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स्वतंत्रता दिवस पर स्वामी गोपालानंद जी ने कहा-तब तक आजादी का सपना अधूरा है जब तक इस देश में यह काम बंद नहीं होता… पढ़ें यह खबर

🚩गोमाता है तो देश है, संस्कृति है,संस्कृति नही तो देश कैसा ? – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। जिन लोगो को कुर्सी की जल्दी थी उन्होंने निजी स्वार्थ के चलते हमारे देश को खंड खंड करते हुए सिंध प्रांत को अलग करके पाकिस्तान बना दिया। नाम पाकिस्तान और हरकते नापाक । बांग्लादेश भी भारत का हिस्सा था । अभी वहां की प्रधानमंत्री को तख्ता पलट के कारण भारत में शरण लेनी पड़ी। इस कारण बांग्लादेश में बस रहे लाखो हिंदुओ के प्राणों पर संकट है। और पाकिस्तान के साथ हमें भारत मां का कंधा कहलाने वाले बांग्लादेश को भी वापस लेना होगा तभी वहां शान्ति स्थापित हो सकती है क्योंकि पश्चिम बंगाल के रास्ते से असंख्य गोमाता बांग्लादेश में रोज कटने को जा रही है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्स के 129 वे दिवस पर* श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज ने बताया कही।

🚩 स्वामीजी ने आगे कहां कि जब तक भारत भूमि से गोहत्या का कलंक शत प्रतिशत खत्म नहीं हो जाता आजादी का उल्लास का मन नहीं करता । जब तक हिंदुस्थान की गलियों में गाय माता कटती रहेगी तब तक आजादी का सपना अधूरा है । स्वामीजी ने बताया कि माना कि समाज का दायित्व है  समाज और सरकार दोनों जिस तरह से जी रहें है लगता है हिन्दूस्थान में कुछ बड़ा होने वाला है अगर  परिस्यथितियां यही रही तो लोकतंत्र भारत से जाएगा और देवतंत्र भारत में फिर से आएगा । गोमाता की रक्षा के लिए यदि प्राण निकल जाए तो व्यक्ति ब्रह्म हत्या जैसे पाप का दोष से भी मुक्त हो जाता है। प्राण तो एक दिन निकलने ही है, कौन अमर हुआ है इस संसार में लेकिन जिस व्यक्ति के प्राण गो के लिए निकले। वह प्राकृत रूप से ईश्वर तुल्य ही है। तुलसी जी की सेवा, भागवत जी का पाठ व भगवान नारायण का ध्यान यह तीनों करो अथवा गो सेवा करो एक ही बात है, कोई अंतर नही है। आप गो सेवा करके इन तीनो का पुण्य सहज ही प्राप्त कर सकते है। राष्ट्र भक्ति का पाखंड भी हम रचते है। जिस राष्ट्र की आजादी के लिए 1857 की क्रांति में जिस गोमाता की भूमिका थी उस गइया को आज भुला दिया है। गोमाता है तो देश है, संस्कृति है,संस्कृति नही तो देश कैसा ? भारत किसी जमीन का टुकड़ा नही है। यहां की संस्कृति, यहां का प्रेम, यहां का सौहार्द, यहां की भावनाओ एवं  परंपराओं का देश पर मर मिटने वाले लोगो का नाम है भारत । 

🚩साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती दीदी ने 78 वें स्वतंत्रता दिवस पर किया गो-अभ्यारण में ध्वजारोहण उद्बोधन में कहा: गो की सेवा के बिना भारत माता की सेवा नहीं हो सकती

एशिया के प्रथम गो अभयारण्य में 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता स्वामी गोपालानंद जी की कृपापात्र शिष्या साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती दीदी ने 78 वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया । साध्वी जी ने स्वतंत्रता दिवस पर अभयारण्य में गोसेवा कर रहें ग्वालो को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म में नो माताएं है, जिसमे से गोमाता, धरती माता एवं जन्मदात्री ये तीन माताएं महत्त्वपूर्ण है और आप लोग तो बड़े सौभाग्यशाली हैं कि आपको जन्मदात्री मां के साथ गोमाता की सेवा करने का सौभाग्य भी मिल रहा है और जिसने गोमाता की सेवा कर ली तो उससे भारत माता की सेवा स्वत: ही हो जाती है अर्थात गो की सेवा ही राष्ट्र की सेवा है क्योंकि गो की सेवा के बिना राष्ट्र की उन्नति नहीं हो सकती है यानि गो की सेवा के बिना भारत माता की सेवा नहीं हो सकती ।

  • अतिथि:: 129 वें दिवस पर राजसमंद जिले के निवासी हाल मुकाम विरार मुम्बई में रह रहें प्रकाश सिंह राजपूत अतिथि के रूप में उपस्थित रहें । श्रावण शुक्ला दशमी पर शिवसहस्त्राहुती यज्ञ ,पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक मध्यप्रदेश के इन्दौर निवासी श्री विष्णु जी शर्मा ने एकादश विप्रजनों के माध्यम से सम्पन्न करवाया।
🚩 129 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर जिले की सुसनेर  तहसील से : एक वर्षीय गोकृपा कथा के 129 वें दिवस पर    मध्यप्रदेश के  आगर जिले की सुसनेर तहसील के धान्याखेड़ी ग्राम के पटेल अर्जुन सिंह, बालू सिंह,दरबार सिंह, भेरू सिंह , नैन सिंह, चतर सिंह एवं भगवान सिंह के साथ ग्राम के सैकड़ों मातृशक्ति ,युवा, वृद्ध अपने  देश,राज्य एवं ग्राम/नगर के जन कल्याण के लिए डीजे के गाजे बाजे के साथ  भगवती गोमाता के लिए छपन्नभोग लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन  करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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