आपके लेख
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मोबाइल का मायाजाल: सोशल मीडिया हमारी जिंदगी को कैसे प्रभावित कर रहा है?
मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, भ्रामक स्वास्थ्य दावों, डिजिटल कारोबार, पारिवारिक रिश्तों और बदलती जीवनशैली का विश्लेषण पढ़िए…
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सूर खेड़ी सुठेली: शूरवीरों की भूमि का सुनहरा इतिहास, बावड़ी और वीरगाथाओं की कहानी
आगर-मालवा के सुठेली गांव का इतिहास, ‘सूरे की खेड़ी’ नाम, पोलिया महाराज का ओटला, भैरू महाराज की बावड़ी और लोक-स्मृतियों…
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गणेश चतुर्थी: लोकमान्य तिलक का वह नवाचार जिसने उत्सव को आंदोलन बना दिया
गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप देने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ऐतिहासिक भूमिका रही। जानिए कैसे गणेशोत्सव…
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हनुमान अंश: 2 करोड़ की फिल्म ने कैसे जगाई सनातन चेतना? | राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
‘हनुमान अंश’ ने छोटे बजट में बड़ी सफलता की कहानी लिखी। नीम करौली बाबा की जीवनगाथा, सनातन चेतना और सुनील…
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क्या रूढ़ियों की रक्षा ही संस्कृति है? विवेकानंद, नारी स्वतंत्रता और मनुस्मृति पर बड़ा विमर्श
मनुस्मृति के एक श्लोक से शुरू हुई बहस आखिर संस्कृति और रूढ़ि के अंतर तक कैसे पहुंचती है? विवेकानंद के…
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जंतर-मंतर विश्वविद्यालय: BA in आंदोलन | राजनीति और आंदोलन संस्कृति पर तीखा व्यंग्य
क्या आंदोलन अब करियर बन गया है? पढ़िए डॉ. बालाराम परमार 'हँसमुख' का समसामयिक राजनीतिक व्यंग्य, जो शिक्षा, राजनीति और…
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भारतीय ज्ञान परंपरा: केवल अतीत का गौरव नहीं, भविष्य का मार्गदर्शन
डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’ सेवानिवृत्त प्राचार्य, केन्द्रीय विद्यालय संगठन।सदस्य, विद्या भारती (मध्य क्षेत्र – मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़)। सदस्य, मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निर्माण एवं…
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IIT-AIIMS से आगे भी है भविष्य : 12वीं पास विद्यार्थियों के लिए प्रेरक संदेश ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’
“दिल की सुनो” : 34 वर्षों के अनुभवी शिक्षक की विद्यार्थियों को सलाह “कॉलेज नहीं, क्षमता चुनो” 12वीं पास विद्यार्थियों…
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“14 अप्रैल: जयंती से आगे—क्या हम अंबेडकर के विचारों को जीवन में उतार पा रहे हैं?”✍️ डॉ बालाराम परमार
✍️ 14 अप्रैल केवल एक जयंती नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है।डॉ. भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को…
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