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आस्थाआगर मालवामध्यप्रदेशस्पाट लाइट

चल कांवरिया..चल कांवरिया..कावड़ उठा नारा शिव का लगा.. मनचाहा फल देंगे भोले बाबा

🚩कावड़ियों का हर कदम अश्वमेघ यज्ञ करने के फल के बराबर - कावड़ यात्री निकले महाकाल के जलाभिषेक के लिए , पदयात्रा करते हुए भी पहुंचेंगे भोले के दरबार में भक्त

जनमत जागरण @ सोयतकलां से निकुंज कुमरावत की रिपोर्ट :: भगवान भोलेनाथ का ध्यान जब हम करते हैं तो श्रावण का महीना, रूद्राभिषेक और कांवड़ का उत्सव आंखों के सामने होता है। सावन का महीना भोले की भक्ति करने वालों के लिए होता है बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ लोग महाकाल का पूजन अभिषेक करते हैं

‌‌इसी कड़ी में नगर से शनिवार को महाकाल का जलाभिषेक करने के लिए दर्जनों कावड़िया और पदयात्रा निकले । नगर में नर्मदेश्वर महादेव मंदिर माधव चौक से शुरू हुआ कावड़ियों और पद यात्रियों का जत्था नगर के प्रमुख मार्गो से होता हुआ महाकाल उज्जैन की और निकल गया। नगर वासियों ने जगह-जगह कावड़ियों का स्वागत किया।

🚩वैसे तो भगवान शिव का अभिषेक भारतवर्ष के सारे शिव मंदिरों में होता है। लेकिन श्रावण मास में कांवड़ के माध्यम से जल-अर्पण करने से वैभव और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। वेद-पुराणों सहित भगवान भोलेनाथ में भरोसा रखने वालों को विश्वास है कि कांवड़ यात्रा में जहां-जहां से जल भरा जाता है, वह गंगाजी की ही धारा होती है।

🚩कांवड़ शिव के उन सभी रूपों को नमन है। कंधे पर गंगा को धारण किए श्रद्धालु इसी आस्था और विश्वास को जीते हैं। यानी कांवड़ यात्रा शिव के कल्याणकारी रूप और निष्ठा के नीर से उसके अभिषेक को तीव्र रूप में प्रतिध्वनित कहा जाता है कि कांधे पर कांवड़ रखकर बोल बम का नारा लगाते हुए चलना भी काफी पुण्यदायक होता है। इसके हर कदम के साथ एक अश्वमेघ यज्ञ करने जितना फल प्राप्त होता है। घरों में भी प्रायः श्रद्धालु शिवालयों में जाकर सावन मास में भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, करते हैं।

🚩ऐसा नहीं है कि कांवड़ यात्रा कोई नयी बात है यह सिलसिला कई सालों से चला आ रहा है। फर्क बस इतना है कि पहले इक्का-दुक्का शिव भक्त ही कांवड़ में जल लाने की हिम्मत जुटा पाते थे, लेकिन पिछले दस सालों से शिव भक्तों कि संख्या में लगातार वृद्धि होती चली जा रही है।

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