतर की आवाज भी सुननी चाहिए।
यदि आपका मन किसी विषय के लिए स्पष्ट संकेत देता है, तो समझिए आपने केवल विषय नहीं, अपना भविष्य चुना है।
अंकसूची हाथ में लेकर केवल कॉलेज मत खोजिए, पहले स्वयं को खोजिए।
भविष्य आपकी प्रतीक्षा कर रहा है।
💐 शुभकामनाएँ 💐
डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’
(34 वर्षों का शिक्षकीय अनुभव एवं आजीवन विद्यार्थी)



