गायमाता हमारी मां है जब तक यह भाव नहीं आएगा तब तक हम गो प्रेमी नहीं हो सकते- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस पर हम सभी से आग्रह करते कि आप किसी विशेष गोमाता को अपनी गोमाता समझने की भूल मत कीजिए। क्योंकि किसी निश्चित गोमाता से प्रेम करके आप मोह में बंध रहें है वह प्रेम नहीं हो सकता क्योंकि प्रेम विराट होता है और मोह लघु होता है ,इसलिए हमें विराटता की और बढ़ना होगा क्योंकि भगवान विराट है और हमारा अन्तिम लक्ष्य भगवान को पाना है और परमात्मा को पाना है तो गो के करीब आना होगा और भगवती गोमाता भी कहती है कि हमारे पास आइये यह एक गोमाता की बात नहीं सम्पूर्ण विश्व की गोमाता की बात है । गायमाता हमारी माता है और जब तक यह भाव नहीं आएगा तब तक हम गो प्रेमी नहीं हो सकते और हम पर गो कृपा नहीं होगी ओर हम गो की शरण में नही जा सकते । सड़क की गोमाता,गौशालाओं की गोमाता यह सभी हमारी गोमाता है ,तभी हम सहिष्णु कहलाएंगे । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 222 वे दिवस पर स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने कही
✒️स्वामीजी ने कहां कि आज प्रेस दिवस भी है और भारत के सभी प्रेस मालिकों से आग्रह है कि वे ऐसे कोई समाचार नहीं छापे जिससे देश को नुकसान हो या देश को झुकना पड़े ।
⏩ आज ऊदा देवी भारतीय वीरांगना का बलिदान दिवस भी है जिन्होंने १६ नवम्बर १८५७ को 36 अंग्रेज़ सैनिकों को मौत के घाट उतारकर वीरगति को प्राप्त हुई थीं। स्वामीजी ने आगे बताया कि गौ से प्रेम करने वाला सच्चा गोभक्त नहीं हो सकता क्योंकि गौ शब्द एक वचन है और वह केवल एक गोमाता के लिए ही है जबकि गो का मतलब अनेकों गोमाता है और गो से प्रेम करने वाला सम्पूर्ण परिपूर्ण हो जाता है । यानि एक गोमाता ही हमारी माता नहीं है सम्पूर्ण विश्व की गोमाता हमारी गायमाता है। इसलिए सबसे पहले तो हमें गो प्रेमी बनना है या गौ प्रेमी। और गौ प्रेमी बनना है तो वहां कुछ स्वार्थ है,मैरी अपनी गाय , मैरी गोशाला की गाय, मेरे घर की गाय ,मेरे गांव की गाय । अर्थात विश्व के किसी भी कौने की गोमाता को हम हमारी गोमाता नहीं समझेंगे तब तक हमारा गो प्रेम अधूरा है और जिस दिन हम सब गोमाताओं को अपना नहीं समझेंगे और गायमाता हमारी मां है यह जब तक हमारे मन में नहीं आएगा तब तक गोमाता हमें शरण में नहीं लेगी ।

⏩ 222 वे दिवस पर कुबेरराज गो सेवा संगठन के प्रदेश संयोजक श्री शेखर कुमार भमोरिया पोलाय कलां (उज्जैन), पवन सोनी(संघ के स्वयंसेवक) छापरियां, ओम प्रकाश सोनी बीना गंज, महेन्द्र सोनी चाचौड़ा एवं रवि सोनी चाचौड़ा आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ 222 वे दिवस पर चुनरीयात्रा राजस्थान से ::
एक वर्षीय गोकृपा कथा के 222 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के उदयपुर से मनीष जोशी ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



