अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

सनातन की रीढ़ है आदिवासी समाज,लेकिन विधर्मी फूट डालकर इसे कमजोर कर रहें है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। जो धीर पुरुष है जिनके जीवन में भक्ति है , अहंकार रहित है और गोसेवा से जुडा है ऐसा व्यक्ति त्रिवेणी संगम पर प्राण त्याग करता है ,तो उसकी मुक्ति सहज हो जाती है | गोमाता पेड़ पोधो की माता है , गोमाता प्राणी जगत की माता है | गोमाता जगत को लाभ देना चाहती है इस कारण गोमाता के द्वारा पुरे विश्व में जगह जगह शिव लिंग का प्रकटीकरण हुआ है|जो व्यक्ति लोक कल्याण के लिए कार्य करता है उनकी भगवान सहायता करते है | दुसरे के दुखों को अपना दुःख समझ कर कार्य करते है उनका जीवन सार्थक है | जो व्यक्ति धर्म के पथ पर नहीं चले, दुसरो की सहायता नहीं करे वह मनुष्य बिना पुछ का जानवर जैसा है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 146 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

🚩स्वामीजी ने आगे बताया कि हमारी आपसी फुट से विधर्मियो ने खूब राज किया है| हमें कभी जातियों के नाम पर,कभी धर्म के नाम पर विभाजित किया और हमारी आस्था के केन्द्र कई सारे मंदिर तोड़ दिए गए , गोमाता की हत्या की गई| गोमाता और ब्राह्मण पर सबसे अधिक आघात किया गया | इसका सीधा सीधा नुकसान सनातन संस्कृति को हुआ है | यदि धर्म को बचाना है तो संगठित होकर गोमाता की सेवा और रक्षा में लगना होगा |हमारे शास्त्रों में लिखा है की गो और ब्राह्मण की रक्षा करना समाज का नैतिक दायित्व है | मुग़ल काल में दुष्ट शासको ने कई मंदिरों को तोड़ कर मस्जिद बनाये | स्वामीजी ने भारत के मुस्लिमों से आह्वान किया कि अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज आगे आकर विद्वता का परिचय देते हुवे काशी विश्वनाथ जैसे पौराणिक मंदिरों को पुन: स्थापित करने में सहयोग प्रदान करे |

🚩स्वामीजी ने बताया कि हिन्दू समाज की रीढ़ हमारा आदिवासी समाज रहा है ये लोग काफी संतोषी होते थे| झोपडी में रहते, रुखा सुखा खाते और आपस में गजब का प्रेम होता था| अपने इष्ट के प्रति गजब की भक्ति होती थी |आदिवासी बंधू गोमाता जी की सेवा पुरे मनोभाव से करते है | दस -दस गोमाता अपने घर में रखते चाहे वह दूध देवे या नहीं …निष्काम गोसेवा का जीवंत स्वरुप इन्ही के मध्य देखने को मिलता है | लेकिन वर्तमान में देश भर में धर्मांतरण के चलते तेज गति से इसाईकरण किया जा रहा है जो काफी चिंता जनक स्थिति है | यह लोग अपनी मूल धारा से विमुख होते जा रहे है |

गाय के दुग्ध से होगा गोपालेश्वर महादेव का दुग्धाभिषेक ::  स्वामीजी ने कथा में पधारे सभी श्रोताओं को आह्वान किया कि 02 सितम्बर सोमवार को सोमवती अमावस्या के पुण्य पर्व पर सभी श्रद्धालु अपने अपने घरों से एक एक लोटा गोमाता का दूध लेकर पधारे ताकि सोमवती अमावस्या के शुभावसर पर कथा के बाद भगवान गोपालेश्वर महादेव का दुग्धाभिषेक इसी दूध से होगा । 

अतिथि:: 146 वें दिवस पर भागवत प्रवक्ता पंडित हेमन्त कुमार तिवारी ,बोलिया बुजुर्ग सुनेल(राजस्थान) एवं श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के न्यासी घनश्याम राठौर सोयत एवं एक्सिक्स बैंक सुसनेर के बैंक मैनेजर आभिषेक माथुर अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के शुभ अवसर पर गो पूजन शिवसहस्त्राहुति यज्ञ, पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक निंबाराम श्रीमती अन्छी देवी के सुपोत्र एवं रमेश कुमार श्रीमती सुबटी देवी के सुपुत्र एवं पायल के बड़े भाई सागर प्रजापत निवासी चाडो की ढाणी, तहसील-सिणधरी,जिला बालोतरा(राज.) हाल मुकाम सोनगढ़, जिला तापी (गुजरात) ने एकादश विप्रजनों के माध्यम से सम्पन्न करवाया ।

146 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर जिले से ::  एक वर्षीय गोकृपा कथा के 146 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की बडौद तहसील के रलायती ग्राम से रामलाल पूर्व सरपंच , सरदार सिंह भगतजी, रामचंद्र सिंह सरपंच, दुलेसिंह नेताजी, भैरू सिंह, प्रभु सिंह, शिवनारायण, कालू सिंह, प्रभु लाल, दुलेसिंह, चंदर सिंह, दुलेसिंह, नारायण सिंह,प्रभुलाल सेन, मदन लाल, प्रेम सिंह, कमल सिंह, सत्यनारायण, बालू सिंह, राहुल सिंह, रतन सिंह एवं प्रभुलाल के साथ ग्राम की सैंकडों मातृशक्ति, युवाओ ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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