अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

गोमाता को मां मानकर उनकी सेवा करें सभी वैष्णव जन- पूज्यपाद गोस्वामी वत्सल बाबा

जनमत जागरण @ सुसनेर। एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 226 वें दिवस पर चल रहें राष्ट्रीय नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के छठे दिवस पर नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए भगवती गोमाता की भूमिका के बारे में बताते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने कहां कि अग्निपुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि नवजात बच्चे के सातवें महीने में निराहार ग्रही (वायरस) के प्रभाव के कारण बालक के दांतों में दर्द होता है उसके लिए गोमाता अंरडे कंडे में अजवायन, गूगल एवम् गो घृत की धूनी एवं उड़द की बली देकर उस दोष का निवारण किया जा सकता है ।
⏩ स्वामीजी ने कहां कि बलि का मतलब काले उड़द की बली ही है लेकिन मुगलों एवं अंग्रेजो की गुलामी ने बलि को पशु बलि बताकर सनातन को भ्रष्ट किया है । अजाबली का मतलब बकरा बलि माना गया है जबकि अजा का मतलब अहम एवं अभिमान का त्याग करना है न की पशु का प्राण लेना ।

⏩अतिथि के रूप में पधारे गुजरात के भुज अंजार से पधारे कथावाचक श्री धनेश्वर भाई शास्त्री ने अपने आशीर्वचन में बताया कि मालवा के लोग धन्य है जिन्हें पूरे ब्रह्माण्ड के रक्षक भगवान महाकाल एवं विश्व के प्रथम गो अभयारण्य के रूप में एक गोकुल रूपी तीर्थ पाया है और मैं भी आज इस तीर्थ में आकर गोधूलि रूपी साक्षात यमुना जी में स्नान करने का पुण्य प्राप्त किया है । शास्त्रीजी ने बताया कि पहले इस गो अभयारण्य की क्या स्थिति थी और अब भगवती गोमाता एवं संतो की कृपा से यह कैसा तीर्थ बन गया है।

  • एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महोत्सव के तहत चल रही एक वर्षीय गो कृपा कथा के 226 वें दिवस पर पधारे जगतगुरु श्री वल्लभाचार्य जी के वंशज श्री वत्सल बाबा मुंबई ने गो अभयारण्य की परिक्रमा ,गोपूजन कर पूज्यपाद गोस्वामी वत्सल बाबा जी का वैष्णव परिषद आगर मालवा ने गुड़ से तुलादान करवाया और अंत में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के राष्ट्रीय संयोजक एवं 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने उनका गोमय माला पहनाकर एवं भगवती गोमाता की छवि देकर स्वागत किया ।
    श्रोताओं को संबोधित करते हुए पूज्यपाद वत्सल बाबा ने कहां कि मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में बने इस विश्व के प्रथम गो अभयारण्य की गोमाताओं के दर्शन कर मैं साक्षात ब्रज मंडल के दर्शन करके धन्य हो गया हूं और जिस प्रकार भगवान कृष्ण के बाएं भी गाय, दांए भी गाय ,आगे भी गाय,पीछे भी गाय उसी प्रकार का दृश्य में आज इस अभ्यारण्य में देख रहा हूं और मैं आप सभी को विश्वास के साथ कह रहा हूं कि इस अभयारण्य में साक्षात गोविन्द भी बिराज रहें है ।
    बाबा ने बताया कि जब जब भी इस धरती पर पाप बढ़ता है तब तब भगवती गोमाता ही करुणा की प्रतिमूर्ति बनकर इस धरा के संकट हरने के लिए प्रभु के पास जाती है चाहे वह सतयुग हो चाहे त्रेता और द्वापर में तो साक्षात गोविन्द ही भगवती गोमाता की सेवार्थ इस धर्मभूमि पर ग्वाल बनकर आएं है । इस धरा पर एक मात्र गाय ही है जो अपनापन दिखाती है और गाय ही सबको अपना बनाती है लेकिन इस कलिकाल में भगवान कृष्ण की को अपना आराध्य मानने वाले अधिकतर वैष्णवजन गाय से दूर होते जा रहें है । जिस गोमाताजी को रसात्मक के स्वरूप ठाकुर जी ने सभी रसों के समूह रासलीला के रासमंडल में गोमाता को साथ रखकर अपना अंतरंग माना हो तो फिर हम ममता की प्रतिमूर्ति गोमाता से क्यों दूर हो रहें है । मैं देश विदेश में रह रहें सभी वैष्णवजनों से आह्वान करता हूं कि आप सभी गोमाता को मां मानकर उनकी मातृत्वभाव से सेवा करें ताकि गोमाता को दर दर की ठोकरें खानी न पड़े ।

226 वे दिवस पर अतिथि के रूप में सुसनेर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राधेश्याम पाटीदार उपस्थित रहें

226 वे दिवस पर चुनरी यात्रा वैष्णव परिषद आगर मालवा की ओर से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 226 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के वैष्णव परिषद शाखा आगर मालवा की और से रमेश अटल , प्रवीण मूंदड़ा , प्रदीप , पंकज अटल सरयू, बृजेश पालीवाल , राजेंद्र शर्मा , प्रमोद जोशी , बंशीधर पालीवाल , नटवर सुरजन, गोविंद शर्मा , मांगीलाल मेहरा, रामप्रसाद अटल , कैलाश भटनागर , ललित देसाई , श्याम सुंदर पालीवाल एवं सैंकड़ों वैष्णव जन मातृशक्ति एवं युवा अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी एवं 56 भोग लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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