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◼️मारपीट व अवैध वसूली के लिए तत्कालीन थाना प्रभारी को हुई तीन माह की सजा

◼️ सुसनेर न्यायालय के निर्णय से न्याय के प्रति मजबूत हुआ विश्वास ◼️सुसनेर न्यायालय ने तत्कालीन थाना प्रभारी डी एस पुरोहित को सुनाई सजा ◼️परिवादी अफशाद खां ने न्यायालय से लगाई थी न्याय की गुहार

 जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की रिपोर्ट। बुधवार को सुसनेर न्यायालय ने एक बार फिर अपने न्याय से आम लोगो में न्याय के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। इस बार न्यायालय ने एक परिवाद में निर्णय सुनाते हुए पुलिस अधिकारी को दोषी मानकर तीन माह के कारावास व अर्थदंड से दण्डित किया है। यह परिवाद एक आम नागरिक ने पुलिस अधिकारी द्वारा किये गए व्यव्हार के विरुद्ध सुसनेर न्यायालय में दर्ज किया था।

◼️ सुसनेर न्यायालय में 15 मई 2013 को दायर परिवाद में तत्कालीन सुसनेर थाना प्रभारी डी एस पुरोहित पर परिवादी के साथ मारपीट करने, धमकी देने व अवैध वसूली के आरोप लगाए गए थे।

◼️ जानकारी के अनुसार 7 मई 2013 को करीब दोपहर 11 बजे नगर के पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में एक सैलून की दुकान पर बैठे परिवादी अफशाद खां पिता नन्ने खां निवासी सुसनेर के साथ तत्कालीन सुसनेर थाना प्रभारी डी एस पुरोहित पिता पूना जी ने अन्य दो पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुँचकर परिवादी के साथ मारपीट कर उसे थाने ले गए तथा थाने में भी मारपीट कर 10 हजार रुपए की मांग की तथा राशि नही दिए जाने पर कार्रवाई कर जेल भेजने व जिलाबदर करने की धमकी दी थी । जिसके बाद परिवादी के बेटे व भतीजे ने 7 हजार रुपये की राशि तत्कालीन थाना प्रभारी पुरोहित को दी।

◼️ इस सम्बंध में परिवादी ने एसडीओपी सुसनेर, आईजी व मानव अधिकार आयोग को भी इसकीं शिकायत की थी। परिवाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कंचन चौकसे ने अभियुक्त तत्कालीन थाना प्रभारी डी एस पुरोहित को साक्ष्य के आधार पर दोषी पाते हुए संहिता की धारा 323 में एक हजार रुपए का अर्थदंड अथवा व्यतिक्रम में एक माह का कारावास व संहिता की धारा 384 में तीन माह का साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

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