“गोदान: समस्त दानों में सर्वश्रेष्ठ, गोवंश रक्षा का अद्वितीय संकल्प”

जनमत जागरण @ सुसनेर, आगर । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत शुरू किए गए ऐतिहासिक प्रयासों में सुसनेर के समीपस्थ ग्राम पंचायतों ननोरा, श्यामपुरा, सेमली और सालरिया में स्थित श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा विशेष स्थान रखता है। यहां श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के तत्वावधान में चल रहे एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 239वें दिवस पर पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने गोदान के महत्व और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।
⏩ राजेंद्र बाबू को स्मरण : इस विशेष अवसर पर स्वामी जी ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “राजेंद्र बाबू भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महानायक थे और भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कृषि और खाद्य मंत्री के रूप में भी भारत के किसानों और ग्रामीण जीवन के उत्थान में अहम भूमिका निभाई।”
⏩मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि :: स्वामी जी ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए कहा, “खेल जगत में मेजर ध्यानचंद का योगदान और उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी।”
⏩गोदान: सर्वश्रेष्ठ पुण्य :: कथा में स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने कहा, “समस्त दानों में गोदान सर्वश्रेष्ठ है।” उन्होंने रघुवंशी राजाओं के गोदान का उदाहरण देते हुए बताया कि गाय दान करने से सहस्त्र गोदान का पुण्य प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति सीधे गोसेवी ब्राह्मण को गाय दान नहीं कर सकता, तो गोशालाओं में दान करना भी उतना ही पुण्यकारी है, जहां गोमाताओं की मातृत्व भाव से सेवा होती है।
⏩चुनरी यात्रा का आयोजन :: 239वें दिवस पर बड़ा देहरिया ग्राम की महिलाओं ने गाजे-बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी यात्रा निकाली। भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाकर पूजन किया गया। पूजन के उपरांत श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा और गोसेवा का पुण्य अर्जित किया। कार्यक्रम के समापन पर गोव्रती महाप्रसाद का वितरण हुआ।
⏩गो पर्यावरण पदयात्रा: 12 वर्षों का पड़ावपूज्य स्वामी जी ने बताया कि भगवती गोमाता की महिमा जन-जन तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के 12 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। यह यात्रा भारत के गांव-गांव में गोमाता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है।
⏩ गोवंश संरक्षण में योगदान का आह्वान :: पूज्य महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे गोवंश संरक्षण के लिए अपने योगदान को सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा, “गोमाता केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारे जीवन और पर्यावरण का आधार हैं।” इस महामहोत्सव ने गोवंश संरक्षण के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के महत्व को भी पुनर्स्थापित करने का संदेश दिया।



