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ठगी का दस्तावेज़ी साम्राज्य : “फर्जी बाबू के झूठे वादे – सपनों की कीमत ठगी से अदा” – न्यायालय ने ठग को 10 साल की सजा 11 हजार जुर्माने से किया दण्डित

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन : हर युवा सरकारी नौकरी की चाहत रखता है, लेकिन जब यह चाहत फर्जी बाबू के चंगुल में फंस जाए, तो परिणाम ठगी और पछतावे के अलावा कुछ नहीं होता। एक ठग ने अपनी ठगी की कला से यह दिखा दिया कि कैसे एक चालाक दिमाग और झूठे वादों से भरोसे को बेचा जा सकता है। फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर ठग ने सरकारी नौकरी के नाम पर युवाओं से नकद और बैंक के माध्यम से मोटी रकम बटोरी। मगर, सच छिप नहीं सका। कोर्ट ने ठग को कठोर सजा देते हुए यह संदेश दिया कि झूठ के पुल ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकते।

👉 ऐसा ही एक मामला 2019 में सामने आया था , जहां उज्जैन के 65 वर्षीय विजय शर्मा ने अपनी जुबान और झूठे दस्तावेज़ों के दम पर दर्जन भर से अधिक युवाओं को ठग लिया। ठगी का शिकार हुए युवकों की शिकायत पर दर्ज प्रकरण पर मंगलवार को अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश श्रीमान पंकज कुमार वर्मा ने फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को 10 साल कारावास और कुल 11000 रूपयें जुर्माने से दण्डित किया है। 

सपनों की बोली, फर्जी बाबू की झोली : विजय शर्मा ने खुद को ‘कमिश्नर का बाबू’ बताकर बेरोजगार युवाओं को शासकीय नौकरी का प्रलोभन दिया। झूठे बाबू के बड़े सपने, हकीकत के छोटे दाम बेरोजगारी की मजबूरी को भुनाते हुए विजय शर्मा ने फर्जी दस्तावेज़ों और नियुक्ति पत्रों का जाल बुना। उसने खुद को सरकारी विभाग का बड़ा अधिकारी बताया और भोले-भाले युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे रकम ऐंठ ली। उसने नकद राशि और बैंक खातों के जरिए लाखों रुपये ऐंठे और फर्जी नियुक्ति पत्रों के माध्यम से भरोसे का ऐसा पुल बनाया जो जल्द ही ढह गया।

यह है पूरा मामला:: शासकीय अधिवक्ता अतिरिक्त लोक अभियोजक मुकेश जैन चौधरी ने बताया कि अभियुक्त विजय शर्मा पिता हेमराज शर्मा उम्र 65 साल निवासी 272/2 तिरूपति एवेन्यू नक्षत्र होटल के पास मक्सी रोड उज्जैन ने दिनांक 15/4/19 से 30/5/19 की समयावधि के मध्य ग्राम मोडी तहसील सुसनेर निवासी पीडितगण को कमिश्नर का बाबू होना निरूपित कर नौकरी का प्रलोभन देकर कुछ राशि नकद व कुछ राशि अपने बैंक खाता में जमा करवा कर कपटपूर्वक फर्जी रूप से विभिन्न विभागों के अलग अलग दिनांक के नियुक्ति पत्र अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर युक्त दस्तावेज स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए तैयार कर व कूट रचित दस्तावेज बेईमानी से असली दस्तावेज के रूप में उपयोग में लाया जाकर फर्जी नियुक्ति आदेश देकर छल किया।  मामले में मुख्य शिकायतकर्ता कमलकिशोर पाटीदार सहित अन्य 13 लोगो की शिकायत पर पुलिस थाना सुसनेर पर अपराध क्रमांक 82/20 पर धारा 419, 420, 467, 468, 471 भादवि के अंतर्गत पंजीबद्व कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। प्रकरण में विवेचना तत्कालीन उप निरिक्षक संजय सिंह राजपूत के द्वारा की गई।

धोखेबाज की सजा – समाज के लिए सबक : यह घटना समाज के लिए एक कड़वा सबक है। यह बताती है कि कैसे झूठे वादों और फर्जी कागज़ों का सहारा लेकर कोई व्यक्ति दूसरों के भविष्य से खेल सकता है। युवाओं को यह समझना होगा कि नौकरी पाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। “फर्जी बाबू से बचें, मेहनत के मार्ग पर चलें। सरकारी नौकरी सच्चे परिश्रम से मिलती है, न कि किसी ठग के झूठे वादों से।”

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