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चौसठ योगिनी की शक्ति-परंपरा और कुंकुम अर्चना का महात्म्य: माँ चौसठ के दरबार में नौ दिन भक्ति-साधना का विशेष अवसर

शारदीय नवरात्रि में सोयत कलाँ के माँ चौसठ माता मंदिर में निःशुल्क कुंकुम अर्चना का शुभारंभ, प्रथम व द्वितीय दिन 11 -11यजमानों ने किया पूजन; आचार्य पंडित बद्रीप्रसाद वशिष्ठ के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक श्रद्धालु कर सकेंगे अर्चना

चौसठ योगिनी की शक्ति-परंपरा और कुंकुम अर्चना का महात्म्य: माँ चौसठ के दरबार में नौ दिन भक्ति-साधना का विशेष अवसर

शारदीय नवरात्रि में सोयत कलाँ के माँ चौसठ माता मंदिर में निःशुल्क कुंकुम अर्चना का शुभारंभ, प्रथम व द्वितीय दिन 11 -11यजमानों ने किया पूजन; आचार्य पंडित बद्रीप्रसाद वशिष्ठ के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक श्रद्धालु कर सकेंगे अर्चना

जनमत जागरण@ सोयतकलां निकुंज कुमरावत ।    जब शक्ति की उपासना में श्रद्धा का सिंदूरी रंग घुलता है, जब कुंकुम के प्रत्येक कण में समर्पण का भाव जागता है और जब साधक माँ के सम्मुख अपने अहंकार को विसर्जित कर कल्याण की कामना करता है, तब पूजा केवल कर्मकांड नहीं रह जाती, वह आत्मा और आदिशक्ति के बीच संवाद का माध्यम बन जाती है। शारदीय नवरात्रि इसी शक्ति-चेतना को जागृत करने का पावन पर्व है। इसी आध्यात्मिक भावभूमि पर सोयत कलाँ स्थित माँ चौसठ माता मंदिर में नौ दिवसीय निःशुल्क कुंकुम अर्चना का शुभारंभ हुआ है। नवरात्रि के प्रथम दिन 11 यजमानों ने विधि-विधान से अर्चना कर माँ के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित की।

यह आयोजन केवल पूजा की एक व्यवस्था नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस उपासना-परंपरा से जुड़ने का अवसर है, जिसमें शक्ति को सृष्टि की चेतना, जीवन की ऊर्जा और कल्याण की अधिष्ठात्री माना गया है। माँ चौसठ के दरबार में आयोजित यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं को भक्ति, साधना, पारिवारिक मंगलकामना और सांस्कृतिक संस्कारों के एक सूत्र में जोड़ने का आमंत्रण दे रहा है।

चौसठ योगिनी परंपरा: शक्ति के व्यापक स्वरूप की आराधना

भारतीय शाक्त परंपरा में देवी केवल एक पूजनीय स्वरूप नहीं, बल्कि शक्ति की व्यापक चेतना हैं। इसी परंपरा में चौसठ योगिनियों की उपासना का विशिष्ट स्थान है। चौसठ योगिनी परंपरा भारतीय तांत्रिक एवं शाक्त साधना की प्राचीन धाराओं से जुड़ी रही है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर इस समृद्ध आध्यात्मिक और स्थापत्य विरासत के साक्षी हैं।

योगिनी परंपरा शक्ति के विविध स्वरूपों, प्रकृति की व्यापकता और आध्यात्मिक साधना की गहनता की ओर संकेत करती है। यह भारतीय चिंतन की उस दृष्टि का परिचय देती है, जिसमें शक्ति को जीवन के प्रत्येक आयाम में विद्यमान माना गया है।

माँ चौसठ माता के नाम से प्रतिष्ठित मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर होने वाली आराधना श्रद्धालुओं के लिए इसी शक्ति-उपासना के भाव से जुड़ने का अवसर है। हालाँकि, स्थानीय मंदिर की विशिष्ट परंपरा और चौसठ योगिनी साधना के प्रत्यक्ष संबंध के लिए मंदिर की मान्यताओं एवं ऐतिहासिक विवरणों को अलग से प्रमाणित करना आवश्यक है।

कुंकुम अर्चना: लाल रंग में श्रद्धा, समर्पण और शुभ संकल्प

सनातन पूजा-पद्धति में कुंकुम का अपना विशिष्ट सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्त्व है। इसका लाल रंग शक्ति, मंगल, सौभाग्य और शुभता का प्रतीक माना जाता है। देवी के समक्ष कुंकुम अर्पित करना भक्त के श्रद्धाभाव और समर्पण की अभिव्यक्ति है।

कुंकुम अर्चना में साधक एकाग्र मन से देवी का स्मरण करते हुए अपनी प्रार्थनाएँ निवेदित करता है। वह परिवार में सुख-शांति, जीवन में सद्बुद्धि, कार्यों में सद्भाव और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की कामना करता है। इस उपासना का मर्म केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करना नहीं, बल्कि अपने भीतर सकारात्मकता, संयम और सदाचार के भाव को भी पुष्ट करना है।

देवी उपासना की यही विशेषता है कि वह व्यक्ति को अपने परिवार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध भी कराती है। माँ के चरणों में शीश झुकाने का वास्तविक अर्थ जीवन में विनम्रता, करुणा, सेवा और सत्य के मार्ग को अपनाने का संकल्प लेना भी है।

शारदीय नवरात्रि: साधना, संयम और शक्ति-जागरण के नौ दिन

भारतीय पंचांग में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली शारदीय नवरात्रि देवी आराधना का अत्यंत महत्त्वपूर्ण पर्व है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा, मंत्र-जप, व्रत, ध्यान और साधना के माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था को अभिव्यक्त करते हैं।

नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश बाहरी पूजा के साथ आंतरिक परिष्कार भी है। जैसे साधक दीप प्रज्वलित करता है, वैसे ही उसे अपने भीतर विवेक का प्रकाश जगाने का प्रयास करना चाहिए। जैसे वह देवी को पुष्प अर्पित करता है, वैसे ही अपने व्यवहार में सद्भाव के पुष्प खिलाने चाहिए। और जैसे वह माँ से शक्ति की प्रार्थना करता है, वैसे ही अन्याय का सामना करने, कठिनाइयों में धैर्य रखने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने का साहस भी विकसित करना चाहिए।

इसीलिए नवरात्रि केवल मंदिर तक सीमित रहने वाला पर्व नहीं, बल्कि परिवार, समाज और जीवन को श्रेष्ठ दिशा देने का अवसर है। माँ चौसठ माता मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय कुंकुम अर्चना इसी भाव के साथ श्रद्धालुओं को सामूहिक उपासना के लिए आमंत्रित कर रही है।

आचार्य पंडित बद्रीप्रसाद वशिष्ठ के सानिध्य में निःशुल्क अर्चना

माँ चौसठ माता मंदिर, सोयत कलाँ में आयोजित इस अनुष्ठान में आचार्य पंडित बद्रीप्रसाद वशिष्ठ का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। नवरात्रि के सभी नौ दिनों तक प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे के बीच श्रद्धालु कुंकुम अर्चना में सहभागी बन सकते हैं।

आयोजन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि अर्चना के लिए आवश्यक समस्त पूजन सामग्री उत्सव समिति की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इससे श्रद्धालुओं को सामग्री की अलग से व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं होगी और वे सहजता से पूजा में सम्मिलित हो सकेंगे।

उत्सव समिति ने श्रद्धालुओं से सनातनी वेशभूषा में आने का विशेष आग्रह किया है। अर्चना की प्रक्रिया में लगभग एक घंटे का समय लग सकता है, इसलिए निर्धारित समय को ध्यान में रखकर पहुँचना उचित होगा।

प्रथम दिन 11 यजमानों की सहभागिता के साथ आरंभ हुआ यह आयोजन आगामी दिनों में भी श्रद्धालुओं को माँ की आराधना से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। जो परिवार नवरात्रि में सामूहिक रूप से देवी उपासना करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक सहज और सुव्यवस्थित अवसर है।

माँ के दरबार में आइए, श्रद्धा के साथ संकल्प भी लेकर जाइए

नवरात्रि में माँ के दरबार तक पहुँचना केवल दर्शन करना नहीं, बल्कि कुछ क्षण अपने भीतर झाँकना भी है। अपने परिवार के लिए सुख-शांति की प्रार्थना के साथ समाज में सद्भाव बढ़ाने का संकल्प, समृद्धि की कामना के साथ परिश्रम और ईमानदारी का संकल्प तथा शक्ति की आराधना के साथ निर्बल की सहायता का संकल्प—यही भक्ति को जीवन से जोड़ने का मार्ग है।

माँ चौसठ माता मंदिर में आयोजित निःशुल्क कुंकुम अर्चना श्रद्धालुओं के लिए इसी भाव से जुड़ने का निमंत्रण है। परिवार सहित माँ के दरबार में उपस्थित होकर अपनी श्रद्धा अर्पित करें और नवरात्रि के इस पावन अवसर को उपासना, संस्कार तथा आत्मचिंतन का माध्यम बनाएँ।

आयोजन संबंधी जानकारी

स्थान: माँ चौसठ माता मंदिर, सोयत कलाँ

अवसर: शारदीय नवरात्रि के सभी नौ दिन

समय: प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक

अर्चना: निःशुल्क कुंकुम अर्चना

सानिध्य: आचार्य पंडित बद्रीप्रसाद वशिष्ठ

विशेष व्यवस्था: पूजन सामग्री उत्सव समिति की ओर से निःशुल्क उपलब्ध

  1. वेशभूषा: सनातनी वेशभूषा में पधारने का आग्रह

सार्थक चिंतन

कुंकुम की एक चुटकी केवल पूजा की सामग्री नहीं, श्रद्धा के रंग में रँगे संकल्प का प्रतीक भी हो सकती है। माँ के सम्मुख झुकता हुआ मस्तक तभी सार्थक है, जब जीवन में विनम्रता जागे; माँ से माँगी गई शक्ति तभी सार्थक है, जब उससे किसी का सहारा बना जाए। नवरात्रि की सच्ची साधना यही है—देवी की आराधना के साथ अपने भीतर के श्रेष्ठ गुणों को जागृत करना।

आइए, शारदीय नवरात्रि में माँ चौसठ के दरबार में श्रद्धा का दीप प्रज्वलित करें।

जय माँ चौसठ! जय माता दी!

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“सोयतकलां का मां चौसठ योगिनी सिद्धपीठ : शक्ति, संपत्ति और ज्ञान का अनूठा संगम”

 

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