एक राष्ट्र के लिए, एक धर्म के लिए, एक समाज के लिए और एक माता पिता की सेवा के लिए : हम दो हमारे एक, यह इरादा नहीं है नेक – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज एकादशी, द्वादशी एवं त्रयोदशी एक साथ है और इसको त्रि स्पर्शी योग कहते हैं इसकी महिमा शिवजी ने स्कंध पुराण में बता रहें हैं कि कि इस एकादशी के व्रत से ब्रह्म हत्या जैसा पाप भी नष्ट हो जाता है और प्रयाग और द्वारका में मृत्यु होने पर जो गति मिलती है , वही इस एकादशी का व्रत करने से मिलती है और हजार अश्वमेध यज्ञ एवं सो वाजपेई का पुण्य मिलता है वही पुण्य इस एकादशी के व्रत से मिलता है अर्थात आज की त्रि स्पर्शी एकादशी बहुत ही फल दायिनी है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 189 वें दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने कही।
🚩 पूज्य स्वामीजी ने मां करणी जी की चरित्र कथा बताते हुए कहां कि है करणी माता का जन्म 20 सितंबर, 1378 को जोधपुर के मेहाजी और देवल देवी के घर हुआ था. उनका बचपन का नाम रिघुबाई था. उनकी शादी साठिका गांव के किपोजी चारण से हुई थी. शादी के बाद उनका मन सांसारिक जीवन से ऊब गया और उन्होंने किपोजी चारण की शादी अपनी छोटी बहन गुलाब से करा दी. जनकल्याण के लिए उनके द्वारा अनेक अलौकिक कार्य करने और चमत्कारिक शक्तियों के कारण रिघुबाई को करणी माता के नाम से जाना जाने लगा । करणी माता को मां दुर्गा का ही स्वरूप माना जाता है । करणी माता का मन्दिर बीकानेर के पास देशनोक में है, मंदिर में करीब 25 हज़ार चूहे हैं. इन्हें माता की संतान माना जाता है ।
🚩 स्वामीजी ने भारत में निरंतर घट रही हिंदुओ की जनसंख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि एक षड्यंत्र के तहत जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर भारत में सनातन को कमजोर करने का षड्यंत्र चल रह है , हम दो हमारे एक के नाम से हम कमजोर होते जा रहें है और एक टीवी चैनल ने कुछ समय पूर्व बताया था कि भारत में हिन्दुओं की संख्या निरंतर घट रही है वही मुस्लिमों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है जो भारतीय संस्कृति के लिए बहुत घातक है अर्थात हम दो हमारे एक, यह इरादा नहीं है नेक दिखने में तो यह अच्छा लगता है,क्योंकि किसी भी देश की संस्कृति वहां की जाति और धर्म के आधार पर बनी हुई है और जब दूसरे लोगों की जनसंख्या बढ़नी शुरू होगी तो वहां की संस्कृति,संस्कार एवं परंपरा सब लोप हो जाती है और भारत की संस्कृति तो सबसे खूबसूरत और आनन्द देने वाली संस्कृति है सर्वे भवन्तु सुखिन विश्व बंधुत्व की बात केवल भारत ही करता है और पुण्य भूमि भारत में तो हमें चार पुत्रों का सूत्र दिया है, रामजी चार। भाई थे , चार वेद ,चार आश्रम,चार पुरुषार्थ एवं चार वर्ण के आधार पर भारत के प्रत्येक सनातनी के चार संतान होनी चाहिए । जिसमें से एक राष्ट्र के लिए एक धर्म के लिए एक समाज के लिए और एक माता पिता की सेवा के लिए लेकिन हम दो हमारे एक से राष्ट्र,धर्म, समाज एवं माता पिता की सेवा के कुछ नही मिलता है इसलिए भारतीय संस्कृति को बचाना है तो एक देश एक कानून की आवश्यकता है और जब जब देश में यह कानून नहीं बन जाता तब तक जब उन्हें 14 पैदा करने की छूट है तो हिन्दू को भी कम से कम चार तो पैदा करना ही होगा ।

⏩ अतिथि:: गो कृपा कथा के 189 वें दिवस पर राजस्थान की मेवाड़ धरा पर स्थापित सांवरिया धाम मुंगाना के पूज्य महन्त स्वामी अनुजदास जी महाराज, ज्योतिषाचार्य इंद्रराज चौधरी, जगदीश दास महाराज,ओम प्रकाश, हेमन्त कुमार एवं उज्जैन जिले की माकडोन तहसील के डाबड़ा राजपूत से बलराम सिंह परिहार,दलपत सिंह चौहान,प्रताप सिंह चौहान, लालजी राम सरपंच डाबड़ा राजपूत, प्रह्लाद सिंह सोलंकी, सरदार सिंह एवं किशोर सिंह आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ स्थानीय किंवदंतियों और लोककथाओं में करणी माता के चमत्कारों की कहानियाँ सुनाई जाती हैं। सबसे प्रसिद्ध कहानी बताती है कि कैसे करणी माता ने अपने डूबे हुए सौतेले बेटे लक्ष्मण को पुनर्जीवित करने के लिए मृत्यु के देवता यम से बातचीत की। यम ने उनकी बात मान ली और लक्ष्मण की आत्मा को चूहे के रूप में पुनर्जन्म लेने की अनुमति दे दी।
⏩ 189 वे दिवस पर चुनरी यात्रा भगवान पशुपति नाथ के धाम नेपाल की ओर से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 189 वें दिवस पर भगवान पशुपति नाथ की पुण्यधरा नेपाल से गोपाल बोहरा,श्रीमती सुषमा बोहरा ने अपने परिवार सहित सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



