सस्पेंस से भरी सुबह: इंदौर-कोटा नेशनल हाईवे पर एक माह बाद फिर वही हादसा, लगभग वही समय ,जगह, वही वक्त! -17 यात्री घायल दो गंभीर

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की ग्राउंड रिपोर्ट : इंदौर-कोटा नेशनल हाईवे 552जी पर सस्पेंस से भरी घटना ने एक बार फिर सभी को झकझोर कर रख दिया। रविवार को ठीक एक महीने पहले हुई घटना की पुनरावृत्ति। एक माह , वही स्थान ,समय भी लगभग वही और बस का स्लीपर कोच होना, सबकुछ समान। ऐसा लगता है मानो ये दुर्घटना कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक गहरी पहेली हो।

◾हादसे की जानकारी : रविवार सुबह तड़के करीब 5:30 से 6:30 के बीच (समय को लेकर प्रशासन में मतभेद) दिल्ली से इंदौर की ओर जा रही स्लीपर कोच बस अनियंत्रित होकर पलट गई। घटना में 17 लोग घायल हुए, जिनमें से एक गंभीर रूप से घायल यात्री को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया। हादसे में नीचे दबा एक बच्चा काफी मशक्कत के बाद जीवित निकाला गया।

◾पिछली घटना से अद्भुत समानता:18 दिसंबर 2024 को, ठीक एक महीने पहले, इसी हाईवे पर किटखेड़ी जोड़ के पास एक स्लीपर कोच बस पलटी थी। उस हादसे में 20 लोग घायल हुए थे और एक बच्ची की मौत हो गई थी। संयोगवश, दोनों घटनाएं लगभग सुबह के एक ही समय, एक ही जगह, और एक ही प्रकार की स्लीपर कोच बस के साथ हुई हैं।
◾प्रशासन की सक्रियता:घटना की सूचना मिलते ही एसपी और कलेक्टर तुरंत मौके पर पहुंचे। हालांकि, समय को लेकर एसडीओपी और एसडीएम के बयान में विरोधाभास रहा, जो जांच का विषय है। स्थानीय प्रशासन ने घायलों को प्राथमिक चिकित्सा के लिए अस्पताल पहुंचाया और स्थिति को नियंत्रित किया।

- एसडीएम सुसनेर का बयान:
- “बस खाटू श्यामजी से इंदौर जा रही थी, जिसमें ड्राइवर और कंडक्टर सहित कुल 30 यात्री सवार थे, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। यह बस सातवे मिल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन ने मुस्तैदी के साथ स्थिति को संभाला। दुर्घटना में 17 यात्री घायल हुए, जिनमें से 2 को गंभीर हालत में रेफर किया गया, जबकि शेष यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद यथास्थान भेज दिया गया।”— सर्वेश यादव, एसडीएम सुसनेर
◾ यात्रियों की जुबानी: झपकी या कोहरे का कहर?बस में सवार यात्रियों ने हादसे का कारण बताते हुए दो अलग-अलग बातें कहीं। कुछ का मानना है कि ड्राइवर को झपकी लगने के कारण बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जबकि अन्य यात्रियों का कहना है कि घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी, जिससे यह हादसा हुआ। चाहे कारण झपकी हो या कोहरा, दोनों ही स्थिति में ड्राइवर की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे मौसम में सतर्कता और नियमित ब्रेक लेना जरूरी है। यात्री भी अपील कर रहे हैं कि ड्राइवर को ऐसे हालात में पर्याप्त आराम और सावधानी बरतनी चाहिए ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
◾क्या यह महज संयोग है या कुछ और? लगातार दो बार एक जैसी घटनाओं का होना केवल संयोग है या इसके पीछे कोई अन्य कारण? यह सवाल प्रशासन और स्थानीय जनता के बीच गहरी चिंता पैदा कर रहा है।
◾प्रशासन के लिए चुनौती:दो समान दुर्घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बन गई हैं। क्या यह महज इत्तेफाक है या किसी बड़ी खामी का परिणाम? इसका उत्तर प्रशासन को खोजना होगा। नेशनल हाईवे 552जी पर दो समान घटनाएं लोगों को डराने के साथ-साथ कई सवाल खड़े कर रही हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस रहस्य को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है, यह देखना होगा।

⏩ घायलों की सूची और उपचार की स्थिति ::
खाटू श्यामजी से इंदौर जा रही स्लीपर कोच बस के हादसे में घायल यात्रियों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इनमें से अधिकांश का प्राथमिक उपचार चल रहा है, जबकि सुरेंद्र सिंह और मयंक भूतड़ा दो गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।
घायलों की सूची इस प्रकार है:
1. सुरेंद्र सिंह (पिता: नाथूसिंह, उम्र 35, शाजापुर)
2. सिम्मी (पिता: दयानंद, उम्र 23, झारखंड)
3. नेहा (पिता: विवेक प्रकाश, उम्र 27, वेस्ट बंगाल)
4. शिवाजी (पिता: हरिप्रताप, उम्र 23, इंदौर)
5. पिंकेश (पिता: दत्ताजी, उम्र 38, इंदौर)
6. तंजिला (पिता: इस्लाम, उम्र 25, कोटा)
7. सुरेश (पिता: देवकरण, उम्र 30, इंदौर)
8. अंकिता (पति: सुरेश, उम्र 25, इंदौर)
9. सुमित (पिता: दिनेश कांबले, उम्र 29, इंदौर)
10. मयंक भूतड़ा (पिता: मोहनलाल भूतड़ा, उम्र 37, इंदौर)11. निमिता (पति: मयंक भूतड़ा, उम्र 34, इंदौर)12. कथानक (पिता: मयंक भूतड़ा, उम्र 1.5 वर्ष, इंदौर)13. पवन (पिता: प्रह्लाद शर्मा, उम्र 35, जयपुर)14. पीयूष गर्ग (पिता: प्रेमचंद, उम्र 29, जयपुर)15. मनु (पिता: हेमंत शारस्वत, उम्र 32, जयपुर)16. राजेश (पिता: बालूराम, उम्र 40, जयपुर)17. रचना (पिता: विजय सिंह राजपूत, उम्र 27, देवास)प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर घायलों की देखभाल कर रही है।

⏩ सुसनेर सिविल अस्पताल में घायलों का उपचार, लेकिन डॉक्टरों की कमी उजागर ::
हादसे के बाद सभी घायलों को सुसनेर सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉ. हर्षिता टटावत ने कुशलतापूर्वक उनका उपचार किया। सिविल बीएमओ डॉ. राजीव कुमार बरसेना भी मौके पर मौजूद रहे और स्थिति को संभाला। हालांकि, इस घटना ने सुसनेर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी की समस्या को फिर उजागर कर दिया है।सिविल अस्पताल सुसनेर, अपने सिविल दर्जे के बावजूद, डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में अस्पताल में केवल 5 डॉक्टर हैं, जिनमें से एक बीएमओ हैं और एक महिला डॉक्टर एक माह की ट्रेनिंग पर गई हुई हैं। शेष तीन डॉक्टरों के भरोसे पूरा अस्पताल संचालित हो रहा है। यदि इस तरह की घटनाएं और गंभीर होतीं, तो इतनी कम मेडिकल स्टाफ के साथ स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता। प्रशासन को डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए शीघ्रता से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।



