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“गोभक्ति की कसौटी: स्वामीजी का संदेश और राजा भोज की प्रेरणा” -“कसाई या पोलीथिन उपयोगकर्ता: कौन है असली गुनहगार.?- स्वामीजी

⏩ "गो हत्या करने वाले कसाई और पोलीथिन का उपयोग करने वालों में कोई फर्क नहीं है - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 252 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज का दिन हम विजय दिवस के रूप में मनाते है क्योंकि 16 दिसम्बर को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के कारण मनाया जाता है। इस युद्ध के अंत के बाद 90,000 से अधिक पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया था। 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को करारी परास्त दी और उसके बाद से कोई भारत पर आंख दिखाने की हिम्मत नहीं करता है ।

"गोभक्ति की कसौटी: स्वामीजी का संदेश और राजा भोज की प्रेरणा" :: पूज्य स्वामीजी ने बताया कि एक तरफ तो हम कहते है कि गाय हमारी माता है और दूसरी तरफ जो पोलीथिन हजारों गौमाताओं को काल कल्पित कर देती है उस पोलीथिन को सभी लोग जो गाय को माता कहते है उसका उपयोग करते है और कुछ तथाकथित गो रक्षक कसाइयों की गाड़ी के पीछे भागकर उन्हें छुड़ाने बचाने जाते है ,लेकिन जब बाजार में सब्जी लेने जाते है तो गो को काल का ग्रास बनाने वाली पोलीथिन लटकाकर उसमें सब्जी लाते है और अभी सरकारों ने भी पोलीथिन पर प्रतिबंध केवल कागजों तक ही सीमित रख रखा है उसका कोई क्रियान्वयन नहीं है ।

"गाय के रक्षक या विनाशक? पोलीथिन की सच्चाई पर सवाल" :: स्वामीजी ने कहां कि गो हत्या करने वालों और पोलीथिन का उपयोग करने वालों में क्या फर्क रह जाता है क्योंकि वह प्रत्यक्ष में और हम परोक्ष रूप से गोमाता की हत्या कर रहें है। अगर आप बरसो से गोमाता के लिए काम कर रहें है, तो पोलीथिन वाले राक्षस से दूर रहना होगा अर्थात हमें अपना दोहरा चरित्र बदलकर उसे अच्छे से समझना होगा ।पूज्य स्वामीजी ने सिंहासन बत्तीसी , विक्रमादित्य व राजा भोज का प्रसंग गौसेवकों के लिए प्रेरणा का विषय है और राजा भोज की बहुत कीर्ति थी और ये सभी उनकी गोभक्ति का प्रभाव है ।

252 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  मध्यप्रदेश से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 252 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के देवास जिले की सोमकच्छ तहसील के जामगोद ग्राम के निवासी एवं गो अभयारण्य में गो चिकित्सा का कार्य देख रहें डॉक्टर जगदीश प्रसाद तिवारी के सुपुत्र राजा अभिषेक तिवारी ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी   लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया ज्ञातव्य हो कि डॉक्टर तिवारी जी का परिवार हर माह भगवती गोमाता के लिए चुनरी ओढ़ाते है और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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