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गो हमारे जीवन में थी तब तक हम विश्व के सिरमौर थे और जैसे जैसे गो हमारे घर से निकली हमारी सामाजिक व्यवस्था बिगड़ने लगी – गौतम खट्टर संस्थापक, सनातन महासंघ

जनमत जागरण @ सुसनेर। दुनिया का कोई मुसलमान किसी मस्जिद में जाता है तो वह जींस, टी शर्ट जैसे अमर्यादित वस्त्र पहन कर नहीं जाता लेकिन हम अपने मंदिर में कैसे कैसे वस्त्र पहन कर जाते है जिन्हें कोई सभ्य व्यक्ति देखे तो शर्म महसूस होती है। मंदिरों में ऐसे वस्त्र पहन कर प्रवेश नहीं करे ऐसा बोर्ड लगाना पड़ रहा है। दुनिया को खाने रहने पहनने का ज्ञान देने वाली संस्कृति आज कहा जा रही है। गौमाता के गौमूत्र से असाध्य रोगों का निदान होता है। हमारे शास्त्रों में यह बात लिखी है लेकिन आज का विज्ञान इस बात को मान रहा है। कई रिसर्चों के माध्यम से यह बात सिद्ध हो चुकी है।सनातन धर्म की रक्षा किराए के लोगो से नहीं होगी। यह कार्य भावना से जुड़े लोगों का काम है।पहले पांच शाला पाठशाला गोशाला,पाक शाला, यज्ञशाला एवं व्यायाम शाला हुआ करती थी । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 214 वें दिवस पर सनातन महासंघ के संस्थापक एवं यूट्यूब चैनल में अपनी पहचान बना चुके ओजस्वी वक्ता गौतम खट्टर ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कही।

🚩 गौशाला – गौ हमारे जीवन में थी तब तक हम विश्व के सिरमौर थे। जैसे जैसे गो हमारे घर से निकली हमारी सामाजिक व्यवस्था बिगड़ने लगी। हमारी पाकशाला में पहले रोटी गोमाता के लिए निकालते है। गो को रोटी खिलाने वाले ओर गो के साथ रोटी खाने वाले भाई कैसे हो सकते है। गौमाता को सिर्फ सनातनी ही बचाएगा। हम तभी बचेंगे जब जातिवादी विचारधारा को छोड़ कर एक होंगे। यदि एक नहीं हुवे तो न हम बचेंगे और न ही हमारी संस्कृति बचेगी। हमें अपने परिवार को बचाना है, अपने व्यापार को बचाना है और सनातन धर्म से जुड़े सभी वर्गों को गले लगाना है।

⏩ 214 वें दिवस पर श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेडा के थानापति पूज्य रविद्रानंद सरस्वती एवं रामानुजकोट उज्जैन के पूज्य संत रंगनाथाचार्य जी महाराज का आशीर्वचन मिला । गोनवरात्रि के सप्तम दिवस पर आयोजित विप्र सम्मेलन में पंडित मोहन लाल जी सभाध्यक्ष श्री कयावर्णेश्वर एवं वेद विद्यापीठ अध्यक्ष, पंडित मांगी लाल व्यास,पंडित गंगाराम व्यास, पंडित विशाल पिड़ावा एवं पंडित किरण कृष्ण एवं गोपुष्टी यज्ञाचार्य पंडित राहुल जी सहित सभी वक्ताओं ने गोमाता एवं ब्राह्मण दोनो को एक दूसरे का पूरक बताया और कहां कि गाय के बिना ब्राह्मण नहीं रह सकता । क्योंकि गाय के पंच गव्य प्रासंग से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते है ।

घर के सारे वास्तु दोष स्वतः ही नष्ट हो जाते है :: आचार्य पंडित मोहन लाल जी ने बताया कि ब्राह्मण बालक धीरे धीरे अपने ब्राह्मण की पहचान को खोते जा रहें और इसका मूल कारण ब्राह्मण का गोमाता से दूर होना है इसलिए हमें पुनः गाय की ओर लौटना होगा और हम जहां भी अनुष्ठान कर्मकाण्ड करें वहां पर केवल गो गव्यो का ही उपयोग करें तब ही हमारा अनुष्ठान सफल हो सकता है और जिस घर में हम कोई भी अनुष्ठान करें तो पहले गो पूजन से कार्य प्रारंभ करें तो उस घर के सारे वास्तु दोष स्वतः ही नष्ट हो जाते है अन्त में स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज ने गोमाता की छवि देकर सभी को सम्मानित किया ।

⏩ 214 वे दिवस पर चुनरीयात्रा राजस्थान एवं  मध्यप्रदेश से ::  एक वर्षीय गोकृपा कथा के 214वें दिवस पर चुनरी यात्रा  विप्र सम्मेलन में पधारे सभी विद्वानों एवं राजस्थान के कोटा एवं चुरू जिले के गो भक्त एवं मध्यप्रदेश राजधानी भोपाल से श्रीमती आभा  चौहान पूर्व आईएएस की पत्नी व नीमच जिले से पूज्य लक्षानंद जी के शिष्यों खजूरी सरपंच प्रहलाद पाटीदार एवं जगदीश पाटीदार अलहेड की ओर से  सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  56 भोग एवं चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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