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झालावाड़ के मेडिकल छात्र कार्तिक लड्ढा का अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवा, फ्लोराइड शोध को मिला ‘बेस्ट रिसर्च’ सम्मान

अमेरिका आधारित वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिकल स्टूडेंट्स रिसर्च में 'बेस्ट रिसर्च' और 'पीपुल्स चॉइस' श्रेणी में मिला तृतीय स्थान, मंडावर क्षेत्र के फ्लोराइड युक्त पेयजल पर आधारित शोध को मिली वैश्विक सराहना।

स्पेशल रिपोर्ट

स्थानीय समस्या से वैश्विक सम्मान तक: जब झालावाड़ के युवा शोधकर्ता ने दुनिया को बताया फ्लोराइड का सच

जनमत जागरण @ झालावाड़। किसी भी शोध की सबसे बड़ी सफलता तब मानी जाती है, जब वह प्रयोगशाला की सीमाओं से निकलकर समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने का माध्यम बने। राजस्थान के झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के अंतिम वर्ष के एमबीबीएस छात्र कार्तिक लड्ढा ने यही कर दिखाया है। उन्होंने ग्रामीण अंचल की एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या—फ्लोराइड युक्त पेयजल के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव—को वैज्ञानिक शोध का विषय बनाया और अपनी इसी शोध प्रस्तुति के दम पर अमेरिका आधारित वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिकल स्टूडेंट्स रिसर्च में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त किया।

यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि यदि शोध समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ा हो तो वह विश्व मंच पर भी अपनी पहचान बना सकता है।

दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वभर से 90 से अधिक शोधपत्रों का चयन किया गया। इनमें कार्तिक लड्ढा का शोध अपनी वैज्ञानिक गुणवत्ता, सामाजिक उपयोगिता और जनहित से जुड़े प्रभाव के कारण अलग पहचान बनाने में सफल रहा। परिणामस्वरूप उन्हें ‘बेस्ट रिसर्च’ तथा ‘पीपुल्स चॉइस (सर्वाधिक पसंदीदा शोध)’ श्रेणियों में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।

इस शोध का मार्गदर्शन मेडिकल कॉलेज झालावाड़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शकीला मुल्ला ने किया। उनके निर्देशन में तैयार शोध में झालावाड़ जिले के निकट स्थित मंडावर क्षेत्र में फ्लोराइड युक्त पेयजल के दीर्घकालिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य दुष्प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया।

विशेष बात यह रही कि यह शोध किसी काल्पनिक या विदेशी विषय पर आधारित नहीं था, बल्कि स्थानीय समाज की वास्तविक समस्या को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के सामने प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत करता है। यही कारण रहा कि विशेषज्ञों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने इसे सराहा।

उपलब्धि की सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय पोरवाल ने छात्र कार्तिक लड्ढा को बधाई देते हुए विभाग के शिक्षण एवं शोध कार्य की भी सराहना की। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया है।

आज चिकित्सा शिक्षा केवल डॉक्टर तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध आधारित स्वास्थ्य समाधान विकसित करना भी उसका महत्वपूर्ण उद्देश्य बन चुका है। ऐसे समय में कार्तिक लड्ढा की यह सफलता देशभर के मेडिकल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है कि स्थानीय समस्याओं पर किया गया गंभीर वैज्ञानिक अध्ययन भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकता है।

झालावाड़ जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले से निकलकर वैश्विक मंच पर मिली यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यदि उचित मार्गदर्शन, वैज्ञानिक सोच और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण हो तो स्थानीय शोध भी विश्व स्तर पर प्रभाव छोड़ सकता है।

यह सम्मान केवल कार्तिक लड्ढा या मेडिकल कॉलेज झालावाड़ का नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान और भारत की युवा शोध परंपरा का सम्मान है।

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