अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणदेशमध्यप्रदेश

आत्महत्या कौन करता है क्यों करता है..? इसे रोकने का एकमात्र उपाय है- जानिए गोकथा के माध्यम से स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती के श्रीमुख से

🚩 गोमाता की सेवा से मनुष्य में उत्साह एवं उल्लास उत्पन्न होता है,जिससे वह अवसाद से मुक्ति पाता है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। जब मनुष्य के पाप कर्म बढ़ जाते है तो व्यक्ति उस पाप कर्म के कारण अवसाद में आ जाता है और अन्त में और आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है । पूज्य महाराज जी ने कहां कि आत्महत्या वही व्यक्ति करता है जो कमजोर एवं सहनशील नहीं होता है और इस संसार में सहनशीलता का एक मात्र माध्यम है तो वह है भगवती गो माता क्योंकि गोमाता वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है, इसलिए आत्महत्या को रोकने का सबसे बड़ा उपाय गो सेवा है, क्योंकि गोसेवा से व्यक्ति डिप्रेशन एवं क्रोध एवं पाप से मुक्ति पाता है और जो जो गायमाता के साथ रहा है उसके जीवन में उत्साह एवं उल्लास रहा है ,जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण भगवान कृष्ण है जिनके जीवन में अनेक समस्या रहीं उसके बाद भी गो सेवा के माध्यम से उनके जीवन में उत्साह एवं उल्लास रहा और हमेशा उन्होंने मुस्कराते हुए इस संसार में सारी लीलाएं रची । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 155 वे दिवस विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

  • 🚩 स्वामीजी ने बताया कि शिक्षक राष्ट्र की शान है और वे भारत के भविष्य रूपी विधार्थी का निर्माण करते है । आचार्य चाणक्य ने कहां है कि” एक शिक्षक समय आने पर सत्ता भी परिवर्तित कर देते है । स्वामीजी ने बताया कि वैश्विक स्तर पर इस कलिकाल में मैकाले शिक्षा का प्रभाव होने के बावजूद भी आज भारत में सरस्वती शिशु मंदिर जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विद्यालय आज भी भारत के भविष्य रूपी विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति को जीवित रखने का सतत कार्य कर रहें है। 11अगस्त बुधवार को एशिया के इस गो अभयारण्य में राधाष्टमी के पुण्य पर्व पर मां राधारानी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा और सायंकाल को विशाल भजन संध्या का आयोजन होगा ।

🚩155 वें दिवस की गो कृपा कथा के बाद 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पद यात्रा के प्रणेता ग्वाल सन्त स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने गोसेवकों के साथ 2012 से चल रही 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा जो दो वर्षो के लिए मध्यप्रदेश में गो सेवा का अलख जगाने के लिए तीन यात्रा चल रही है जिसमें से राम यात्रा पहले से मध्यप्रदेश में चल रही है और शिव एवं श्यामयात्रा आज गो कृपा कथा की आरती के बाद गो अभयारण्य से रवाना हुई । स्वामीजी ने बताया कि पदयात्रा में जो भी सन्त एवं उनके सहयोगी चल रहें है वे समाज से केवल गोसेवा के लिए जागृति लाने के लिए गांव गांव में गोप्रेमी सज्जनों माता बहिनों को एकत्रित करवाकर उनके मध्य गो कृपा कथा करते है बाकि यात्रा में अन्य किसी भी प्रकार का भोजन व्यय अन्य किसी भी प्रकार का सहयोग एवं दान चंदा नहीं लेते है ।

अतिथि:: 155 वे दिवस पर सरस्वती शिशु मन्दिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुसनेर के प्राचार्य  जितेन्द्र सिंह गेहलोत सहित रामबाबू त्रिवेदी, जितेन्द्र कुशवाह,निर्मल जैन,महेश जायसवाल, को दीपक सोनी,कैलाश जैन,श्रीमती सीमा राठौर एवं श्रीमती टीना राठौर व राजगढ जिले की जीरापुर तहसील के धनोदा से रामचंद्र मेडतवाल,अशोक सिंह राजपुत,मोहन लाल कारपेंटर,संजय गुप्ता एवं कालू सिंह राजपुत अतिथि के रूप में उपस्थित रहें । 
155 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  राजस्थान के झालावाड़ जिले से ::  एक वर्षीय गोकृपा कथा के 155 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले की पिड़ावा तहसील के  तुमड़िया खेड़ी ग्राम की महिला मण्डल से सैंकड़ों  मातृशक्ति ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम  के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!