मध्यप्रदेशआगर मालवादेशब्रेकिंग न्यूजस्पाट लाइट

सुसनेर: दिल्ली-इंदौर बस हादसा, 1 बच्ची की मौत, 20 से ज्यादा घायल , प्रशासन की तत्परता और जिला स्वास्थ्य विभाग निष्क्रियता हुई उजागर

किटखेड़ी बिजली ग्रिड के पास हुआ भीषण हादसा◾राष्ट्रीय राजमार्ग पर बस हादसा: स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर उठे सवाल ◾हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग की धीमी प्रतिक्रिया पर सवाल

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की लाइव रिपोर्ट बुधवार की सुबह 7 बजे करीब उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग 552 जी पर स्थित किटखेड़ी जोड़ पर बिजली ग्रीड के समीप भीषण सड़क हादसा हो गया। दिल्ली से इंदौर की ओर जा रही बस अनियंत्रित होकर के पलटी खा गई। इस दुर्घटना में 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए व 1 बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। जो बस में दब गई थी। जिसे जेसीबी मशीन से बस को सही करने के बाद निकाला गया। सभी घायलों को स्थानीय प्रशासन की मदद से पुराना बस स्टेण्ड स्थित शासकीय सिविल अस्पताल में पहुंचाया गया। करीब 8 से 9 घायलों को जिला अस्पताल रैफर किया गया है। डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के द्वारा सभी घायलों का इलाज कर वार्ड में भर्ती किया गया। SDOP देवनारायण यादव भी पुलिस प्रशासन के साथ अस्पताल पहुंचे है। घटना स्थल पर एडिशनल एसपी निशा रेड्डी, तहसीलदार विजय सेनानी, SDM सर्वेश यादव, टीआई केसर राजपूत ने भी पहुंचकर के मोर्चा सम्भाला। घटना की जानकारी लगने पर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह व एसपी विनोद कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे।

अस्पताल पहुंचे कलेक्टर- एसपी ने जाना घायलों का हाल :: घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद आगर जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह पुराना बस स्टैंड स्थित शासकीय सिविल अस्पताल पहुंचे यहां पर वार्ड में भर्ती मरीजों से चर्चा कर उनका हाल-चाल भी जाना।

एसपी का बयान: जिला पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह ने मीडिया से कहा,”बस में 30 यात्री सवार थे। हादसे में 20 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है। घायलों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।”

प्रशासन की तत्परता और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही :: घटना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीएम सर्वेश यादव, एडिशनल एसपी निशा रेड्डी, और एसडीओपी देवनारायण यादव ने स्थिति संभाली। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसपी विनोद कुमार सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना।हालांकि, यह सवाल उठता है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सुसनेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने अपनी सीमित सुविधाओं के बावजूद कुशलता से घायलों का इलाज किया, लेकिन अन्य स्थानों से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम समय पर नहीं पहुंची।

हाईटेंशन लाइन से टकराई बस: समय पर बिजली कटने से टला बड़ा हादसा :: सुसनेर के पास हुए बस हादसे में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। दुर्घटनाग्रस्त बस हाईटेंशन बिजली की लाइन से टकरा गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे के वक्त लाइट कट होने से एक बड़ा हादसा टल गया। यदि उस समय लाइन में करंट प्रवाहित होता, तो बस में आग लग सकती थी, जिससे स्थिति और भी भयावह हो जाती। बस में करीब 30 यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकांश घायल अवस्था में बस के भीतर ही फंसे हुए थे। यदि बिजली चालू होती, तो करंट के कारण बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालना नामुमकिन हो जाता और बड़ी संख्या में जानमाल का नुकसान हो सकता था। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा की खराब स्थिति को दर्शाती है, बल्कि आपातकालीन व्यवस्थाओं की अपर्याप्तता की ओर भी संकेत करती है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को ऐसे संभावित खतरों को कम करने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो सकें।

दुर्घटना में ये हुए घायल - इस भीषण सड़क हादसे में गौरव पिता हरिसिंह भदौरिया इंदौर, बिहारीलाल पिता जगदीश गुर्जर नसीराबाद अजमेर, राजीव रंजन पिता सुशील कुमार ग्रेटर नोएडा, सुदेशना पति राजीव रंजन, प्रतिशा पिता राजीव रंजन, अमिताभ पिता रामगोपाल शर्मा गुड़गांव हरियाणा, मंजू पति श्यामलाल राठौर दिल्ली, भावना पति मोहित अग्रवाल गुड़गांव, स्वीटी पति सौरभ जिन्दल दिल्ली, पूनम पति विकास दिल्ली, विकास पिता ए एन त्रिपाठी, बलविंदर पिता संतोष सिंह नसीराबाद, ओशल पिता उमेशचन्द्र दुबे दिल्ली, शिवानी पिता विपेंद्र शर्मा, सतेंद्र पिता भगवान, हनी पिता राजेश चौहान, अमित चंदन पिता कृष्णकांत पंजाब, गीतारानी पति अनिल कुमार दिल्ली, पवन पिता श्यामलाल, अनिता शर्मा व आशीष दुर्घनाग्रस्त होकर घायल हुए है इनमें से 8 वर्षीय प्रतिशा की मौत हुई है।

प्रशासन की तत्परता बनाम स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता: आपात सेवाओं की तैयारी पर सवाल : सुसनेर बस हादसे के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कलेक्टर और एसपी को आधे घंटे में घटनास्थल और अस्पताल तक पहुंचाया। स्थानीय डॉक्टरों की टीम ने सीमित संसाधनों में घायलों का कुशलतापूर्वक इलाज कर स्थिति संभाली। हालांकि, सवाल उठता है कि जिला स्वास्थ्य विभाग ने 30 किलोमीटर के दायरे में स्थित आगर, सोयतकलां और नलखेड़ा जैसे केंद्रों से चिकित्सा विशेषज्ञों और आवश्यक सहायता क्यों नहीं बुलाई। इतने गंभीर हादसे के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता न केवल चिंताजनक है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की तैयारियों पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या भविष्य में ऐसे हादसों के लिए स्वास्थ्य विभाग त्वरित और प्रभावी योजना बना पाएगा?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!