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अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

जानिए : कब से मेरे भारत के गोवंश की उपेक्षा हुई : अब हमें पुनः हमारे मूल धन गोधन की और लोटना होगा ताकि मेरा भारत पुनः सोने की चिड़िया बन सकें

🟠 भारत की समृद्धि का मूल आधार गोधन ही है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती सुसनेर।

जनमत जागरण @ सुसनेर : देश में जब से हरित क्रांति एवं श्वेत क्रान्ति के नाम से जो मशीनीकरण एवं विदेशी सूअर प्रजाति के पशुओं का भारत में आगमन हुआ है, तब से मेरे भारत के गोवंश की उपेक्षा हुई है और किसान के साथ परिवार एवं देश के लिए अन्न उत्पादन में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन करने वाले नन्दी आज या तो दर दर की ठोकरें खा रहें है या कसाइयों के चंगुल में फंसकर अपने प्राण गंवा रहें है जो देवभूमि भारत के लिए ठीक नहीं है और अब हमें पुनः हमारे मूल धन गोधन की और लोटना होगा ताकि मेरा भारत पुनः सोने की चिड़िया बन सकें । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो-आराधना महामहोत्सव के 127 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज ने कही ।

  • 🚩 महादेवी अहिल्या बाई जी होल्कर की पुण्यतिथि पर कोटिश नमन : आज मालवा में अपना नाम अमर करने वाली महामाई का पुण्य दिवस है। एक ऐसी महादेवी जिन्होंने साधारण परिवार में जन्म लेकर अपनी दिव्यता से भारतीय संस्कृति को पुनः स्थापित कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसी जगत माता महादेवी अहिल्या बाई जी होल्कर जिनकी न्याय प्रियता,भक्त वत्सलता, शिव भक्ति, गो भक्ति, राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम, नारी शिक्षा, विधवा व्यवस्था अदभुद थी। आज उनकी पुण्यतिथि पर कोटिश नमन ।

  • 🚩वीर दुर्गादास जी को उनकी जन्म जयंती पर भाव पूर्वक नमन :: स्वामीजी ने आगे बताया कि आज ही के दिन राष्ट्र रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले एक महापुरुष का प्राकट्य दिवस है। जिन्होंने मारवाड़ के राठौड़ शासन को बचाने के लिए मुगल शासन को चुनौती दी थी। ऐसे वीर दुर्गादास जी को उनकी जन्म जयंती पर भाव पूर्वक नमन।

🚩 तीर्थों को जैसा है वैसा बना रहने देवे :: स्वामीजी ने बताया कि तीर्थों के विकास के नाम पर तीर्थों का गला घोटा जा रहा है। तीर्थों को विकास नहीं तीर्थों को प्राकृतिकता चाहिए, पवित्रता चाहिए। तीर्थों को जैसा है वैसा बना रहने देवे। जब से चार धाम की सड़के चौड़ी हुई है तब से वहां दर्शनार्थी कम पर्यटक ज्यादा जा रहे है। गंगा के किनारे बिस्लरी का पानी पीने वाले लोग पहुंच रहे है। जब पहले अन्न छोड़ कर जीवन निर्वाह करने वाले लोग वहां जाते थे। गंगा जी के किनारे कंद मूल खाकर तपस्या करते थे। आज गंगा किनारे लाखो टन कचरा नूडल्स, चिप्स, नमकीन आदि की थैलियों का मिलेगा। बड़े दुख की बात है कि मदिरा की खाली बोतलें गंगा जी के किनारे पाई जा रही है। जहां प्राणियों के प्रति प्रेम होता था आज गंगा किनारे मछलियां पकड़ी जा रही है। आज विलासिता के चलते भोग विलास की साधन वहां पहुंच गए है, लोग भोग विलास के लिए वहां जा रहे है। यह सब तीर्थों के विकास का परिणाम है। इसलिए तीर्थों को विकास नहीं पवित्रता चाहिए। उनको उसी स्वरूप में रहने देना चाहिए जैसे वह थे।

अतिथि - 127वें दिवस पर श्री राधाकृष्ण गोशाला वमाशा (सागवाड़ा) जिला डूंगरपुर ,(राजस्थान) के श्री विरेन्द्र सिंह एवं उनकी मित्र मण्डली एवं राजस्थान के बूंदी जिले  के ढाबी ग्राम में स्थित गोपाल गोशाला के श्री युवराज राठौर, बंशी लाल राठौर एवं मोहन लाल प्रजापत आदि अतिथि उपस्थित रहें । श्रावण शुक्ला अष्टमी पर शिवसहस्त्राहुती यज्ञ ,पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक मध्यप्रदेश के राजगढ जिले के पचोर से श्रीनाथ श्रीमती बबीता जी गुप्ता एवं कोडिया खेड़ी (राजगढ) से केसर सिंह पटेल -श्रीमति चंद्रकलां  के परिवार की और से सम्पन्न हुआ ।
चित्र : गोकथा सुनाते स्वामी गोपालानंद सरस्वती।चित्र 2 : गोकथा में उपस्थित गौभक्त।चित्र 3 व 4 : गोभक्तो का सम्मान करते समिति सदस्य।चित्र 5 : गोकथा में गोमाता को चुनड़ ओढाती गोभक्त ।चित्र 7 : गोपूजन करते गोभक्त चित्र 8 : गोमाता के किये चुनड़ लाते गोभक्त ।
🚩 127वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के भवानी मंडी एवं मध्यप्रदेश के आगर जिले से :  एक वर्षीय गोकृपा कथा के 127 वें दिवस पर   राजस्थान के झालावाड़ जिले के भवानीमण्डी से पोरवाल मेटल्स एवं हीरालाल नामदेव (बन्धु कचोरी वालों ) की ओर से एवं मध्यप्रदेश के  आगर जिले की बडौद तहसील के गढ़ी ग्राम से नारायण सिंह, उमराव सिंह, ईश्वर सिंह, देव सिंह, जसवंत सिंह एवं प्रधान सिंह व सुसनेर तहसील के ग्राम खेजड़ी से पटेल भगवान सिंह,रघुनाथ सिंह, पीरु सिंह, बहादुर सिंह,, नारायण सिंह, रूगनाथ सिंह,, चन्दर सिंह, मोड़ सिंह,मोतीलाल, कमल सिंह, जोरावर सिंह, गणपत लाल एवं बालू सिंह के साथ भवानीमण्डी,गढ़ी एवं खेजड़ी ग्राम के सैकड़ों मातृशक्ति ,युवा, वृद्ध अपने  देश,राज्य एवं ग्राम/नगर के जन कल्याण के लिए डीजे के गाजे बाजे के साथ  भगवती गोमाता के लिए छपन्नभोग लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन  करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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