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जगतगुरु श्री वल्लभाचार्य जी के वंशज श्री वत्सल बाबा मुम्बई का 20 नवम्बर को गो अभयारण्य में पदार्पण

जनमत जागरण @ सुसनेर:: राष्ट्रीय नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के पांचवें दिवस पर नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए भगवती गोमाता की भूमिका के बारे में बताते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने कहां कि बालक जब छोटा होता है तब कई तरह के बाल दोष उसे बालक को ग्रसित कर लेते हैं जैसे बालक के जन्म के छठे दिन फटकारी नामक ग्राही बालक को ग्रस्त लेती है जिसमें बालक अधिक रुदन करता है तथा दूध नहीं पीता है इस प्रकार सातवें दिन मुक्त केसी नाम की ग्रह ही शिशु को ग्रस्त लेती है जिसमें बालक अधिक अर्थ हो जाता है तथा उसके तन से दुर्गंध आती है ऐसे कई प्रकार के दोष बालक को ग्रसित करते हैं और गौ माता जी के गोबर के कंडे की धूप देने से कई तरह के बाल दोष अथवा बल ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैंक्योंकि भगवती गौ माता सारे जगत की मां है एवं समस्त प्रकार के दुखों का निवारण भगवती गौ माता की कृपा से हो सकता है परम पूज्य गुरुदेव भगवान ने कथा में गोबर एवं गो मूत्र की की महिमा भी श्रोताओं को बताइए गोमूत्र में साक्षात मां गंगा जी का निवास हैसाथ ही आज की कथा में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जी का अवतरण उत्सव मनाया गया परम पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई स्वयं शक्ति का अवतार थे इसी कारण करने के पश्चात भी महान कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी ने अपनी सुप्रसिद्ध कविता में लिखा बुंदेले हर बोल के मुख हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी स्वामीजी ने बताया कि विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में आगामी 20 नवम्बर 2024 बुधवार को जगतगुरु श्री वल्लभाचार्य जी के वंशज श्री वत्सल बाबा जी मुंबई वाले अपने अनुयायियों के साथ गो अभयारण्य पधार रहें है ।

⏩ 225 वे दिवस पर सागुसिंह जी गांव सरोद जिला झालावाड़,वल्लभजी पाटीदार गांव सिरावत ,रामकिशन सूबेदार जी खोडियार खेड़ी जिला झालावाड़ आदि अतिथि उपस्थित रहें.आज कथा मे सरस्वती शिशु मंदिर पटपड़ा के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे ।

225 वे दिवस पर चुनरी यात्रा 9 पाली जिले के हमीरवास से श्री गुलाब सिंह जीअपने परिवार की और से :: सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया ।

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