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“न्याय के नाम पर सौदा: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया उपनिरीक्षक, लोकायुक्त ने दी ईमानदारी की मिसाल”

“भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का वार: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया पुलिस अधिकारी”

जनमत जागरण @ नलखेड़ा/सुसनेर । प्रशासन में बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त इकाई ने एक और कड़ा कदम उठाया है। नलखेड़ा थाना में कार्यवाहक उपनिरीक्षक नानूराम बघेल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। यह कार्रवाई आवेदक नलखेड़ा निवासी की शिकायत पर की गई, जो अपनी नाबालिग बेटी के मामले में न्याय पाने की कोशिश कर रहे थे।

शिकायत का विवरण :: नलखेड़ा निवासी वार्ड नंबर 10, ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री 16 नवंबर 2024 को घर से लापता हो गई थी। शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस ने लड़की को मुंबई से बरामद कर 27 नवंबर को परिवार को सुपुर्द कर दिया। हालांकि, आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई।◾ पुलिस ने लड़की को लाने में खर्च के नाम पर 19,000 रुपये पहले ही वसूल लिए थे और अब उपनिरीक्षक नानूराम बघेल 10,000 रुपये की अतिरिक्त रिश्वत मांग रहे थे।

नलखेड़ा में लोकायुक्त सत्यापन और ट्रैप कार्रवाई करता हुआ ।

सत्यापन और ट्रैप कार्रवाई :: प्रभारी एसपी राजेश पाठक के निर्देशन में डीएसपी सुनील तालान ने शिकायत की जांच की, जो सही पाई गई। इसके बाद 18 दिसंबर 2024 को ट्रैप दल का गठन किया गया।जैसे ही नलखेड़ा थाना परिसर में उपनिरीक्षक बघेल ने रिश्वत की पहली किश्त 5,000 रुपये आवेदक से ली, मौके पर तैनात लोकायुक्त दल ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

चल रही कार्रवाई :: इस कार्रवाई के बाद थाना परिसर में भारी हलचल मच गई। लोकायुक्त की टीम आगे की पूछताछ कर रही है, और आरोपी उपनिरीक्षक पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

लोकायुक्त की कार्रवाई बनी न्याय की मिसाल" :: इस सफल ट्रैप कार्रवाई ने प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। लोकायुक्त की त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई से यह साबित होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में समाज की भागीदारी और जागरूकता बेहद जरूरी है।◾”न्याय की जीत और भ्रष्टाचार की हार का यह उदाहरण समाज के लिए प्रेरणा है।”

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