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“मासूम की अस्मिता से खेला, कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा – क्या ऐसे दरिंदों को मिलेगी और कड़ी सजा?”

जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क सुसनेर। न्यायालय ने एक नाबालिग के साथ घिनौना कृत्य करने वाले आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास और 16 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। अपर सत्र न्यायालय सुसनेर के न्यायाधीश श्रीमान पंकज कुमार वर्मा ने विशेष लोक अभियोजक पवन सौलंकी के तर्कों से सहमत होते हुए यह सख्त सजा सुनाई।

कैसे हुआ अपराध, क्या थी पूरी घटना? – फरियादी पिता अपने कामकाज के सिलसिले में हरदा गया हुआ था। इसी दौरान, 22 अप्रैल 2023 की रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच उसकी 13 साल 11 माह 28 दिन की मासूम बेटी घर से लापता हो गई। परिवार ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। मां को शक हुआ कि कोई उसे बहला-फुसलाकर ले गया है। जब उन्होंने पिता को फोन पर जानकारी दी, तो वह तुरंत 23 अप्रैल को घर लौटे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

आरोपी को कैसे पकड़ा गया? लगभग 8 दिन बाद, पुलिस ने नाबालिग को दस्तयाब किया। उसने पुलिस को बताया कि अभियुक्त ने उसके साथ जबरदस्ती गलत काम किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने धारा 363, 366, 376(3), 376(2)(एन), 376 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 3/4, 5(एल)/6 के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया।

कोर्ट का सख्त संदेश – दरिंदों को नहीं मिलेगी राहत! – अदालत ने यह साफ कर दिया कि बच्चों के साथ अमानवीय अपराध करने वालों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। इस केस में विवेचना उप निरीक्षक आलोक परेटिया ने की, जबकि कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक आशीष सोनी, थाना मुंशी रामेश्वर यादव एवं सहायक ग्रेड 03 कृष्णकांत अग्रवाल ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

क्या सजा और सख्त होनी चाहिए? – इस फैसले के बाद सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे मामलों में उम्रकैद या फांसी जैसी सजा होनी चाहिए, ताकि समाज में सख्त संदेश जाए? कानून भले ही अपना काम कर रहा हो, लेकिन समाज को भी ऐसे अपराधों के खिलाफ जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है।

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