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आगर मालवाइनोवेशन एण्ड यूकवि/लेखकभोपालमध्यप्रदेशशिक्षास्पेशल रिपोर्ट

आगर-मालवा का गौरव: शिवलाल दांगी को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान, राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त भैरूलाल ओसारा भी सम्मानित

भोपाल में शिक्षक दिवस पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुआ सम्मान समारोह; प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह, शॉल, श्रीफल और ₹25 हजार की सम्मान राशि से सम्मानित हुए उत्कृष्ट शिक्षक

कलम, कक्षा और संस्कृति का सम्मान: शिवलाल दांगी को मिला राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार

राज्यपाल और मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में भोपाल में सम्मानित हुए सुसनेर के शिक्षक-साहित्यकार, आगर-मालवा का बढ़ाया गौरव

जनमत जागरण @ भोपाल/सुसनेर | विशेष रिपोर्ट

कुछ शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों के अध्याय नहीं पढ़ाते, वे स्वयं समाज के लिए एक जीवंत पाठ बन जाते हैं। कुछ की पहचान विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित रहती है, तो कुछ अपनी कक्षा से निकलकर साहित्य, संस्कृति और समाज की चेतना में स्थायी हस्ताक्षर कर जाते हैं। शिक्षक शिवलाल दांगी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिनकी वर्षों की शिक्षकीय एवं साहित्यिक साधना को अब राज्य स्तर पर सम्मानित कर न केवल उनके योगदान को स्वीकार किया गया है, बल्कि आगर-मालवा जिले के गौरव में भी एक नया अध्याय जुड़ गया है।

शिक्षक दिवस, 5 सितम्बर 2026 का दिन आगर-मालवा जिले के लिए विशेष उपलब्धि लेकर आया, जब भोपाल स्थित आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के स्वर्ण जयंती हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026 में सुसनेर के शिक्षक, लेखक, कवि एवं साहित्यकार श्री शिवलाल दांगी को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राज्य के सर्वोच्च नेतृत्व की उपस्थिति में मिला सम्मान

शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित इस गरिमामय समारोह में प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों की प्रतिभा और समाज निर्माण में उनके योगदान को सम्मानित किया गया। समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में चयनित शिक्षकों को सम्मान प्रदान किया गया।

मंच पर परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया।

लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त श्री अभिषेक सिंह सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, सम्मानित शिक्षकगण एवं उनके परिजन भी इस विशेष अवसर के साक्षी बने।

शिवलाल दांगी को मिला राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार

लोक शिक्षण संचालनालय, स्कूल शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी प्रशस्ति-पत्र में शिक्षक श्री शिवलाल दांगी, माध्यमिक शिक्षक, शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुसनेर, जिला आगर-मालवा को विशिष्ट प्रतिभा सम्पन्न शिक्षक के रूप में समाज की बहुमूल्य सेवा के लिए राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार-2020 प्रदान किया गया।

इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह, शॉल, श्रीफल एवं 25 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई।

यह सम्मान उस शिक्षकीय साधना का सार्वजनिक अभिनंदन है, जिसमें ज्ञान प्रदान करने के साथ समाज के प्रति उत्तरदायित्व, साहित्य के प्रति अनुराग और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाई देती है।

प्रदेशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों के बीच सुसनेर का नाम

समारोह में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें शिवलाल दांगी (सुसनेर) के साथ धन्नालाल बिसेन (बालाघाट), रीतेश कुमार पथाड़े (बैतूल), सुखनंदन साहू (दमोह), नरेंद्र कुमार भारद्वाज (गुना), ओम प्रकाश विश्वकर्मा (नर्मदापुरम), महेंद्र सिंह ठाकुर (कटनी), राकेश कुमार गुप्ता (मंदसौर), शिखा शर्मा (नरसिंहपुर), लोकेंद्र सिंह पंवार (नीमच), ज्योति पाठक (निवाड़ी), राकेश कुमार वर्मा (रायसेन), सुरेश चंद्र सोनी (राजगढ़), शर्मिला उपाध्याय (रतलाम), रीनादेवी कटरे (सिवनी), हेमंत कुमार वैद्य (शाजापुर), राकेश द्विवेदी (सीधी), सीमा परमार (उज्जैन), पूनम मिश्रा (बालाघाट), बिहारीलाल प्रजापति (छतरपुर), अरुण कुमार भादे (छिंदवाड़ा), बलराम अहिरवार (दमोह), मुकेश कुमार शर्मा (गुना), अरुण कुमार मित्तल (इंदौर), मुकेश प्रजापति (मंदसौर), मनीष तिवारी (नरसिंहपुर), अजय कुमार मिश्रा, मुकेश नागर (राजगढ़), राजेश महेश्वरी (रतलाम), मोहित कुमार गर्ग (सतना), पूजा पांडे (सिवनी), सतीश पांडे (सीधी), श्वेता तिवारी (उज्जैन) एवं अजिता सहित अन्य शिक्षकों ने सम्मान प्राप्त किया।

इन सभी शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र एवं 25 हजार रुपये की नगद सम्मान राशि देकर सम्मानित किया गया।

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राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त भैरूलाल ओसारा का भी हुआ सम्मान

इस अवसर पर आगर-मालवा जिले के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त श्री भैरूलाल ओसारा को भी समारोह में सम्मानित किया गया।

श्री ओसारा को पूर्व में राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त हो चुका है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह प्रतिष्ठित पहचान आगर-मालवा जिले की शैक्षणिक विरासत का गौरवपूर्ण अध्याय है।

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में पुनः उनका सम्मान किया जाना उनके दीर्घकालीन शिक्षकीय योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा।

मुख्यमंत्री बोले—गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि

समारोह के अध्यक्षीय संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को देश की अनुपम सांस्कृतिक धरोहर बताया।

उन्होंने कहा कि गुरुजन केवल विशेष व्यक्ति ही नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं के संवाहक भी हैं। दुनिया में भारत का मान निरंतर बढ़ रहा है और इसके पीछे गुरु की महिमा भी महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जहां गुरूर समाप्त होता है और गुण प्रारंभ होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है।

उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को दीपक के समान बताते हुए कहा कि गुरु स्वयं अंधेरे में रहकर भी अपने विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करते हैं। माता-पिता के बाद शिक्षक ही वह व्यक्ति है, जो अपने विद्यार्थी के लिए यह कामना करता है कि वह जीवन में वही बने, जो वास्तव में बनना चाहता है।

शिक्षा को चाहिए निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन

राज्यपाल महोदय ने अपने संबोधन में बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को निरंतर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती। बदलती वैश्विक आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों के अनुरूप शिक्षा में निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन की आवश्यकता है।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे भारतीय शिक्षा को नई पहचान और शक्ति मिलेगी।

राज्यपाल ने कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की दीवारें हटाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि उनका दायित्व अब केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें प्रेरित करने और सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक की भूमिका में आगे आना होगा।

केवल शिक्षक नहीं, साहित्य-साधक भी हैं शिवलाल दांगी

शिवलाल दांगी की पहचान केवल एक शिक्षक के रूप में सीमित नहीं है। वे लेखक, कवि और साहित्यकार भी हैं। उनकी साहित्यिक साधना का एक विशिष्ट पक्ष भारतीय संस्कृति, महापुरुषों और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को अपनी लेखनी के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाना है।

उन्होंने विभिन्न महापुरुषों और प्रेरक व्यक्तित्वों पर सैकड़ों चालीसाओं की रचना की है। उनकी इस अनूठी साहित्यिक साधना पर आधारित विभिन्न पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

आज के उस दौर में, जब नई पीढ़ी तेजी से अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक जड़ों से दूर होती दिखाई देती है, शिवलाल दांगी जैसे शिक्षक अपनी लेखनी के माध्यम से परंपरा और नई पीढ़ी के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य कर रहे हैं।

उनकी रचनाधर्मिता केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि महापुरुषों के व्यक्तित्व और कृतित्व को जनभाषा में जीवंत करने का प्रयास है।

कक्षा में शिक्षक, समाज में संस्कारों के संवाहक

शिक्षक का वास्तविक मूल्यांकन केवल परीक्षा परिणामों से नहीं किया जा सकता। एक श्रेष्ठ शिक्षक वह होता है, जो विद्यार्थी के भीतर ज्ञान के साथ संस्कार, प्रश्न करने की क्षमता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टि विकसित करे।

शिवलाल दांगी की यात्रा इसी व्यापक शिक्षक धर्म का उदाहरण है। विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ-साथ साहित्य के माध्यम से समाज को दिशा देने का उनका प्रयास उन्हें सामान्य शिक्षकीय दायित्व से अलग पहचान देता है।

उनकी उपलब्धि यह संदेश भी देती है कि शिक्षक जब अपनी कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर समाज और संस्कृति के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाता है, तब उसका व्यक्तित्व एक संस्था का रूप ले लेता है।

आगर-मालवा के लिए गौरव का क्षण

राज्य स्तरीय मंच पर आगर-मालवा जिले के शिक्षक का सम्मान निश्चित रूप से पूरे जिले के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है।

विशेष रूप से सुसनेर जैसे अंचल से निकलकर राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का सम्मान प्राप्त करना यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा को पहचान मिलने के लिए महानगरों की सीमाएं आवश्यक नहीं होतीं। समर्पण, निरंतर साधना और अपने कार्य के प्रति ईमानदारी व्यक्ति को किसी भी मंच तक पहुंचा सकती है।

और इसी समारोह में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से अलंकृत भैरूलाल ओसारा का पुनः सम्मान यह बताता है कि आगर-मालवा की धरती ने शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय और राज्य—दोनों स्तरों पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

शिक्षक दिवस पर मिला सम्मान, बना यादगार अवसर

5 सितम्बर—भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन—और इसी अवसर पर प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान। यह समारोह भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षकों के प्रति समाज की कृतज्ञता का जीवंत उदाहरण बना।

यह केवल पुरस्कार वितरण का आयोजन नहीं था, बल्कि उन व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान का सार्वजनिक उत्सव था, जो चुपचाप आने वाली पीढ़ियों का भविष्य गढ़ते हैं।

सम्मान मंजिल नहीं, नई जिम्मेदारी

पुरस्कार अक्सर किसी यात्रा का अंत नहीं होते। वे उस यात्रा की सार्थकता का सार्वजनिक स्वीकार होते हैं और साथ ही भविष्य की जिम्मेदारियों को भी बढ़ाते हैं।

शिवलाल दांगी के लिए राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान उनके लंबे शिक्षकीय और साहित्यिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके योगदान को और व्यापक बनाने की प्रेरणा भी बनेगा।

कलम की साधना, कक्षा का अनुशासन और संस्कृति के प्रति समर्पण—इन तीनों का सुंदर संगम यदि किसी व्यक्तित्व में दिखाई देता है तो वह शिवलाल दांगी जैसे शिक्षक-साहित्यकार हैं।

आगर-मालवा की धरती आज इस उपलब्धि पर गर्व कर सकती है कि उसके एक शिक्षक ने राज्य स्तरीय मंच पर सम्मान प्राप्त कर जिले की पहचान को नई ऊंचाई दी है ।

अंततः…

सम्मान मंच पर एक व्यक्ति को मिलता है, लेकिन उसकी चमक पूरे समाज को प्रकाशित करती है।

शिक्षक शिवलाल दांगी को मिला यह राज्य स्तरीय सम्मान केवल प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह और पुरस्कार राशि भर नहीं है; यह उस शिक्षक की वर्षों पुरानी साधना का सम्मान है, जिसने विद्यालय में ज्ञान के दीप जलाए और साहित्य में संस्कृति की लौ को जीवित रखने का प्रयास किया।

और भैरूलाल ओसारा जैसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शिक्षक की उपस्थिति इस गौरव को और गहरा करती है।

आगर-मालवा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यहां शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाते—वे पीढ़ियां गढ़ते हैं, संस्कारों को शब्द देते हैं और समाज की चेतना को दिशा देते हैं।

“शिक्षक जब पढ़ाने के साथ लिखना शुरू करता है, तो वह केवल विद्यार्थियों का भविष्य नहीं गढ़ता, बल्कि समाज की स्मृतियों और संस्कारों को भी शब्द दे देता है।”

जनमत जागरण परिवार की ओर से शिक्षक, लेखक, कवि एवं साहित्यकार श्री शिवलाल दांगी तथा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त श्री भैरूलाल ओसारा को इस गौरवपूर्ण सम्मान पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं।

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