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सोयतकलां में RSS का पथ संचलन, पंच परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का संदेश

सोयतकलां में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विशाल पथ संचलन; केशव और माधव बस्ती का बस स्टैंड पर भव्य संगम, नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत

सज्जनता के साथ सजगता, शक्ति के साथ सेवा और संस्कारों से राष्ट्र निर्माण का संदेश

सोयतकलां में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विशाल पथ संचलन; केशव और माधव बस्ती का बस स्टैंड पर भव्य संगम, नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत

जनमत जागरण @ सोयतकलां से निकुंज कुमरावत । समाज की वास्तविक शक्ति केवल सामर्थ्य में नहीं, बल्कि उस सामर्थ्य का सदुपयोग करने की भावना में निहित है। सज्जनता का अर्थ कमजोर होना नहीं, शक्ति का अर्थ दूसरों पर प्रभाव जमाना नहीं और राष्ट्रभक्ति का अर्थ केवल नारों तक सीमित रहना नहीं है। संकट के समय साहस, जीवन में अनुशासन, परिवार में संस्कार और समाज के प्रति कर्तव्यबोध ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव रखते हैं। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला बौद्धिक प्रमुख श्री तुलसीराम जी बैरागी ने अपने उद्बोधन में समाज को सजग, संगठित, संस्कारवान और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनने का संदेश दिया।

नवरात्रि की साधना से लेकर विजयादशमी के महत्व तक, संत और सर्प के प्रसंग से लेकर संकट के समय कर्तव्य निभाने वाले पायलट के उदाहरण तक, उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से समझाया कि समाज की शक्ति तभी सार्थक है, जब वह दूसरों की रक्षा, सेवा और कल्याण के काम आए। उनका संदेश था कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका पहचानकर परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

इसी उत्साह, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के भाव के साथ 21 अक्टूबर को सोयतकलां नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विशाल पथ संचलन निकाला गया। नगर की केशव एवं माधव बस्ती के स्वयंसेवकों का बस स्टैंड पर भव्य संगम हुआ। नगर के विभिन्न मार्गों पर मातृशक्ति एवं नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

शक्ति की आराधना तभी सार्थक, जब उसका उपयोग समाज के कल्याण में हो

माधव बस्ती के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री तुलसीराम जी बैरागी ने कहा कि नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि शक्ति का संचय करना और उसका उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण में करना है। विजयादशमी धर्म की अधर्म पर, सत्य की असत्य पर और सदाचार की दुराचार पर विजय का संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि शक्ति के साथ संयम, साहस के साथ विवेक और सामर्थ्य के साथ सेवा का भाव होना आवश्यक है। समाज की उन्नति तभी संभव है, जब व्यक्ति अपनी क्षमताओं का उपयोग केवल निजी हित के लिए नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक कल्याण के लिए भी करे।

सज्जनता के साथ सजगता भी जरूरी, संकट में कर्तव्य निभाना ही सच्ची सेवा

श्री बैरागी ने सर्प और संत का प्रसंग सुनाते हुए समझाया कि सज्जनता का अर्थ अपनी सुरक्षा और आत्मसम्मान की अनदेखी करना नहीं है। संत ने सर्प को दूसरों को काटने से मना किया था, लेकिन उसने फुफकारना भी छोड़ दिया। परिणामस्वरूप लोग उसे परेशान करने लगे। संत ने उसे समझाया कि किसी को नुकसान न पहुंचाने का अर्थ अपनी रक्षा करने की क्षमता छोड़ देना नहीं है।

इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि समाज को विनम्र और सद्भावपूर्ण बने रहने के साथ अन्याय एवं अनुचित व्यवहार के प्रति सजग भी रहना चाहिए। अपनी सुरक्षा, अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना भी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

इसी संदर्भ में उन्होंने संकट के समय साहस और कर्तव्यनिष्ठा के महत्व को रेखांकित करते हुए विमान में 174 लोगों की जान बचाने वाले पायलट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य से पीछे न हटना और दूसरों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहना ही सेवा की वास्तविक भावना है। इस प्रसंग से समाज को यह प्रेरणा मिलती है कि राष्ट्रसेवा केवल बड़े अवसरों पर नहीं, बल्कि अपने कार्य और जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने में भी निहित है।

शाखा से व्यक्ति निर्माण और व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण

संघ की स्थापना और शाखा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री बैरागी ने कहा कि डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के माध्यम से संगठित एवं संस्कारवान समाज निर्माण की दिशा में कार्य प्रारंभ किया। शाखा व्यक्ति में अनुशासन, चरित्र, ध्येयनिष्ठा और राष्ट्रसमर्पण का भाव विकसित करने का माध्यम है।

हनुमान जी की प्रभु श्रीराम के प्रति निष्ठा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी ध्येय को स्वीकार करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास, समर्पण और अनुशासन भी आवश्यक हैं। समाज को ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता है, जो केवल अच्छी बातें न करें, बल्कि अपने आचरण से भी उदाहरण प्रस्तुत करें।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझें तथा रचनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।

सामाजिक समरसता ही संगठित समाज का आधार

श्री बैरागी ने संत रविदास जी और मीराबाई का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज को जाति, पंथ और समुदाय के भेद से ऊपर उठकर परस्पर सम्मान, बंधुत्व और सहयोग की भावना विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दूसरे के सुख-दुख को अपना समझना भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता है। सामाजिक समरसता केवल भाषणों का विषय नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखाई देने वाला संस्कार होना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना, पड़ोसियों के सुख-दुख में सहभागी बनना और प्रत्येक व्यक्ति के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना समाज को मजबूत बनाता है।

उन्होंने समाज को विभाजनकारी प्रवृत्तियों और आपसी अविश्वास के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देते हुए संवाद, सद्भाव और एकता को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

परिवार में संस्कार, जीवन में स्वदेशी और प्रकृति के प्रति संवेदना

अपने उद्बोधन में श्री बैरागी ने परिवार को समाज निर्माण की पहली पाठशाला बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को समय देना, उनके साथ संवाद बनाए रखना और उनमें अच्छे संस्कार विकसित करना प्रत्येक परिवार की जिम्मेदारी है। आधुनिक जीवनशैली के बीच बच्चों को केवल सुविधाएं देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें सही-गलत का विवेक, जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव सिखाना भी जरूरी है।

उन्होंने स्वदेशी और स्वभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने, मातृभाषा का सम्मान करने और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हमारी जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। जन्मदिन जैसे अवसरों पर पौधारोपण करना, लगाए गए पौधों की देखभाल करना और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना समाज के प्रति हमारा दायित्व है।

युवा शक्ति आगे आए, राष्ट्र निर्माण में निभाए सक्रिय भूमिका

भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्री बैरागी ने कहा कि उचित मार्गदर्शन, संस्कार और ध्येयनिष्ठा प्राप्त करने वाले युवा कठिन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। आज की युवा पीढ़ी को अपनी ऊर्जा शिक्षा, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रहित के रचनात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।

उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे स्वयं अनुशासित एवं संस्कारवान बनें और समाज में सेवा, समरसता तथा राष्ट्रसमर्पण की भावना को मजबूत करें। उनका संदेश था कि राष्ट्र का उत्कर्ष प्रत्येक नागरिक के व्यक्तिगत उत्कर्ष, कर्तव्यनिष्ठा और सामूहिक प्रयासों से जुड़ा हुआ है।

पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव का आह्वान

केशव बस्ती के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता जिला शारीरिक प्रमुख श्री राजेश जी माली ने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में पंच परिवर्तन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज से इनके अनुरूप आचरण करने का आग्रह किया। उन्होंने सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने तथा राष्ट्रहित में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

केशव बस्ती के कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता श्री रामगोपाल जी कुशवाह ने अध्यक्षता की। श्री साजन जी राठौड़, बस्ती कार्यवाह, मंचासीन रहे।

माधव बस्ती के कार्यक्रम में श्री दयाराम जी राठौड़ ने अध्यक्षता की। मुख्य वक्ता श्री तुलसीराम जी बैरागी, माननीय खंड संघचालक श्री द्वारकालाल जी पाटीदार तथा बस्ती कार्यवाह श्री राहुल वर्मा मंचासीन रहे।

बस स्टैंड पर हुआ दोनों बस्तियों का भव्य संगम

कार्यक्रमों के पश्चात केशव एवं माधव बस्ती के स्वयंसेवकों ने नगर के विभिन्न मार्गों से अनुशासित पथ संचलन निकाला। बस स्टैंड चौराहे पर दोनों संचलनों का भव्य संगम हुआ। दोनों बस्तियों के स्वयंसेवकों का एक साथ मिलना आकर्षण का केंद्र रहा।

नगर में जगह-जगह मातृशक्ति एवं नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। पथ संचलन ने नगर में अनुशासन, संगठन, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।

उक्त जानकारी नगर प्रचार प्रमुख श्री राजेश कुशवाह ने दी।

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