“कत्लखानों के बढ़ते साए में पथमेड़ा की क्रांति: 64 शाखाओं से 1.57 लाख गोवंश की रक्षा” – आलोक सिंहल, मुख्य.अधि. पथमेड़ा ने सुनाई पथमेड़ा की प्रेरक गाथा” , पढ़ें – “गायों को हृदय से निकालने का दर्दनाक सच:

▪️”गायों के लिए मंदिर से बड़ा केंद्र: पथमेड़ा बना भारत का गौरव”
जनमत जागरण @ सुसनेर:: एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 273वें दिवस पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के कार्यकारी अधिकारी और ग्वाल शक्ति सेना के राष्ट्रीय सह संयोजक आलोक सिंघल ने गोवंश संरक्षण और उनकी दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारत में गोवंश की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। आजादी से पहले देश में कत्लखाने बहुत कम थे, लेकिन आजादी के बाद इनकी संख्या असंख्य हो गई, जिनमें से कई अवैध रूप से भी चल रहे हैं। यह स्थिति भारत भूमि के लिए एक गंभीर कलंक है।
श्री सिंघल ने बताया कि दुख केवल इस बात का नहीं है कि गाय को लोगों ने अपने घर से बाहर कर दिया, बल्कि इससे भी अधिक पीड़ा इस बात की है कि गाय को लोगों ने अपने हृदय से निकाल दिया है।
31 वर्ष पहले राजस्थान और गुजरात की सीमा पर 8 गोवंशों को कटने से बचाने के उद्देश्य से पथमेड़ा की स्थापना हुई थी। यह बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जो अपनी 64 शाखाओं के माध्यम से 1,57,000 से अधिक गोवंश की मातृत्व भाव से सेवा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा केवल एक गोशाला नहीं है, बल्कि यह रचनात्मक कार्यों का एक प्रमुख केंद्र है। भारत ही नहीं, बल्कि जहां भी वेदलक्षणा गोवंश विराजित हैं, पथमेड़ा उन्हें अपनी मान्यता देता है।
⏩ यह पहल न केवल गोवंश की रक्षा के लिए एक उदाहरण है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी एक प्रयास है।भगवती गोमाता के गोबर में साक्षात यमुना जी एवं लक्ष्मी देवी विराजमान रहती है और भगवती गोमाता के गोमय से ही धरती माता को बचाया जा सकता है क्योंकि धरतीमाता को हमने रासायनिक खाद बनाकर बंजर बना दिया है ओर वह इन रासायनिक खाद एवं कीटनियंत्रको के कारण मृत सी हो गई है और हमने इन पर अंकुश नहीं लगाया तो धरती माता मृत हो जाएगी यानि उसकी उर्वरा शक्ति बिल्कुल नष्ट हो जाएगी और अब तो खाद बनाने वाली कम्पनियां भी कहने लग गई है कि अगर आपने यूरिया डीएपी के साथ गोबर की खाद नहीं डाली तो आपकी उपज धीरे धीरे कम हो जाएगी। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 272 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने गोमाता के गोबर की महिमा बताते हुए कही।

⏩ 273 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश एवं राजस्थान से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 273 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के : गुरलाई बांध शाजापुर से विश्वकर्मा परिवार बडौद से सोनी परिवार एवं टोकडा गाँव से की महिला मंडलकी और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



