“जीवन का नया अध्याय: विष्णु के अंगदान ने रची 8 नई कहानियां” ◾ झालावाड़ बना मानवता का प्रेरणास्रोत, ब्रेन डेड अंगदान मिशन 2.0 ने लिखी नई इबारत

◾झालावाड़ बना दूसरे ब्रेन डेड अंगदान का साक्षी
जनमत जागरण @ झालावाड़ । झालावाड़ जिले ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की। ब्रेन डेड अंगदान के दूसरे सफल प्रयास ने न केवल 8 जिंदगियां बचाईं, बल्कि यह भी साबित किया कि समझाइश और सहयोग से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। विष्णु प्रसाद, जो एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में 13 दिसंबर को ब्रेन डेड हो गए थे, उनके अंगदान ने 8 व्यक्तियों को नया जीवन दिया।
⏩ जिला कलक्टर की अपील: जिला कलक्टर ने इस सफल प्रयास में शामिल सभी चिकित्सा कर्मियों की सराहना की और समाज से अपील की कि अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाएं। साथ ही, विष्णु प्रसाद के बच्चों की शिक्षा का जिम्मा आत्माराम सेवा संस्थान को सौंपा गया, जो प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

⏩ 🩺 एकजुट प्रयास का कमाल: इस मिशन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन, मेडिकल टीम, और विष्णु के परिवार ने जिस समर्पण और सहानुभूति का प्रदर्शन किया, वह अभूतपूर्व है। जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ के कुशल नेतृत्व में एसआरजी अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने विष्णु के अंगों को सुरक्षित रखते हुए इसे चिकित्सा विज्ञान की एक सफलतम उपलब्धि में बदल दिया।

⏩ विष्णु प्रसाद के अंगदान से मिला 8 लोगों को जीवनदान :: पीपाजी का बाग मानपुरा झालावाड़ निवासी 33 वर्षीय विष्णु प्रसाद जो कि गत 10 दिसम्बर को झगड़े में घायल हो गये थे, उन्हें 11 दिसम्बर को प्रातः एसआरजी चिकित्सालय में आपातकालीन वार्ड में लाया गया। बेहोशी की हालत में होने की वजह से उनके सिर का सिटी स्केन करवाने पर पता चला की विष्णु प्रसाद के सिर में गंभीर चोट है उसकी वजह से डॉ. रामसेवक योगी ने तुरन्त सिर का ऑपरेशन करके विष्णु प्रसाद की जान बचाने प्रयास किया, परन्तु 12 दिसम्बर को प्रातः 9 बजे विष्णु प्रसाद की आंरभिक जांच से ज्ञात हुआ कि मरीज ब्रेन डेड होने वाला है।तत्पश्चात डॉ. रामसेवक योगी ने मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एव नियंत्रक डॉ. दीपक गुप्ता एवं अधीक्षक एस.आर.जी. चिकित्सालय को सूचना दी। साथ ही निश्चेतना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजन नन्दा व डॉ. रक्षा कुमारी की अगुवाही में निश्चेतना विभाग के रेजीडेन्ट डॉ. दीया, डॉ. जोयल, डॉ. धीरज, डॉ. विशाल, डॉ. आशु, डॉ. हरशिखा, डॉ. मोहन, डॉ. गगन, और डॉ. साक्षी की एक टीम बनायी गई। जिससे जब तक अंगदान सफल नहीं होता ब्रेन डेड विष्णु प्रसाद के अंगों को जीवित रखा जाये। इसके पश्चात् डॉ. रामावतार मालव, डॉ, संजीव गुप्ता, डॉ, माधुरी मीणा और डॉ. दीपक कुमार सुमन ने विष्णु प्रसाद को ब्रेन डेड घोषित किया।

⏩ जिला कलक्टर एवं मेडिकल टीम द्वारा अंगदान के लिए परिजनों से की गई समझाइश :: ब्रेन डेड घोषित होने के बाद डॉ. रामसेवक योगी तथा डॉ. विशाल नेनीवाल ने विष्णु प्रसाद के पिता हरिया जी और उनकी पत्नी अनीता को अंगदान के बारे में बताया। वहीं जिला कलक्टर अजय ंिसंह राठौड़, अतिरिक्त जिला कलक्टर सत्यनारायण आमेटा, उपखण्ड अधिकारी झालावाड़, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. साजिद खान एवं अतिरिक्त सीएमएचओ अरविन्द नागर द्वारा ब्रेन डेड विष्णु प्रसाद के परिजनों से समझाइश की गई तथा रात्रि 2 बजे अंगदान सहमति में सफलता मिली।

⏩ यह रही अंगदान की सम्पूर्ण प्रक्रिया :: अंगदान ओपटीमाईजेशन टीम के हैड डॉ. राजन नन्दा और डॉ. रक्षा कुमारी ने 13 दिसम्बर को रात 10 बजे और 14 दिसम्बर को प्रातः 9 बजे के लगभग विष्णु प्रसाद का पहला और दूसरा ‘‘अपनीया टेस्ट’’ किया। इसी के साथ डॉ. अखिलेश मीणा व डॉ. विशाल नेनीवाल ने ऑर्गन रिटरीन टीम का नेतृत्व करते हुए ऑपरेशन थियेटर तथा ओ.टी. इंचार्ज कीर्ति मित्तल तथा समस्त ऑपरेशन में भाग लेने वाले स्टाफ को ट्रेनिंग दी। इसी के साथ सर्जिकल आईसीयू के नर्सिंग ऑफिसर राहुल पाटीदार, मानसिंह लोधा, आशुतोष जुनेद, धनराज लोधा, नन्दकिशोर लोधा, लक्ष्मी नीतिन का योगदान रहा। इसके पश्चात् अंगदान कॉर्डिनेटर कैशव गौतम 14 दिसम्बर को विष्णु प्रसाद के रक्त के सैम्पल लेकर जयपुर गये। जहां एचएलए क्रोसमेचिंग करवायी गयी और साथ ही मलिक आसिफ (अंगदान कॉर्डिनेटर), डॉ. विशाल नेनीवाल, डॉ, अखिलेश मीणा द्वारा SOTTO एसएमएस अस्पताल के साथ सम्पर्क किया गया जिसकी सहायता से अंगो का अलोकेशन हुआ। अंग निकालने के लिए 14 दिसम्बर की रात को एसएमएस अस्पताल जयपुर एवं एम्स अस्पताल जोधपुर की टीमें झालावाड़ पहुंची और रविवार 15 दिसम्बर को प्रातः 6 बजे मरीज का ऑपरेशन थियेटर में अंगदान सम्पन्न हुआ। विष्णु प्रसाद की एक किडनी तथा लीवर एम्स अस्पताल जोधपुर तथा एक किडनी, दोनो फेफडे़ तथा हृदय एसएमएस अस्पताल जयपुर तथा दोनो कॉर्निया शाइन इंडिया फाउंनडेशन कोटा को पहुंचाए गए।

⏩ 🌱 समझाइश से जागी उम्मीद: ब्रेन डेड घोषित होने के बाद विष्णु के परिजनों को अंगदान के महत्व को समझाना सबसे चुनौतीपूर्ण कदम था। जिला प्रशासन और डॉक्टर्स की टीम ने रात्रि 2 बजे तक समझाइश जारी रखी, जिसके बाद परिजनों ने सहमति दी। यह कदम 8 नई जिंदगियों के लिए वरदान साबित हुआ।

⏩ ✈️ ग्रीन कॉरिडोर और एयर एंबुलेंस की व्यवस्था: समय की गंभीरता को समझते हुए जिला प्रशासन ने विष्णु के अंगों को जयपुर और जोधपुर तक पहुंचाने के लिए एयर एंबुलेंस और ग्रीन कॉरिडोर की त्वरित व्यवस्था की। यह प्रयास मेडिकल आपात स्थितियों में समय प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
⏩ जयपुर 2 व जोधपुर में एक का अंग प्रत्यारोपण-
◾जयपुर: बांगड़ परिसर में ओटी में एक महिला मरीज को हार्ट व लंग्स प्रत्यारोपित किए गए। इस प्रक्रिया में करीब छह घंटे लगे। इसी प्रकार एसएमएस अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी में एक पुरुष मरीज को किडनी प्रत्यारोपित की गई। इस प्रोसिजर में भी करीब चार घंटे का समय लगा।
◾जोधपुर : जयपुर से हेलीकॉप्टर के जरिए लिवर और किडनी जोधपुर एम्स लाए गए। जहां ये दोनों अंग बीकानेर के एक 32 साल के मरीज को लगाए गए हैं। इस मरीज को आनुवांशिक बीमारी थी व ईएसआरडी किडनी फेलियर की समस्या थी।



