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यह हमारे धर्म का स्वरूप है ओर हमारी संस्कृति इनकी कृपा के कारण जिंदा है : जानिए हमारे धर्म का स्वरूप कौन है और किन के कारण हमारी संस्कृति जिंदा है

🚩 बीमार दुर्घटनाग्रस्त गोवंश की सेवा ही हमारा परम धर्म है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। धर्म का स्वरूप नंदी बाबा है। नंदी महाराज की कृपा से ही हमारी संस्कृति जिंदा है। भगवान की कृपा है हम पर की हमे गौमाता का सत्संग मिल रहा है। जिनमें ऐश्वर्य है वह सभी भगवान है और गोमाता ऐश्वर्यवान है। गोमाता की सेवा से हमे आनंद प्राप्त होगा है। गोमाता हमें संकट से भी बचाती है। कलयुग में ऐसे कई उदाहरण है जब भक्त पर संकट आए है तब गोमाता ने रक्षा की है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 190 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज ने सम्बोधित करते हुवे कही।

🚩सतगुण से बड़ा लाभ है तमोगुण ओर रजोगुण से हानि होती है। भगवान श्री कृष्ण महाभारत के रंगागण में गीता जी का उपदेश देते हुए अर्जुन से कहते है कि सतोगुण से ज्ञान, रजोगुण से आलस्य तथा तमोगुण से लोभ पैदा होता है। गोमाता का हरण बहुत बड़ा अपराध है। स्कंद पुराण में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है। जैसा कर्म करेंगे भगवान वैसा ही फल देते है। यदि कोई व्यक्ति भक्ति करता है और उसके कर्म ठीक नहीं है तो उसे पुण्य की प्राप्ति नहीं हो सकती है।

गो एंबुलेंस का शुभारंभ:: गोरक्षा कमांडो फोर्स रामगंजमंडी की टीम द्वारा दुर्घटनाग्रस्त, बीमार गौमाताओं की त्वरित सेवा के लिए गो एंबुलेंस का निर्माण किया। आज 190 दिन की कथा में इस नई एम्बुलेंस का संतो एवं गोभक्तो की उपस्थिति में पूजा अर्चना कर शुभारंभ किया गया। एम्बुलेंस की पूजा आचार्य किरण पंडित जी द्वारा करवाई गई। इस मौके पर महाराज जी ने कहा कि आए दिन तेज गति से चल रहे वाहनों की चपेट में आकर बड़ी संख्या में गोवंश काल का ग्रास बन रहे है। हमें बीमार दुर्घटनाग्रस्त गोवंश की सेवा में लग चाहिए। रामगंज मंडी के युवाओं द्वारा आज गो एंबुलेंस इस कार्य में समर्पित की। वास्तव में बीमार दुर्घटनाग्रस्त गोवंश की सेवा हमारा सबसे बड़ा धर्म है।

⏩ 190 वे दिवस पर चुनरी यात्रा गो रक्षा कमांडो फोर्स, रामगंजमंडी से ::  गोभक्त प्रहलाद जी राठौर, बालचंद जी गुरु जी, पवन जी, राजू जी, अशोक सहित कई गोभक्त गोमाता की खुशहाली एवं जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ गोमाता के लिए कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं ,गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन, गो पुष्टि यज्ञ करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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