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अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

गोमाताओं की सेवा की प्रेरणा देने वाले एक दिव्य सन्त की कमी हो गई है गो सेवा करने की प्रेरणा आज के शुभ दिन में हमें वे दे गए है…जानिए इस महान गो संत के बारे में

🚩गोमाता रक्षार्थ प्राण भी चले लेकिन गोसेवा नहीं छोड़े, यही सच्चा धेनु धर्म है - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज गो वत्स द्वादशी का पुण्य पर्व है और आज के दिन गो के महान सन्त रेवासा पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज का भू लोक से गोलोक गमन हो गया है । पूज्य स्वामी जी के गोलोक गमन से भूलोक में गोमाताओं की सेवा की प्रेरणा देने वाले एक दिव्य सन्त की कमी हो गई है और हमें और अधिक गो सेवा करने की प्रेरणा आज के शुभ दिन में हमें वे दे गए है । स्वामीजी ने आगे बताया कि गो द्वादशी का पर्व हमारे देश में अलग अलग स्थानों पर भिन्न भिन्न रूप से मनाया जाता है| इस पर्व को मनाने के पीछे हेतु गोमाता और बछड़े की कृपा हमारी संतान पर बनी रहे और द्वादशी के दिन यह त्यौहार सन्देश देता है कि साल के 12 महीने हम गोमाता की सेवा करें । कई माताएं गो वत्स द्वादशी पर तो गोमाता की पूजा करती है और उसके अगले दिन ही घर पर आई गोमाता को डंडे से मार कर भगाती है | ऐसे पाखंड से बचते हुए 12 महीने गोमाता की सेवा उसी भाव से करते रहना चाहिए। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 144 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

 🚩 गोमाता रक्षार्थ प्राण भी चले लेकिन गोसेवा नहीं छोड़े यही सच्चा धेनु धर्म है :: गोमाता के होंठों पर चंडी देवी का निवास होता है| गोमाता जब जल पीती है तब जल पवित्र हो जाता है| गोमाता के चरण जहाँ पड़ते है वह स्थान पवित्र हो जाता है | गोचर में जब गोमाता गोचारण करते हुवे गोबर गोमूत्र का त्याग करती है बारिश के समय यदि गोबर गौमूत्र जल के साथ मिलकर तालाब या नदी में जाता है तब वह जल भी शुद्ध हो जाता है | ऐसे तालाब में कोई व्यक्ति स्नान करता है तो उसका तन भी पवित्र हो जाता है | जब बाहर पवित्रता आती है तो धीरे धीरे अंतर्मन भी पवित्र होना शुरू हो जाता है| ऐसे में साधक को भजन में अच्छे से मन लगता है और साधना सहज होती है । स्वामीजी ने धेनु धर्म के बारे में बताते हुवे कहां कि गोमाता की सेवा करना, गोमाता की सर्दी गर्मी से रक्षा करना, समय पर चारा डालना, गोमाता के आवास की समुचित व्यवस्था करना, गोघातियो से गोमाता की रक्षा करना धेनु धर्म कहलाता है  और गोमाता रक्षार्थ प्राण भी चले लेकिन गोसेवा नहीं छोड़े यही सच्चा धेनु धर्म है। 

अतिथि:: 144 वें दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोसेवा विभाग के मालवा प्रान्त के सह प्रान्त संयोजन श्री समर सिंह चंदेल, उज्जैन विभाग गो सेवा संयोज्क श्री सीताराम सेकवाडिया, नागदा जिला गो सेवा संयोजक श्री संजय बंबोरिया, नागदा जिला गो प्रशिक्षण प्रमुख श्री गिरधारी लाल पाटीदार, विश्वहिंदू परिषद् उज्जैन विभाग समरसता संयोजक श्री भंवर लाल धाकड़, चांपाखेड़ा गोशाला सचिव श्री अवध बिहारी नायमा व राजगढ जिले की ग्राम पंचायत बावड़ीखेड़ा के सरपंच श्री हिन्दू सिंह पंवार एवं श्री भगवान सिंह कडेला अतिथि के रूप में उपस्थित रहें ।

पार्थिव शिवलिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक एकादश इन विप्रजनों द्वारा हुआ सम्पन्न :: 144 वें दिवस की कथा में पधारे सकल राठौर तेली समाज शिक्षा एवं विकास समिति दूधाखेड़ी माताजी जिला मदसौर (म. प्र.) से पधारे समिति अध्यक्ष लेखराज राठौर एवं समिति के सदस्य विजय राठौर, जगदीश राठौर, रामेश्वर राठौर, रामगोपाल राठौर, बालचन्द राठौर, बालाराम राठौर एवं सुनिल कुमार राठौर को पूज्य महाराज जी ने सम्पूर्ण समिति से आग्रह किया कि मां दूधाखेड़ी माताजी को गोदूग्ध का भोग लगे इसके लिए समाज की ओर से एक छोटी सी गोशाला मां दूधाखेड़ी के दरबार में बने और गोशाला बनने पर मैं भी भगवती गोमाता एवं दूधाखेड़ी माताजी के दर्शन करने आऊंगा ऐसा पूज्य महाराज जी ने समिति के सभी सदस्यों को बताया । भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी के शुभ अवसर पर पर गो पूजन शिवसहस्त्राहुति यज्ञ, पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक एकादश विप्रजनों द्वारा सम्पन्न हुआ ।

⏩ 144 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 144 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की सुसनेर तहसील के बराई ग्राम की महिला मण्डल ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम  के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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