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गाय और संस्कृति का टूटता रिश्ता : “क्या गो-संवर्धन ही हमारी संस्कृति का उद्धार करेगा?” जानिए जिम्मेदार कौन?”

"गौमाता: संस्कृति की नींव या मात्र प्रतीक?"

जब से हम गो से दूर हुए है तब से हम हमारी संस्कृति को विस्मृत करते जा रहें है स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज राष्ट्रकवि मैथिलीशरण जी का निर्वाण दिवस है,जो एक वैष्णव होने के साथ साथ एक सुधारवादी थे और उनकी बातों का लोहा तत्कालीन सभी क्रांतिकारी मानते थे आजादी के लिए उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से एक नई अलख जगाई थी और उनकी लिखी रामायण आज भी बड़े भाव से पढ़ी जाती है अर्थात जिस समय ब्रज भाषा का बोलबाला था उस समय खड़ी बोली में एक नया एवं अदभुत दिव्य काव्य भारत को दिया वही आज एक दिव्य पुरुष रामानंद जी सागर जिन्होंने भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व को टीवी सीरियल के माध्यम से रामायण दिखाकर जन जन के हृदय में राम जी को वापस बैठा दिया था रामायण के माध्यम से प्रभु राम को जन जन तक पहुंचाने वाले कवि मैथिलीशरण एवं रामानंद जी सागर को सादर श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 248 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

⏩ पूज्य महाराज जी ने बताया कि आज एक विशेष दिवस है आज ही के दिन भगवान विष्णु ने अपने 24 अवतारों में से प्रथम अवतार मत्स्य रूप में लेकर हवयग्रीव राक्षस जिसने ब्रह्मा जी से वेद पुराण चुरा कर धरती को वेद रहित कर दिया था जिसके कारण धरती में वेद रहित एवं वेद विरुद्ध कार्य होने लगे थे तब माघ माह की द्वादशी जिसे मत्स्य द्वादशी के नाम से जाना जाता था है भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में अवतार लेकर हवयग्रीव राक्षस से पुनः वेदपुराण वापस लेकर ब्रह्मा जी को लौटाएं थे लेकिन भारत के 99 प्रतिशत लोगों को भगवान के प्रथम अवतार कब हुआ था इसकी जानकारी नहीं है इसका मूल कारण जब से हम गो से दूर हुए है तब से हम हमारी संस्कृति त्यौहार उत्सवों को विस्मृत करते जा रहें है । अर्थात जिस मालवा में आज से 2081 वर्ष पहले उज्जैन के राजा विक्रमादित्य जी शकों को भारत से खदेड़ कर शक संवत् से विक्रम संवत्सर प्रारंभ किया था वहीं मालवा वासी आज विक्रम संवत की तिथियों को भूलकर अंग्रेजी तारीख याद रख रहें है जो बड़े दुःख की बात है ।

⏩ स्वामीजी ने गोपुच्छ एवं गोदान का महत्व बताते हुए गो पुच्छ की महिमा के बारे में बताते हुए कहां कि गाय माता का अनुशरण करके ही राजा भोज महान दानी एवं विद्वानों की श्रेणी में अपना नाम अमर कर गए और उनके ज्ञान की महिमा आज भी मुहावरों में कही न कही प्रयोग किया जाता है क्योंकि राजा भोज ने अपने ज्ञान एवं संपत्ति का उपयोग दूसरों के लिए किया है और हमारे धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में कहा भी है कि संसार की सम्पत्ति का उपयोग संसार के लिए ही होना चाहिए अर्थात हमें प्राप्त सुविधाएं,संसाधन, सम्पत्ति सब कुछ संसार का ही दिया हुआ है और इसका उपयोग संसार के लिए ही होना चाहिए ।

⏩ स्वामीजी ने गोदान का महत्व बताते हुए कहां कि अपात्र को गोदान देने से गोदान देने वाले एवं लेने वाले दोनों को ही नरक जाना पड़ता है इसलिए इस समय गोदान के बजाय गो के लिए दान का अधिक महत्व है और इस कलिकाल में तो चारा दान सबसे बड़ा दान है इसलिए हमारे आस पास कही भी निराश्रित गोवंश घूम रहा है उसे चारा अवश्य डाले क्योंकि वह किसानों के खेत में जाती है तो वहां डंडे की मार खाती है और और गलियों में प्लास्टिक की थैलियां इसलिए सड़कों गलियों में घूमने वाली गोमाताओं को चारा खिलाना सबसे बड़ा दान है ।

⏩ विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में आगामी 13 दिसंबर को दवा देवी फाउंडेशन का शुभारंभ एवं 15 दिसंबर को कल्पगुरु दत्तात्रेय भगवान का प्रकट उत्सव रहेगा । गो कृपा कथा के 247 वें दिवस पर गिरिराज पाटीदार एवं नंदकिशोर पाटीदार खेलागांव अतिथि उपस्थित रहें ।

248 वे दिवस पर चुनरीयात्रा मेवाड़  से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 248 वें दिवस पर चुनरी यात्रा  राजस्थान के मेवाड़ की पुण्यधरा चित्तौड़गढ़ से  गोवत्स बटुक आनन्द जी महाराज के माताश्री  शारदा बैरागी के परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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