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गोशाला से कन्हैया तक: “भक्ति की अनमोल यात्रा” जानिए स्वामीजी ने क्या बताया रहस्य :19 दिसंबर: शहादत और विजय का ऐतिहासिक दिवस”

◾”गैया मैया की महिमा: प्रेम, भक्ति और कन्हैया तक पहुंचने का रहस्य” “

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज भारत को आजादी दिलाने के लिए अपना सब कुछ न्‍योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों राम प्रसाद बिस्‍मिल, अशफाकउल्‍ला खान और ठाकुर रोशन सिंह को 1927 में 19 दिसंबर के दिन ही फांसी दी गई थी। इस दिन को ‘शहादत दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। आजादी के इन मतवालों को काकोरी कांड को अंजाम देने के लिए फांसी दी गई थी। आज ही के दिन हमारे देश के इतिहास में एक और बड़ी घटना दर्ज है। इस दिन भारतीय सेना ने गोवा को 450 साल के पुर्तगाली शासन से आजाद कराया था और ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत भारतीय सैनिकों ने गोवा में प्रवेश किया था। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 255 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

◾"गैया मैया की महिमा: प्रेम, भक्ति और कन्हैया तक पहुंचने का रहस्य" :: स्वामीजी ने बताया कि जब हम गैया मैया को मां और स्वामिनी मान चुके हैं, तो हमें वही करना चाहिए जो उन्हें प्रिय हो। गैया मैया को प्रसन्न करना ही सच्ची भक्ति है। गैया की पूंछ पकड़ने का अर्थ है सभी भेदभावों को त्यागकर सच्ची भक्ति के मार्ग पर चलना, क्योंकि यही मार्ग भगवान तक पहुंचने का सरल माध्यम है।
> त्रिदेव—ब्रह्मा, नारायण और शिव—भी गैया मैया की पूंछ की महिमा गाते हैं। भगवान नारायण जब कन्हैया बने, तो उन्होंने घुटनों के बल चलकर गोष्ठ में प्रवेश किया और गैया की पूंछ पकड़ ली। यह बताता है कि भक्ति के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है, और गैया मैया इस शक्ति का श्रेष्ठ स्रोत हैं।
> गैया के बीच ही भगवान कृष्ण का असली ठिकाना है। मंदिर और अन्य स्थान व्यापारिक केंद्रों की भांति हो सकते हैं, लेकिन गोशाला प्रेम का सच्चा घर है। वहां प्रेम की बातें होती हैं, लेन-देन की नहीं। गोशाला में कन्हैया से संवाद, तकरार और अंततः इकरार संभव है।
> जब कन्हैया से मिलने की लालसा बढ़े, तो गोशाला की ओर कदम बढ़ाइए। क्योंकि कृष्ण ने अपने पहले कदम भी गोशाला की ओर ही बढ़ाए थे। सच्ची भक्ति और प्रेम से कन्हैया को पाना है, तो गोशाला ही वह स्थान है जहां सच्चा आनंद मिलता है।

◾255 वें दिवस पर अखंड धाम वृन्दावन से पूज्य सन्त कृपालानंद गिरी जी महाराज एवं साध्वी मयूर चेतनानन्द गिरी महाराज का सानिध्य मिला ।

◾ गो कृपा कथा के 255 वें दिवस पर हितेष दवे स्वामीनारायण संस्था के अनुयायी एवं गिर गोशाला संचालक,मनोज शर्मा जनरल मैनेजर SRM प्लांटेशन समूह रांची झारखंड,रमण यादव कोटा,अर्जुन सिंह , नारायण सिंह लोगड़ी आदि अतिथि उपस्थित रहें।

255 वे दिवस पर चुनरीयात्रा मेवाड़ एवं मालवा  से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 255 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ जिले की हुरा बा गौ सेवा स्थान करजू , चैनपुरीया से कमलेश टांक,  गोपाल ,केसु राम ,प्रहलाद ,किशन सिंह ,गंगाराम एवं लालसिंह व मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की बडौद तहसील के रणायदा केलवा ग्राम की महिला मण्डल ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी   लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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