ब्राह्मण के घर पहले यह होना जरूरी था नहीं होता तो उसे हीन समझा जाता था और दूसरा ब्राह्मण उसे अपनी बेटी नही देता था… जानिए पहले ब्राह्मण के घर क्या होना जरूरी था

🚩गो माता चलता फिरता मन्दिर है, जिसमें 33 कोटि देवता निवास करते है- स्वामी लक्षानंद जी महाराज
जनमत जागरण @ सुसनेर। ब्रज मण्डल गो लोक से भेजा स्थान है, जब भगवान धरती पर अवतरित होने वाले थे तो देवी लक्ष्मी बहुत दुःखी थी तो भगवान ने कहां कि देवी आप भी साथ चलिए तो देवी ने कहा कि गोलोक में सहस्त्रों गो और गोचर है मैं इस आनन्द को छोड़कर नहीं जा सकती तो भगवान ने 84 कोस का ब्रज मंडल प्रभु ने गोलोक से धरती पर अवतरित किया और आज भी जब ब्रज मण्डल का उच्चारण करते ही भगवान कृष्ण का वात्सल्य प्रगट हो जाता है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 143 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।
🚩 स्वामीजी ने आगे बताया कि ब्राह्मणों की शक्ति इतनी हुआ करती थी, ब्राह्मण तो नवीन सृष्टि निर्माण करने की ताक़त रखा करते थे क्योंकि ब्राह्मण के साथ भगवती गोमाता का अटूट सम्बन्ध हुआ करता था । गो ब्राह्मण का गहरा नाता था सभी विप्र धेनु को राखे, धेनु कृपा से ब्रह्म को चाहते गाय माता सारे जगत की माता है यह तो आप सभी जानते ही है लेकिन गाय और ब्राह्मण सनातन के अभिन्न अंग है । सभी ब्राह्मण एक नहीं अनेक गो माता रखते थे और जिस ब्राह्मण के घर गाय नहीं होती थी उसे हीन समझा जाता था और दूसरा ब्राह्मण उसे अपनी बेटी नही देता था । ब्राह्मण देवता की तो मुख्य सम्पत्ति गाय ही थी। जिसका अग्नि पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि गो और ब्राह्मण एक ही कुल की दो शाखाएं है । एक में मंत्र विराजमान है और दूसरे में हविष्य अर्थात हविष्य (यज्ञ सामग्री) बिना यज्ञ नही हो सकता ।

🚩गोमाता एक ऐसा मंदिर है जिसमे सभी समाज के, धर्म के लोग पूजा और सेवा कर सकते है :: एकादशी के पुनित पर्व पर श्री राम गो आश्रम अल्हेड से पधारे पूज्य स्वामी लक्षानन्द जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में बताया कि सनातन में गो माता चलता फिरता ऐसा मन्दिर है, जिसमें 33कोटि देवता निवास करते है । गोमाता एक ऐसा मंदिर है जिसमे सभी समाज के, धर्म के लोग पूजा और सेवा कर सकते है। गो, गौरी ओर सनातन संस्कृति पर कहीं भी आघात हो तो हमे ढाल बनकर उसकी रक्षा करनी होगी। मेवाड के शासक महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर गोमाता की ओर अपनी मातृभूमि की रक्षा की थी। हम उन्हीं के वंशज है इस कारण हमारा भी दायित्व बनता है। एक एक गांव से युवाओं को संगठित होकर इस कार्य के लिए आगे आने की आवश्यकता है। मातृशक्ति को भी इस दिशा में आगे आना होगा। तभी जाकर हम गोमाता और हमारे धर्म की रक्षा कर सकेंगे। पूज्य महाराज जी ने सतना जिले में गोमाताओं को नदी की पुल से फेंककर 15 गाय की मौत की है उसने खिलाफ जिस प्रकार कोलकाता की एक डॉक्टर बेटी के खिलाफ पूरा देश एकजुट है उसी प्रकार सतना ने 15 गोमाताओें को मारने वालों के खिलाफ जनजागरण कर दोषियों को कठोर सजा दिलाने के लिए हमें जन आन्दोलन करना होगा ।

⏩ अतिथि :: 143 वें दिवस पर मध्यप्रदेश के शाजापुर से दीप सिंह सोलंकी(मोहना),, हरिनारायण विश्वकर्मा (मोहना), शिवनारायण चंद्रवंशी (डूंगरी),, करण सिंह (डूंगरी),एवं लक्ष्मीचंद चंद्रवंशी (मोहना) अतिथि के रूप में उपस्थित रहें । भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी के शुभ अवसर पर पर गो पूजन शिवसहस्त्राहुति यज्ञ, पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक करावल नगर दिल्ली निवासी लखन सिंह राजावत उनके पुत्र जितेन्द्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, पुत्र वधु श्रीमती लक्ष्मी, श्रीमती करीना , चिरंजीव कृष्णा,युवराज, गोलू पौत्र एवं निधी,आंसू, काव्या पौत्री ने एकादश विप्रजनों से सम्पन्न करवाया ।
⏩ 143 वे दिवस पर चुनरी यात्रा देश की राजधानी दिल्ली एवं उत्तरप्रदेश के आगरा से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 143 वें दिवस पर चुनरी यात्रा दिल्ली के करावल नगर निवासी लखन सिंह राजावत एवं उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी पंकज कुमार यादव ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम /नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



