अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

महर्षि वाल्मिकी जी को हिन्दू धर्म में श्रेष्ठ गुरु माना गया है , मीरा एक नारी नहीं , बल्कि एक विचार है। – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज महर्षि वाल्मीकि का जन्मदिवस है , महर्षि वाल्मिकी को हिन्दू धर्म में श्रेष्ठ गुरु माना गया है, महर्षि वाल्मीकि का जन्म त्रेता युग में आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हुआ था । उनका जन्म प्रचेता नाम के एक ब्राह्मण के पुत्र के रूप में हुआ था. उनका नाम रत्नाकर था और वे डाकू थे. एक दिन उन्होंने वन में देवर्षि नारद मुनि को लूटने की कोशिश की. नारद मुनि ने उन्हें भगवान राम का उल्टा नाम मरा-मरा जपने का उपदेश दिया । वाल्मिकी जी को आदि कवि माना जाता है । उन्होंने भगवान राम की जीवनी लिखी, जिसे रामायण कहा जाता है. रामायण में 24,000 श्लोक और सात कांड हैं । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 192 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने कही।

🚩 पूज्य स्वामीजी ने भक्तिमति मां मीरां बाई के प्रगटोत्सव के बारे में बताते हुए कहां कि मीरां एक नारी नहीं बल्कि एक विचार है । मीराबाई का जन्म जोधपुर के चोकड़ी गांव में हुआ था. उनका जन्म वि सं 1555 के आस-पास हुआ था. मीराबाई, राठौड़ राजा राव जोधा जी के पुत्र राव दूदा जी की पौत्री और रत्नसिंह जी की पुत्री थीं. मीराबाई को बचपन से ही श्रीकृष्ण से प्रेम था. मीराबाई का विवाह मेवाड़ के सिसोदिया राज परिवार में हुआ था. उनके पति का नाम चित्तौड़गढ़ के महाराजा भोजराज थे विवाह के कुछ ही दिनों बाद उनके पति का निधन हो गया था । मीराबाई मंदिरों में जाकर कृष्ण की मूर्ति के आगे नाचती रहती थीं. मीराबाई ने अपने जीवन के अंतिम कुछ साल गुजरात के द्वारका में गुज़ारे. और वर्ष 1547 में द्वारका में कृष्ण भक्ति करते-करते मीराबाई श्रीकृष्ण की मूर्ति में समा गई थीं ।

🚩 मीरा बाई के प्रागटोत्सव की पूर्व संध्या पर ग्वाल सन्त स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती की सन्निधि में स्थानीय कलाकारों द्वारा भगवान कृष्ण एवं भगवती मीरां बाई के भजनों की प्रस्तुति के साथ शरदोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न हुआ और आज दिन की गो कृपा कथा में मां मीरा बाई के भाव पिता देवजी जागरवाल के परिवार के साथ सभी गो भक्तो ने मां मीरा बाई का जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया और आज रात्रि 08 बजे से श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संस्थापक परम श्रद्धेय गो ऋषि पूज्य स्वामी दत्तशणानंद जी महाराज की सन्निधि में भजन सम्राट स्वर्गीय विनोद जी अग्रवाल के शिष्य प्रसिद्ध भजन गायक कलाकार महावीर जी शर्मा द्वारा शरदोत्सव पर सुन्दर भजनामृत कार्यक्रम होगा ।

अतिथि:: गो कृपा कथा के 192 वें दिवस पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के वरिष्ठ न्यासी एवं मां मीरा जी के भाव पिता देवाराम जागरवाल कैलाश नगर अपने परिवार के साथ एवं रासबिहारी गोशाला ढाकनी से नारायण सिंह सिसोदिया,कृपाल सिंह चौहान व श्री सांवरिया गो शाला संचालक जगदीश दांगी एवं भोपाल सिंह बालोतरा हालमुकाम तेलंगाना आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

192 वे दिवस पर चुनरी यात्रा पर राजस्थान  एवं मध्यप्रदेश से  :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 192 वें दिवस पर राजस्थान के झालवाड़ जिले की पिडावा तहसील के लक्ष्मीपुरा के सम्पूर्ण ग्राम वासियों एवं मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के सोयत कलां से   गोपाल सिंह चंद्रावत परिवार ने अपने परिवार सहित अपने ग्राम ,नगर,राज्य एवं देश के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!