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अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

“287 दिन की तपस्या: गौसेवा का संकल्प व गौरक्षा का महाअभियान: “क्या भारत बनेगा गौसेवा का आदर्श? – सड़कों से मंदिरों तक आंदोलन की तैयारी” स्वामीजी ने बताई राह”

▪️"दूध से प्रेम तक: गोसेवा की नई परिभाषा गढ़ने की जरूरत" - "क्या गौमाता की व्यथा का अंत निकट है? जानें स्वामी जी की योजना"

जनमत जागरण न्यूज डेस्क सुसनेर।  
गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा का विचार कश्मीर से कन्याकुमारी ओर कांडला से लेकर कोहिमा तक अथवा भारत भूमि से बाहर जहां कहीं भी वेदलक्षणा गौमाता है उन सब गौमाता को हम अपनी मां मानकर के सब को कैसे सुख पहुंचा सके और उनको सुख पहुंचा कर विश्व को कैसे अध्यात्म, सात्विकता, मैत्री भाव, अहिंसकता, आनंद की ओर ला सके उसके लिए गौसेवा ही एक मात्र रास्ता नजर आता है।
गांव गांव गली गली नगर नगर निर व्यसनी गोवर्ती, गौमाता का हृदय से आदर करने वाले, कामना रहित गोप्रेमी एक एक भाई बहन जब तैयार हो जाए तब वह स्थिति आएगी जब कोई गौमाता राजमार्गो पर लघु मार्गो पर निराश्रित भ्रमण करती हुई नहीं दिखेगी, किसी भी वाहन से दुर्घटनाग्रस्त नहीं होगी, महामारी की अवस्था में सेवा रहित नहीं रहेगी, वृद्धा अवस्था में घर से निकाली नहीं जाएगी, दूध का लालच समाप्त हो जाएगा और प्रेम भाव प्रकट हो जाएगा इसमें हम सामर्थ अर्जित कर पाएं। इसी परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए सैकड़ों भाई बहन संकल्पित होकर कार्य कर रहे है।
यही समय है जब इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 287 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने कही।

⏩ ग्वाल शक्ति सेना में 5 हजार पूर्ण गोव्रती कार्यकर्ताओं की श्रृंखला में महाराष्ट्र शंभाजी नगर कुड़ी तहसील कनड प्रभारी मलाव राव गोडसे एवं गुजरात के द्वारका जिला प्रभारी हार्दिक भाई की नियुक्ति की उद्घोषणा हुई ।

287 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 287  वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की सुसनेर तहसील के  कंवराखेड़ी ग्रामवासी अपने सम्पूर्ण ग्राम की और से  सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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