अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

“गाय से गो अभयारण्य तक: शिक्षा और संस्कृति का पुनर्जागरण” – “काऊ इज नॉट एनिमल: स्वदेशी विकास का संदेश”

जनमत जागरण@ सुसनेर । एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 246 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज के दिन मानव अधिकार दिवस (Human Rights Day) मनाया जाता है। यह दिन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) को अपनाया था।मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में इन अधिकारों के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ाना है।

⏩ ” नालंदा-तक्षशिला की ओर लौटने का मार्ग” :: स्वामीजी ने बताया कि अपनी भक्ति का उपयोग किसी को तोड़ने के लिए नहीं बल्कि जोड़ने के लिए करना चाहिए और उसकी शक्ति के लिए गोमाता की सेवा ही सबसे श्रेष्ठ माध्यम है क्योंकि भगवती गोमाता की पूछ में तो साक्षात धर्म निवास करते है इसलिए हम गाय को प्रिय लगे ऐसा हमारा कार्य होना चाहिए ताकि हमारा कल्याण हो सकें क्योंकि आत्मकल्याण के लिए पहले लोक कल्याण करना होता है ।

गोमाता के सान्निध्य में शिक्षा और संस्कृति का पुनर्जागरण : स्वामीजी ने अक्षपाद विद्यामंदिर के विद्यार्थियों के विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में आगमन को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जहां कई विद्यालय बच्चों को चिड़ियाघर में जानवर दिखाने ले जाते हैं, वहीं इन बच्चों ने गो अभयारण्य का अनुभव किया। यहां जूं भले न हों, लेकिन जीवन सुधारने के साधन जरूर मौजूद हैं, क्योंकि गाय हमारी मां है। यदि विद्यार्थी गोमाता के महत्व को समझ लें, तो हमारा देश फिर से नालंदा, तक्षशिला, और विक्रमशिला के स्वर्णिम युग की ओर लौट सकता है।

⏩ “काऊ इज नॉट एनिमल: स्वदेशी विकास का संदेश” :: स्वामीजी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जबसे बच्चों को यह सिखाया गया कि “काऊ इज यूजफुल एनिमल”, तब से भारत की तकनीकी और सांस्कृतिक उन्नति रुक सी गई है। भले ही हम कहते रहें कि भारत विकास कर रहा है, लेकिन हमारी अधिकतर वस्तुएं अब भी ‘मेड इन चाइना’ हैं। विकास का असली मतलब यह है कि हमारी आवश्यकताएं हमारे गांव में पूरी हों। उन्होंने कहा कि नालंदा और तक्षशिला के समय में गांव आत्मनिर्भर थे, क्योंकि गोमाता हर आवश्यकता की पूर्ति करती थीं।

⏩ “गोमाता के आशीर्वाद से आत्मनिर्भर भारत का सपना” :: स्वामीजी ने विद्यार्थियों की बुद्धिमत्ता और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों की प्रशंसा की, जैसे शून्य का आविष्कार और धरती से सूर्य की दूरी मापने की विधि। उन्होंने कहा कि भारत का असली विकास तभी संभव है जब गांव आत्मनिर्भर हों और शिक्षा को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ा जाए।

विशेष आयोजन:
विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में आगामी दिनों में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे:11 दिसंबर: गीता जयंती ,13 दिसंबर: दवा देवी फाउंडेशन का शुभारंभ ,15 दिसंबर: कल्पगुरु दत्तात्रेय भगवान का प्रकट उत्सव होगा । ये आयोजन भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की भावना को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

⏩ गो कृपा कथा के 246 वें दिवस पर पं रामनारायण छापेड़ा,विक्रम सिंह मोहन,धन सिंह, नन्द किशोर शर्मा, बने सिंह बाली गांव,मोतीलाल लोवंशी, भंवर लाल गुप्ता डोंगरगांव, सरपंच सिद्धनाथ कारपेंटर, गोविन्द सिंह झाला,,सज्जन सिंह एवं अक्षपाद विद्यामंदिर सुसनेर के प्राचार्य नरेन्द्र कुमार जोशी अपने सम्पूर्ण स्टाफ एवं बालक बालिकाओं के साथ अतिथि उपस्थित रहें ।

246 वे दिवस पर चुनरीयात्रा मध्यप्रदेश राजस्थान ओर से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 246 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील के मोहन गांव से ठाकुर धन सिंह की बहुरानी व चिरंजीव श्यामसुंदर की धर्मपत्नी राधाकुंवर के जन्म दिवस पर झालावाड़, झालरापाटन, बालीगांव, रायपुर, बकानी, डोंगरगांव,सोयत,पिड़ावा, नानौर,सुसनेर, केशरपुरा, लसुड़िया, काडीयाखेड़ी,गुमडी, जीरापुर व छापेड़ा के सेंकड़ों गौभक्तों एवं श्रीअक्षपाद विद्यामंदिर सुसनेर के बालक बालिकाएं प्राचार्य नरेन्द्र कुमार जोशी एवं संतोष गिरी, मनोहर राव, बने सिंह, बीना जोशी,प्रियांशी जोशी,दिव्यांशी जोशी, मीना तिवारी, छाया शर्मा,आरती सोनी,लाड शर्मा, श्वेता देशमुख, पूजा पाटीदार,संजू बाई राठौर,दीपक राव व शिवसिंह राजपूत आदि अध्यापक अध्यापिकाओं एवन राजस्थान के झालावाड़ जिले की पचपहाड़ तहसील के सागड़िया ग्राम के श्योदान सिंह,बालू सिंह अर्जुन सिंह,चेतन प्रकाश गोस्वामी, चन्द्र सिंह, पंडित राधेश्याम,आशीष गोस्वामी,प्रकाश बरवाड़ा ने सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!