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प्राकृतिक खेती से धरती मां कैसे होगी जहरमुक्त कैसे सुधरेगा मां का स्वास्थ्य कैसे बनेगा राष्ट्र स्वस्थ

प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित , प्राकृतिक खेती कैसे शुरू करें एवं घनजीवामृत बनाने की विधि बताई , स्वस्थ धरा से ही “स्वस्थ समाज व स्वस्थ राष्ट्र“ के निर्माण की परिकल्पना 

जनमत जागरण @ झालावाड़ ब्यूरो : कृषि विज्ञान केन्द्र, झालावाड़ में प्राकृतिक खेती विषय पर 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 11 व 12 दिसम्बर को किया गया। कार्यक्रम में 40 कृषकों ने भाग लिया।केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, डॉ. टी.सी. वर्मा ने बताया कि प्राकृतिक खेती स्थानीय उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर आधारित होती है। इस खेती के माध्यम से धरती माँ के स्वास्थ्य सुधार के साथ उससे उत्पादित अनाज व चारा भी पौष्टिकता से परिपूर्ण होता है अतः स्वस्थ धरा से ही “स्वस्थ समाज व स्वस्थ राष्ट्र“ के निर्माण की परिकल्पना की जा सकती है। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती में कीट व रोग प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया।उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एम.एस. आचार्य ने ‘‘प्राकृतिक खेती एक दृष्टि में’’ विषय पर विस्तार से समझाया। साथ ही प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न घटकों को बनाने की विधियों पर भी प्रकाश डाला। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कैलाश चन्द मीणा ने प्राकृतिक खेती पर सरकार द्वारा संचालित योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से किसान अपनी खेती किसानी में नवाचार कर सकते हैं।

प्राकृतिक खेती कैसे शुरू करें एवं घनजीवामृत बनाने की विधि बताते हुए
प्राकृतिक खेती कैसे शुरू करें एवं घनजीवामृत बनाने की विधि बताई :  प्रशिक्षण प्रभारी एवं केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. सेवा राम रूण्डला ने 2 दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुये बताया कि इस प्रशिक्षण को सैद्धान्तिक व प्रायोगिक कालांशों के माध्यम से करवाया गया। उन्होंने मृदा व जल जांच के महत्त्व व उपयोगिता के बारे में समझाया।कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रसार शिक्षा वैज्ञानिक, डॉ. मोहम्मद युनुस ने प्राकृतिक उत्पादों के प्रमाणीकरण, फसल कटाई उपरान्त प्रसंस्करण, भण्डारण एवं विपणन प्रबन्धन के बारें में विस्तार से बताया। कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. उमेश धाकड़ ने प्राकृतिक खेती के लिए बीजामृत व जीवामृत बनाने की विधियों पर प्रकाश डाला तथा पोषक तत्व प्रबंधन के बारें में विस्तार से बताया।प्रगतिशील कृषक रमेश कुमार कुल्मी ने प्राकृतिक खेती की सफलता की प्रमुख बातें एवं अनुभव बताते हुए प्राकृतिक खेती कैसे शुरू करें एवं घनजीवामृत बनाने की विधि बताई। प्रगतिशील कृषक कन्हैयालाल लोधा ने प्राकृतिक खेती के बारे में उपयोगी घटकों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, वानस्पतिक काढ़ा एवं नीमास्त्र बनाने की विधि बताई। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन सुनीता कुमारी एवं दिनेश कुमार चौधरी ने किया ।
गवर्नमेन्ट ई-मार्केटिंग प्लेस (जेम) पोर्टल के संबंध में कार्यशाला आयोजित
गवर्नमेन्ट ई-मार्केटिंग प्लेस (जेम) पोर्टल के संबंध में कार्यशाला आयोजित : प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय खरीद प्रक्रिया को आसान एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को गवर्नमेन्ट ई-मार्केटिंग प्लेस (जेम) की कार्यशाला मिनी सचिवालय के सभागार में आयोजित की गई।कार्यशाला के दौरान कोषाधिकारी कपिल देव कासलीवाल ने बताया कि जेम पोर्टल विभिन्न सरकारी विभागों, संगठनों, सार्वजनिक उपक्रमों को आवश्यक सामान्य उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद की सुविधा प्रदान करता है। जेम का लक्ष्य सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, दक्षता और गति को बढ़ाना है। यह सरकारी उपयोगकर्ताओं को सुविधा प्रदान करने के लिए ई-बोली, रिवर्स ई-नीलामी और डिमांड एकत्रीकरण के साधन प्रदान करके उनके पैसों को सर्वाेत्तम मूल्य प्रदान करता है।उन्होंने बताया कि यह एक ऑनलाइन मार्केट है, जिससे कोई भी इंसान घर बैठे जुड़ सकता है और सरकार के साथ व्यापार कर सकता है। इसके लिए पहले रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है।कार्यशाला के दौरान उपस्थित सभी विभागों के अधिकारियों को राज्य स्तर से  नियुक्त ट्रेनर्स द्वारा जेम पोर्टल पर प्राइमरी एवं सैकेण्डरी यूजर के पंजीकरण एवं उसके उपयोग की सम्पूर्ण प्रक्रिया की जानकारी पावर पॉईन्ट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रदान की गई। साथ ही सभी विभागों के कार्मिकों से उक्त पोर्टल पर आवश्यक रूप से पंजीकरण करवाने एवं भविष्य में किसी भी राजकीय खरीद के लिए उक्त पोर्टल का ही उपयोग करने का आग्रह किया गया। कार्यशाला में कार्मिकों के साथ जेम पोर्टल के संबंध मे प्रश्न एवं उत्तर का सत्र भी आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, सहायक लेखाधिकारी सहित अन्य कार्मिक उपस्थित रहे ।

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