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क्या परिवार में नित्य कलह हो रहा है..? जानिए किस आसुरी शक्ति के कारण हो रहा है परिवार में कलह ओर इस कलह से बचना है तो करें यह काम

🚩 गोमाता सतोगुण की देवी है और भैंस तमोगुण रूपी आसुरी शक्ति - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। भारत के स्वतंत्रता के संघर्ष में नारी शक्ति का विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अंग्रेजों से लड़ने में सहयोग किया। इन बहादुर महिलाओं में क्रांतिकारी दुर्गावती भी शामिल हैं, जिन्हें सभी दुर्गा भाभी और भारत की ‘आयरन लेडी’ के नाम से जानते हैं। दुर्गा भाभी स्वतंत्रता सेनानियों के कंधे से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई लड़ती रहीं। वह अंग्रेजों से लोहा लेने जा रहे देश के सपूतों को टीका लगाकर विजय पथ पर भी भेजती थीं। दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर, 1907 को उत्तर प्रदेश के शहजादपुर ग्राम अब कौशाम्बी जिला में पंडित बांके बिहारी के यहां हुआ। इनके पिता इलाहाबाद कलेक्ट्रेट में नाजिर थे। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 182 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

🚩 नवरात्रि विशेष आवड़ माता की कथा :: पूज्य स्वामीजी ने आवड़ माता, जिन्हें तनोट माता के नाम से भी जाना जाता है के बारे में बताया कि हिंगलाज माता ने स्वप्न में मामड़िया चारण से पूछा था कि उन्हें पुत्र चाहिए या पुत्री तो मामड जी ने मान से कहां कि मां आप ही घर में जन्म ले और हींगलाज माता की कृपा मामड़ के घर सात पुत्रियां जिसमें से एक पुत्री का नाम आवड़ माता था.। पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय भारतीय सैनिकों की रक्षा करने के कारण तनोट माता को सैनिकों की देवी भी कहा जाता है । आवड़ माता को स्वांगिया माता, तनोट माता, और श्री भादरिया राय जैसे नामों से भी जाना जाता है. राजस्थान के जैसलमेर में जन्मीं आवड़ माता को भाटी राजवंश ने अपनी कुलदेवी माना था. भाटी राजवंश की गौरवगाथाओं से जुड़ी कई चमत्कारी घटनाओं के बारे में पूज्य स्वामीजी ने बताया ।

🚩 पूज्य स्वामीजी ने गोमाता की जगह भैंस वालों को सन्देश दिया कि गोमाता सतोगुण की देवी है और भैंस तमोगुण रूपी आसुरी है अर्थात भैंस असुरकुल की होती है और उसका दूध,दही,घी खाने से आलस्य(प्रमाद ) उत्पन्न होता है। क्योंकि उसमें प्रेम, वात्सल्य जैसी कोई चीज़ नही होती है और जिसने अपने घर में भेंस बांधी है वे अपने घर में एक असुर का पालन कर रहें है ,जिससे अपने परिवारजनों की प्रवृत्तियां भी राक्षसों जैसी होती जा रहीं है और परिवारों में नित्य कलह हो रहा है और इस कलह से बचने एवं   भवसागर से वैतरणी पार करने वाली भगवती गोमाता की हमें निष्काम भाव से गोसेवा करनी होगी ।

आगामी कार्यक्रम गो नवरात्रि महामहोत्सव :: पूज्य स्वामीजी ने आगामी 10 अक्टूबर को होने वाली करणी माता के प्रकट उत्सव एवं उसी दिन कथा के बाद गो अभयारण्य में दीपावली के दूसरे दिन से होने वाले गो नवरात्रि महामहोत्सव के निमित्त एक बड़ी बैठक रखी है जिसमें अभयारण्य संचालन मंडल , श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के मध्यप्रदेश के न्यासी, क्षेत्र के सभी गायत्री परिवार के परिजन, गौसेवा भारती इन्दौर के कार्यकर्ता एवं अभयारण्य से जुड़े क्षेत्र के सभी गो प्रेमी व गोपाल परिवार के सदस्यों की बैठक की जानकारी पूज्य महाराज जी ने दी ।

अतिथि:: शजापुर जिले के मोहना से बृजमोहन श्रीमती शशि माहेश्वरी, श्रीमती रेखा रांका(जैन), कैलाश सेन एवं लखन वैरागी व जितेन्द्र राजपूत घोसली कानड अतिथि उपस्थित रहें ।

182 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  मधयप्रदेश के  आगर मालवा जिले से ::   एक वर्षीय गोकृपा कथा के 182वें दिवस पर  मधयप्रदेश के आगर  जिले  की सुसनेर तहसील के गणेशपुरा ग्राम से भेरू लाल शर्मा,,अखिलेश शर्मा, नारायण माली, गणेश माली,एवं दीपक शर्मा आदि ने अपने परिवर  की और से सम्पूर्ण  देश, राज्य एवं ग्राम, नगर  के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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