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पुलिस की नाक तले चोरों का तांडव : व्यवस्था की नींव हिली, सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह ◾थाने के साये में दर्जनों चोरियां, पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की स्पाट लाइट रिपोर्ट :: “दिया तले अंधेरा”—यह कहावत सुसनेर थाने और उसके पुलिस प्रशासन पर पूरी तरह खरी उतरती है। थाना परिसर और एसडीओपी कार्यालय से महज 200-400 मीटर की दूरी पर चोरी की वारदातों का सिलसिला जारी है, लेकिन पुलिस अभी तक नींद से जागने को तैयार नहीं। दर्जनों शिकायतें, आवेदन और ज्ञापन पुलिस के दरवाजे खटखटा चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर। चोर न पकड़े गए, न चोरी की घटनाओं पर रोक लगी। यह स्पष्ट करता है कि सुरक्षा के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है।

थाने से चंद कदम दूर चोरों की सल्तनत, पुलिस नदारद :: मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि का वाकया पुलिस की कार्यक्षमता पर करारा तमाचा है। आस्था स्कूल के पास रहने वाले राकेश टेलर के मकान की छत पर चोर मंडराते रहे। आधी रात को छत का दरवाजा खोलने की कोशिश हुई तो घर के लोग जाग गए। राकेश ने तुरंत 100 डायल पर मदद मांगी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। वजह? “सुसनेर की 100 डायल खराब है!”

चोर आधे घंटे तक इलाके की छतों पर खुलेआम विचरण करते रहे :: लोगों ने डर के मारे घरों से बाहर निकलकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन चोर आराम से मौका पाकर भाग निकले। हाल यह था कि पुलिस से जवाबदेही मांगने के बजाय लोग खुद को ही संभालने में जुटे रहे। ऊपर से पुलिस का जवाब और भी चौंकाने वाला था—सोयत थाने से पौने 2 घंटे बाद कॉल आया, जिसमें बताया गया कि वाहन खराब है और रिपोर्ट सुबह थाने आकर दर्ज करवा दी जाए।

रहवासियों का डर ओर नाराजगी : डर के साये में जीने को मजबूर :: स्थानीय निवासी मुकेश टेलर ने नाराजगी जताते हुए कहा, “चोरियों की घटनाएं इतनी बढ़ गई हैं कि घर में भी सुरक्षित महसूस नहीं होता। न जाने कब चोर आ जाएं। पुलिस से भरोसा उठ चुका है।”

पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर जनाक्रोश ::पार्षद मीना पवन शर्मा ने रोष प्रकट करते हुए कहा, “पुलिस थाना और एसडीओपी कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के पास इतनी चोरियां हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस ने एक भी मामले का खुलासा नहीं किया। मैंने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर इन घटनाओं पर लगाम लगाने की मांग की थी, लेकिन हालात जस के तस हैं।”

वहीं, थाना प्रभारी केसर राजपूत का बयान हास्यास्पद और लापरवाही का प्रतीक था। उन्होंने कहा, "सुसनेर की 100 डायल खराब है। जिनके घर चोरी हुई है, वे थाने आकर घटना की जानकारी दें। हम समझने का प्रयास करेंगे।"

क्या जनता खुद ही संभाले सुरक्षा की जिम्मेदारी.? – यह घटना पुलिस प्रशासन की घोर विफलता का उदाहरण है। अगर थाने के साये में रहने वाले सुरक्षित नहीं हैं, तो बाकी क्षेत्र का क्या होगा? चोरी की घटनाओं को रोकने के बजाय पुलिस अपनी कमियों को ‘तकनीकी खराबी’ का जामा पहनाकर अपना पल्ला झाड़ रही है।

चोरों के हौसले दिन-ब-दिन बुलंद हो रहे हैं, और पुलिस प्रशासन अपने वाहन और साधनों के खराब होने की दुहाई देकर जनता को असुरक्षा के अंधे कुएं में धकेल रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अब जनता को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद ही उठानी होगी ..? पुलिस अपनी भूमिका निभाए और जनता के विश्वास को दोबारा जीतने का प्रयास करे।

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