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भव्य और दिव्य तरीके से मनाया गया राजस्थान के महान लोकदेवता और जन-जन के आराध्य भगवान श्री देवनारायण का जन्मोत्सव

जनमत जागरण @ नलखेड़ा से रवि कुमरावत की आन द स्पॉट लाइव रिपोर्ट– जिले भर में राजस्थान के महान लोकदेवता और जन-जन के आराध्य भगवान श्री देवनारायण का जन्मोत्सव भव्य और दिव्य तरीके से मनाया गया, जो न केवल धार्मिक भावना से ओतप्रोत होता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व को भी उजागर करता है। भगवान श्री देवनारायण की छठ बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई नलखेड़ा समीपस्थ ग्राम पढ़ाना एवम धंदेड़ा के मध्य अति प्राचीन एवं चमत्कारी श्री देवझरी देवनारायण मंदिर में भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया ।

एक दिवासीय मेले का हुआ आयोजन :: इस दिन यहां मंदिर प्रांगण में एक दिवसीय मेले का आयोजन भी होता है मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया एवं भगवान को 56 भोग रामचंद्र कुमरावत नलखेड़ा की और से लगाया गया पंचमी शाम से ही जागरण एवम भजन कीर्तन से एवं अन्य कार्यक्रम का आयोजन होता है ।

⏩ पंचमी की रात मे भजन संध्या मे गायक कपिल राठौर सेमलखेड़ी एवं ओगायिका ऋषिता सुमन रामगंज मंडी के द्वारा भजनो की सुन्दर प्रस्तुतिया दी गई सोमवार सुबह से ही दर्शनों के लिए भक्तो का तांता लगा हुआ था

🚩 भगवान श्री देवनारायण की शोभा यात्रा निकाली :: प्रातः काल से ही भगवान श्री देवनारायण की शोभा यात्रा ग्राम पढ़ाना से प्रारंभ होती हुई संपूर्ण ग्राम में भ्रमण करते हुए देवझरी मंदिर प्रांगण में पहुंचती है शोभा यात्रा में आकर्षक झांकियां, घोड़े, ढोल बाजे के साथ आतिशबाजी करते हुए भक्तो के साथ मंदिर पहुंची जहां शोभा यात्रा का स्वागत मुख्य पुजारी कैलाश राठौर एवं मंदिर समिति के द्वारा किया गया मंदिर की अति प्राचीन परंपरा अनुसार मक्के की राबड़ी का भोग महाप्रसाद के रूप में भक्तो को वितरण किया गया ।

  • 🚩 ध्वजा चढ़ाई :: दोपहर के समय भगवान देवनारायण की प्रतिमा के सामने ध्वजा चढ़ाई गई , उसके बाद भगवान देवनारायण की आरती कर प्रसाद वितरण की गई इस दौरान बड़ी संख्या में लोग दर्शन आरती करने पहुंचे| मुख्य पुजारी से चर्चा के दौरान बताया की प्रत्येक शनिवार के दिन साईटका पथरी से सम्बन्धित रोगो का उपचार भी श्री भुणा जी की कृपा से किया जाता है

🚩 भगवान देवनारायण के जन्मोत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व :: भगवान देवनारायण के जन्मोत्सव का धार्मिक महत्त्व तो है ही, साथ ही यह आयोजन सांस्कृतिक रूप से भी अत्यधिक समृद्ध है। विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम, जैसे लोक नृत्य, लोक संगीत, और राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा और हस्तकला का प्रदर्शन इस आयोजन का अभिन्न हिस्सा होते हैं। यह अवसर न केवल भक्ति का, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रसार का भी प्रतीक है।

🚩सामाजिक एकता का प्रतीक ::  भगवान श्री देवनारायण का जन्मोत्सव सामाजिक समरसता और एकता का भी सजीव उदाहरण है। इस अवसर पर विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग एकत्र होकर धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेते हैं। यह आयोजन सामाजिक भेदभाव को मिटाने और आपसी प्रेम, भाईचारे और सहिष्णुता को बढ़ावा देने का कार्य करता है। 

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